काफी समय पहले राजसमन्द उदयपुर जिले के अंदर माना जाता था ! तब सारे प्रशासनिक कार्यों आदि का निर्णय भी वहीं से लिया जाता था !
फिर आया 10 April 1991 का पावन दिन जब राजसमन्द को जिला बनाया गया ताकि इस जगह का ज्यादा से ज्यादा विकास हो पाये ! अब यह तो आप सभी जानते ही होंगे कि राजसमन्द जिले में सात तहसीलें है जिनके नाम इस प्रकार से हैं ।
राजसमन्द जिले की सात तहसीलेः
राजसमन्द
रेलमगरा
आमेट
देवगढ़
भीम
कुम्भलगढ़
नाथद्दारा
राजसमंद का इतिहास काफी प्राचीन और गौरवशाली रहा है तथा भाव और भक्ति से सराबोर यहां कि धरती है ! यहां काफी प्राचीन स्थल व मंदिर आदि भी हैं जो कि अपने आप में एक विशेष महत्व रखते हैं, मुख्य रुप से वो इस प्रकार से हैं ।
राजसमंद जिले के प्राचीन मंदिर और भक्ति से परिपुर्ण स्थलः
- श्री द्धारिकाधीश मंदिर कांकरोली, राजसमंद
- श्रीनाथ जी मंदिर, नाथद्धारा
- श्री चारभुजा जी का मंदिर, चारभुजा गढ़बोर
- श्री रुपनारायण जी का मंदिर, सेवन्त्री
- श्री परशुराम महादेव मंदिर, केलवाडा
- श्री कुन्तेश्वर महादेव मंदिर, फरारा
- श्री काबरी महादेव मंदिर, गलवा, काबरी
- श्री मातृकुन्डिया मंदिर, मातृकुन्डिया, गिलुन्ड
- श्री आंजना माता मंदिर, देवगढ़, मदारिया
- श्री आमज माता मंदिर, रिंछेड
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सडक पर चलना आजकल उतना जरुरी है जितना कि खाना खाना, नहाना या काम काज करना ! सडक पर हर आदमी को चलना पडता है चाहे वह कोई सादा सा साधारण मामूली आम आदमी हो या फिर खासमखास ! और आबादी मे अव्वल होने कि वजह से सडक पर ट्राफिक में चलना आसान नहीं रहा, पग पग पर खतरे ! पर कर भी कुछ नहीं सकते क्योकि चले बिना और वाहन चलाए बिना हम रह ही नहीं सकते ! आज में तीन छोटी घटनाएं बताने वाला हूं जो बताती है कि आजकल लोग सडक पर और ट्राफिक में चलने के दौरान किस किस तरह के व्यवहार करते है !
एक आम व्यक्ति अपनी साधारण सी मोटर साईकिल पर मध्यम स्पीड से सडक पर जा रहा है, थोडा आगे देखता है तो सडक संकडी है पर और एक जगह ए॓सी परिस्थिती होती है कि एक मोटरसाईकिल सवार ही एक बार में निकल सकता हो, रास्ता साफ ही था, उसे लगा कि वह निकल जाएगा और आगे निलकते ही सडक फिर चौडी है ही ! पर यकायक महंगी सी मोडीफाईड बाईक पर दो लेटेस्ट फैशन के कपडे पहने हुए लफंगे टाईप के नौजवान रफ्तारपुर्वक तेजी से मोटरसाईकिल चलाते हुए चले आ रहे हैं, उन लफंगों ने भी सडक की स्थिती को देख लिया कि यहां एक बार में एक मोटरसाईकिल सवार ही निकल सकता, नौजवान ने तुरंत एक हाथ से इशारा किया किः अबे तू रूक हम निकल रहें हैं, केवल इशारों कि भाषा में बात हो गई ! आम व्यक्ति नें अपनी साधारण मोटर साईकिल की रफ्तार कम की और लफंगे नौजवान तेजी से कट मारते और धुंआ उडाते हुए निकल गये !
एक सीधी सडक पर एक तिराहा जुडता है जहां वही आम आदमी कम स्पीड में चला जा रहा था अपनी मोटरसाइकिल पर, रात के आठ बजे थे और क्युं कि तिराहे पर उसे मुडना था तो उसने अपनी मोटरसाइकिल का उस तरफ वाला इंडिकेटर चला दिया, अभी बीच सडक पर मुडने को चला ही था कि अचानक तेज रफ्तार में एक ओटो निकला जिसे कि सीधा जाना था, पर वह मोटरसाईकिल वाला आम आदमी तो कम रफ्तार से मुड चुका ही था ! तिराहा होने के बवजुद टेंपों वाला कम स्पीड नहीं करता है और एक भद्दी सी गाली तेज आवाज में मोटरसाईकिल सवार को सुनाता है “ए॓ रे आन्दिया” ! वह मोटरसाईकिल वाला आम आदमी सुन कर भी अनसुना करता है और गलती उसकी नहीं होने के बावजूद भी चला जाता है !
एक संकडी सडक पर दो मोटरसाईकिलें क्रोस होने वाली थी, एक मोटरसाइकिल पर दो आदमी सवार थे व एक मोटरसाइकिल पर एक अकेला सवार था ! कम जगह होने के वावजुद दो सवारों वाली मोटरसाईकिल अपनी रफ्तार में तेजी से निकलती है और सिंगल वाला आदमी कम स्पीड में ! दोनो वाहनचालकों को लगता हे कि अब अडी अब अडी ! पर गाडीयां अडती नहीं है और निकल जाती है, उस भरे बाजार में दो सवारों वाली मोटरसाईकिल पर से एक सवार चिल्ला कर बहुत ही भद्दी सी गाली देता है !
क्या गालीयां देना, होडा होडी करना, बडा में छोटा सामने वाला ! पहले में बाद में वो ये सब ही हमारी सोच है ! अगर ए॓सा है तो यह गलत है ! अंत में, वह बात में में अपने पाठकों तक पहुंचाना चाहता था वो यह है कि सडक पर भी इंसान बने रहें, वैसा ही व्यवहार करें जैसा आपको खुद भी बुरा ना लगता हो या खुद को पसंद हो ! ए॓सा नहीं कि वाहन हाथ में आ गया तो अपनी बादशाहत हो गई हो जैसे ! हर सेर को सवा सेर मिलता है, सभी लोग कुछ बात सुन कर भी चुपचाप निकल जायें इस टाईप के नहीं होते !
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August 14th, 2010 · उलझन
आजकल जब से बैंकों का आनलाईनीकरण हुआ है तब से ही बेंक कर्मियों की पौ बारह है ! कुछ समय पहले मेनें एक बैंक में देखा कि बैंक के एक कर्मचारी सज्जन एक पुराने ग्राहक को जो कि विड्रोल भर कर पैसा कैश कराने आये थे ऊनको सलाह दे रहे थे कि सर आप ए.टी.एम. कार्ड इश्यु करवा लिजीये !
अब फलां सज्जन ये कीमती सलाह क्यों दे रहे थे उसके पीछे कारण है कि जब लोग ए.टी.एम. से पैसा निकालेंगे तो बैंक के कर्मचारी का समय बचेगा जो कि सिक्के देने, एन्ट्री करने व पेमेन्ट देने में लगता है ।
अब कोई ए.टी.एम. गलत या खराब नोट ग्राहक को दे दे तो ये बैंक के कर्मचारी तोते की तरह रता रटाया जवाब दे देते हैं कि हमारे बेंक में एक एक नोट जांचा जाता है फिर ए.टी.एम. मशीन में भरा जाता है तो कुल मिला कर हम नोट चेंज नहीं करेंगें ! या ज्यादा जल्दी हो तो आप हमारे बेंक के टोल फ्री नंबर पर शिकायत कर दो, वे लोग सुनेंगे आपकी !
ग्राहक ये सभी बातें सुनकर अपना माथा पीट लेता है कि कहां फंस गए यार !
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