Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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इस बार मानसून मेहरबान रहा राजसमन्द पर

August 29th, 2016 · राजसमन्द जिला

मानसून इस साल राजसमन्द पर मेहरबान रहा हैं और कहा जा रहा है कि औसत से थोडी ज्यादा ही बारिश हुई हैं | वैसे तो राजसमन्द झील में पानी तभी अच्छा आता हैं जब चारभूजा या कुंभलगढ़ इलाके में तेज वर्षा हो | बाघेरी का नाका में भी कुछ रोज पहले तक चार फीट तक का ओवरफ्लो हो रहा था अभी ये एक या सवा फीट हो कर चल रहा हैं | तो बात चल रही थी राजसमन्द झील की, ये अपने आप में एक अनोखी झील हैं और

राजसमन्द झील से जुडी कुछ पुरानी यादेः

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ये दो फोटो सन 1973 के आसपास समय की हैं जब हमारा राजसमन्द तालाब फुल हुआ था | बुजुर्ग लोग अब भी वे किस्से सुनाते नहीं थकते जब वे झील के ओवरफ्लो को देखने के लिये आये थे |

ब्रिटिश राज में इम्पीरियल एयरलाइन्स के जहाज

ब्रिटिश राज में इम्पीरियल एयरलाइन्स के जहाज

ये फोटो है देश की आजादी से पहले का जब हमारे राजसमन्द झील में पानी के हवाईजहाज उतरा करते थे | ब्रिटिश राज में इम्पीरियल एयरलाइन्स के जहाज माल व लोगों को लाने ले जाने के काम आते थे | कहते हैं कि तब उदयपुर का हवाईअड्डा भी अस्तित्व में नहीं था |

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पानी बिन सब सून

July 7th, 2016 · राजसमन्द जिला

पानी की कमी

पानी की कमी

हमारी वेबसाइट के एक पाठक ने हमें अ‍पने गांव की समस्या से रूबरू करवाया हैं | उनका नाम है नरेन्द्र सिंह राजपूत और वे पीपरडा राजसमन्द से हैं | उन्होनें हमें पत्र लिखा हैं वो इस प्रकार हैः

राजसमन्द में आज भी बहुत ऎसे गांव हे जहाँ नल की सुविधाएं नहीं हे | जिस में मेरा गाँव भी हे | मेरा गाँव पीपरडा पोलिकाकर है जहाँ ना तो नल लाइन हे नहीं सरकारी बोरवेल | पीने का पानी भी एक प्राइवेट बोरवेल हे, जहाँ से पीने का पानी लाना पड़ता हे कभी वो बोरवेल ख़राब होजाता हे तो टेंकर मंगवाना पड़ता हे ज़िला अधिकारी से विनीती हे आप नल लाइन हमारे गांव में लगवाने का कष्ट करे, धन्यवाद |

तो नल या जलदाय विभाग से जो भी सज्जन ये पावर रखते हें, वे कृपया मदद करें |

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कांकरोली में नशेखोरी पर लगाम कसनी होगी

June 3rd, 2016 · उलझन

कांकरोली में नशेखोरी पर लगाम कैसे कसी जाये :

राजसमंद का कांकरोली वैसे तो बडा ही शांत कस्बेनुमा शहर हैं, पर यहां विगत कुछ समय से नशेखोरी की समस्या बढ़ती ही जा रही हैं खास कर के युवाओं में | पता नहीं कौन लोग केसे बडी सुलभता से इन्हें नशे के साजो सामान उपलब्ध करा देते हैं कि जहां सुनसान देखो वहीं ये नशेखोर दिखाई दे जाते हैं, पान गुटखा, बीडी सिगरेट तो ठीक है पर शराब, गांजा, चिलम पीना, नशे की दवाइयां गोलीयां व इंजेक्शन लेना और पन्नीयों से पता नहीं क्या क्या करना ………….. क्या यहां का युवा वर्ग पूरी तरह से भटक चुका हैं ?

नशेखोर

कहीं कहीं गांवो में तो महिलाएं भी गुटखे बीडी तम्बाकु और शराब तक का सेवन कर रहीं हैं जो कि गलत हैं |

सरकार को इन पर पूरी तरह से लगाम कसने के लिये बार बार दबिश दे दे कर के इनके आकाओं और नशेखोरों को भी पकडना होगा व उन्हे ठीक करने के प्रयास करने होंगे | कांकरोली शहर की शांति को बनाये रखने के लिये ये बहुत जरुरी हो चुका हैं |

नशे की ललक में ये मूरख नशेडी किसी सीधे साधे व्यक्ति की कार के कांच फोड कर सामान चुरा रहे हैं तो कहीं बेंक के बाहर घात लगाकर बैठे हैं व किसी का बैग ले भाग रहे हें, या शहर की महिलाओं की चेने खींच के परेशान कर रहे हैं |

आम शहरी लोगों की तो हालत ए॓सी ही कि पुलिस के जवानों को वैसे ही कहीं देख ले तो उनका गला सूख जाता हें, वे बेचारे कहां शिकायत करे, किसको कहें और कोई थोडी हिम्मत दिखा के शिकायत करने पहुंच भी जाते हें तो किसी किसी के साथ तो ए॓सा बर्ताव किया जाता हैं कि वे खाकी कोट से तौबा ही कर लेते हें कि [Read more →]

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ये पेंथर पेंथर क्या है ये पेंथर पेंथर

May 24th, 2016 · नई खबरें

राजसमंद में फिर पेंथर:

राजसमंद में पेंथर संबंधित खबरें इस बार इतनी बनी हैं कि बस, सिर्फ एक छः महिने के अल्प समय में कई बार पेंथर इंसानो के घरों, बाडों और सडकों पर आये हैं | कुछ समय पहले ही राजसमंद के कांकरोली, पडासली, नाथद्धारा, कुंभलगढ़ एरिया ‌और मार्बल की खदानों के आस पास अक्सर पेंथर परिवार देखा गया है | लगता हैं कि पेंथर आदि के लिये राजसमंद की आब औ हवा अनुकुल हैं और इन्हे यहां आसानी से खाना पानी भी मिल रहा हैं तभी ये आम जनता को बार बार दिख ही जाते हैं |

आस पास के गावों के बाडों में से बछडे ले जाना और गायों भेंसों पर हमला तो अनेको बार ये कर चुके हें | प्रशासन भी भरसक प्रयास कर रहा है कि इन्हे पकड कर सेंचुरी या और कहीं सुरक्षित पहुंचाया जाये | पर राजसमंद के फोरेस्ट विभाग के पास संसाधनों की कमी हें, ट्रांकुलाईजेशन एक्सपर्ट भी यहां नहीं हे और ना ही जरुरी साजो सामान |

अभी हाल ही में लंगोट चौराहे के पास जब चार माह का पेंथर का बच्चा कहीं से आकर के मोटरसाइकिल के नीचे बैठ गया था , फिर लोगों की भीड से घबरा कर मकानों के किनारे बनी नाली में छिप गया था उसे भी हमारी काकंरोली की फायर बिग्रेड व पुलिस जवानों की मदद से वन विभाग के जवानों ने पकडा | खैर जो हुआ अच्छा हुआ, पर भविष्य में प्रशासन इन पर ध्यान दे ताकि शहरों में जंगली जीव जानवर ना आयें |

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तेंदुए का सिर पानी भरने वाले स्टील के घडे में अटका

October 3rd, 2015 · नई खबरें

अरे भला ये भी क्या बात हुई | तेंदुए का सिर पानी भरने वाले स्टील के घडे में कैसे अटका, ये शहर ना ना देश भर में चर्चा का विषय बना रहा | हुआ यूं की राजसमन्द में एक तीन साल के नए नए युवा हो रहे तेंदुए ने पानी पीने के लिये गांव के घर का रुख किया पर ये उसका बुरा दिन था पानी पीने के लिये जेसे ही उसने अपना सिर पानी भरने वाले स्टील के घडे में डाला की फिर वो वापस निकाल हीं नहीं पाया | अब वो बेचारा गांव के आस पास बडा ही परेशानी से घूम ही रहा था, कि लोगों ने उसके फोटो खींचे विडियो बनाये और सोशल साइ्ट्स पर भेज डाले | फिर वन विभाग को खबर की गई अब अपने शहर में ए॓सा कोई शूटर या बेहोश करने की भी दवाइयां व उपकरण भी नहीं की तत्काल तेंदुए को राहत दिला दे |

फिर कोई उदयपुर से किसी संबंधित व्यक्ति को बुला ट्रांकुलाइज्ड करवाया गया, और घडे से उसे मुक्त किया गया | फिर उसे कुंभलगढ़ के जंगलों मे छोडा गया | फंस गया बेचारा | अब वो सारी जिदंगी किसी गांव शहर का रुख नहीं करेगा, और अगर आया भी तो किसी घडे से पानी पीने की कोशिश तो हरगिज नहीं करेगा |

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