Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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कांकरोली राजसमन्द का महाशिवरात्री त्यौहार

February 17th, 2015 · उत्सव एवं त्योहार

महा शिवरात्री का त्योहार सभी जगहों पर बडी धूमधाम से मनाया जाता हैं पर हमारे राजसमंद में इस दिन कुछ विशेष ही आलम रहता हैं | कांकरोली में भी बहुत से शिव मंदिर हैं और इस दिन तो शिवजी की पूजा और दर्शन की बडी विशेष महत्ता है | सो हजारों में दर्शनार्थी यहां के शिवमंदिरों में जाते हैं | पुष्प, मालायें प्रसाद आदि चढ़ायें जाते हैं और लोग सपरिवार दर्शन करने जाते है | इसी दौरान प्रसाद, आरतीयों और भजन मंडलियों में भी श्रोताऔं को बडा ही लुत्फ मिलता हैं | कुछ लोग शिवजी का हरा वाला प्रसाद भी ग्रहण करते हैं, दर्शनों हेतु पैदल जाते हैं और इसी बहाने पिकनिक भी हो जाती हैं |

shivratri

Maha Shivratri

राजसमंद जिले में अनेकों शिव मंदिर हैं पर उनमें से कुछ प्रमुख यहां सुचीबद्ध हैं ‍

गुप्तेश्वर महादेव, कांकरोली
चौमुखा महादेव, जलचक्की कांकरोली
विशम्भर महादेव, पुरानी कलेक्ट्री परिसर, राजनगर
रामेश्वर महादेव, राजनगर
कुन्तेश्वर महादेव या फरारा महादेव, फरारा गांव, राजसमंद
कु्भंलगढ़ में नीलकन्ठ महादेव मंदिर, केलवाडा
परशुराम महादेव मंदिर, केलवाडा
महामंगलेश्वर महादेव, मातृकु्ंडिया
आन्जनेश्वर महादेव, आन्जना
भूतेश्वर महादेव, भूतगिरि जी बावजी का आश्रम, सोनियाणा
हरकुन्डेश्वर महादेव, स्टेशन रोड, काकंरोली
रघुकुलेश्वर महादेव, जे.के. टायर फेक्ट्री, कांकरोली
वेवर महादेव, चन्द्रभागा नदी तट, आमेट

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कु्ंभलगढ़ हेरिटेज वाँक

February 5th, 2015 · उत्सव एवं त्योहार, कुंभलगढ़

कु्ंभलगढ़ हेरिटेज वाक:

कु्ंभलगढ़ किले को पर्यटन के लिहाज से और भी ज्यादा समृद्ध करने के लिये कु्ंभलगढ़ हेरिटेज वाँक का कार्यक्रम जिला प्रशासन और राजस्थान के पर्यटन विभाग ने चालू किया हैं | लगभग साल के अतं में ये आयोजन किया जाता हैं ‌| कु्ंभलगढ़ दुर्ग की प्राचीर पर रजिस्ट्रेशन से कुछ प्रतियोगियों को चुना जाता हैं को वहां वाक करते हैं, चलते हैं | इसके लिये पहले से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होता हैं | इसी क्रम में यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नृत्य, गायन आदि के भी आयोजन होते हैं |

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बच्चन जी की मधुशाला में से व्यंग्य

October 18th, 2014 · हास्य

अभी कुछ रोज से में हरिवंश राय बच्चन जी की मधुशाला को फिर से पढ़ने सुनने लग गया था, हरिवंश राय जी ने मधुशाला को लिखा ही इतनी तबीयत से है कि कोई भी इसका मुरिद बने बगैर नहीं रह सकता हैं | यू ट्युब पर बडे ही जोरदार विडियो हैं, कुछ मन्ना डै के गाये हुए, कुछ अमिताभ जी के पर हैं सभी एक से बढ़ कर एक |

पर क्या है कि इन्हीं पक्तियों को पढ़ते पढ़ते आज के माहौल के संदर्भ में एक बात याद आ गई | बरसों पहले लिखी कविता और आज के शहरों के बाजारों में बहुत समानताएं हैं |

तो हरिवंश राय बच्चन कि मधुशाला का एक अंश इस प्रकार है किः

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवाला,
‘किस पथ से जाऊँ?’ असमंजस में है वह भोलाभाला,
अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ
‘राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला।’।

हमारी सरकार को चूंकि शराब से एक बहुत बडे हिस्से में राजस्व प्राप्त होता है तो आजकल गली गली में, हर सडक पर इतनी मधुशालाएं खुल चुकी है कि पूछो मत | बस आप तो अपने गांव या शहर की एक सडक को पकड लो और चलते चलो, मधुशाला आपको मिल ही जायेगी, इस बात की गारंटी है मियां |

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काकंरोली का बस स्टेंड फिर से पुरानी जगह पर जा रहा है

January 15th, 2014 · उलझन, नई खबरें, राजसमन्द जिला

जी हां सही सुना आपने हमारी नेता किरण जी ने पता नहीं कुछ क्या प्रयास किये हैं कि हमारे शहर काकंरोली का बस स्टेंड फिर से पुरानी जगह पर जा रहा है, बस स्टेंड किसी भी कस्बे या शहर का मेन ए॓रिया होता हैं जहां सभी व्यवस्थाओं का होना जरुरी माना जाता है |
सबसे पहले पुराना कांकरोली का बस स्टेंड था, फिर धोइन्दा के बस स्टेंड को डीपो बनाया गया जिसकी क्या दशा है ये हर कोई शहरी जान रहा है, फिर जनता की जागरुकता और शहरवासियों की लडाइयों के बीच कुछ समय बस स्टेंड को कमलतलाई के पास खाली जगह पर स्थापित किया गया था, उसके बाद इसे हमेशा के लिये जे.के मोड. स्थित तिराहे पर ले जाया गया, कम जगह के कारण यहां कुछ दुर्घटनाएं भी हुई, अब प्रशासन फिर जागा हैं | और हंसने की बात है कि लोगों ने इसे लंगोट तिराहे का नाम दे दिया है | लंगोट तिराहे या लंगोट चौराहे के इस उपनाम ने तो हमारे प्रसिद्ध शहर को दूसरे लोगों की नजर में एक मजाक सा बना दिया |
और अब लोग एक दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं कि बस स्टेंड को फिर से पुराने बस स्टेंड पर ले जाया जा रहा हैं |

अब बात ये है कि लोग शहर में बस स्टेंड की जगह को बार बार परिवर्तित क्यों करते हैं ?

पुराने बस स्टेंड के जे.के. मोड चले जाने से पुराने बस स्टेंड पर दुकानों की ग्राहकी में फर्क पड गये, प्रोपर्टी की वेल्यू कम हो गई वही जे.के मोड के वहां दुकानों मकानों के भाडे यकायक बढ़ गये |
लोग ये भी कहते है कि धोइंदा के किसी स्थानिय नेता ने अपने कार्यकाल में रहते बस डिपो को धोइंदा रखवा दिया जहा रसूखदार लोगों की जमीनें थी जमीनों के भाव बढ़े और धोइंदा जैसे गांव में कुछ सरकारौ प्रोजेक्ट आया ये बडी बात थी |
यहां शहर में पहले बस स्टेंड के परिवर्तित हो कर जे.के मोड. स्थित जगह पर जाने से जा जाने कितने आम शहरी ग्रामीण लोगों को दिक्कते आयीं | क्यों नही सत्ता के लोगों व प्रशासन के कारिन्दों मे कुछ सूझबूझ हो जिससे एक बार में ही ए॓सा निर्णय लिया जाए की जो हमेशा के लिय॓ लाघु रहे |
कुछ प्रशासनिक अधिकारीयों व स्थानिय नेताऔं के अदूरदर्शितापूर्ण कृत्यों से ही आम आदमी सालों तक परेशान होते रहे | क्या अब ये सब करने का कुछ तुक है ?

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चुनावी चर्चा

October 5th, 2013 · उलझन

लिजीये फिर से चुनाव होने वाले हैं, और विभीन्न चुनावी चर्चाओं के बाजार गर्म हैं | हर कोई अपनी अपनी चुनावी पार्टी में अपनी खुद की महत्ता को सिद्ध करने मे लगा हुआ है, की हम फलां आंदोलन के भाषण में थे, फलाना रेलीयों में हमने बढ़ चढ़ कर भाग लिये थे, और आलाकमान आप चाहे आपकी खिदमत नें पुराने फोटो और विडीयो की सीडीयां भी प्रस्तुत हैं बस अब की बार सिर्फ मुझे टिकट दिलवा दो, प्लीज प्लीज………… |

अब देखना ये है कि उपर के लोग किसके कांधे पर हाथ रखते हैं, या फिर कोई छुटभैये कैसे जोड जुगाड लगा कर अपनी बात सिद्ध करवा ही ले, सब तरफ सब तरफ भाई भतीजावाद, भ्रष्ट्राचार और रिश्वतखोरी का आलम जो हैं, पता ही नहीं चलता है कि कौनसी राजनीतीक पार्टी साफ छवी वाली हैं, फिर इन तथाकथित राजनीतीक पार्टीयों में उपर के लोग भी तो ग्राहक को देखते हैं कि कौन जिम्मेदारी उठाने के योग्य है भी नहीं कि बाद में पता चले लुटिया ही डूब गयी |

राजनीती गंदी नहीं है पर लोग इसे गंदा बनाते हैं, अच्छे लोग चाहे तो क्या कुछ नहीं हो सकता हैं हमें तो कभी याद नहीं आता कि किसी मोहल्ले का पार्षद चुनाव के बाद भी अपने मुहल्ले में जनसंपर्क करके लोगो से उनकी तकलीफे पूछता हो | अलबत्ता उसने चुनावी समय में हर किसी को हाथ जोड जोड करके अपने पक्ष में वोट करने की अपीलें की हो | ये नेता लोग अपने एरिये से जीतने के बाद ए॓से गायब होते हैं जैसे गधो के सिर से सींग |

पर अब हम किसे वोट देवेः

अब किसी ना किसी को तो वोट देना ही होगा, इसलिये सिर्फ और सिर्फ इमानदार, हर किसी की मदद करने वाले और खास तौर से साफ छवी वाले व्यक्ति को ही हमें वोट देना चाहिये |

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