Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

Rajsamand District, Rajasthan header image 1

काकंरोली का बस स्टेंड फिर से पुरानी जगह पर जा रहा है

January 15th, 2014 · उलझन, नई खबरें, राजसमन्द जिला

जी हां सही सुना आपने हमारी नेता किरण जी ने पता नहीं कुछ क्या प्रयास किये हैं कि हमारे शहर काकंरोली का बस स्टेंड फिर से पुरानी जगह पर जा रहा है, बस स्टेंड किसी भी कस्बे या शहर का मेन ए॓रिया होता हैं जहां सभी व्यवस्थाओं का होना जरुरी माना जाता है |
सबसे पहले पुराना कांकरोली का बस स्टेंड था, फिर धोइन्दा के बस स्टेंड को डीपो बनाया गया जिसकी क्या दशा है ये हर कोई शहरी जान रहा है, फिर जनता की जागरुकता और शहरवासियों की लडाइयों के बीच कुछ समय बस स्टेंड को कमलतलाई के पास खाली जगह पर स्थापित किया गया था, उसके बाद इसे हमेशा के लिये जे.के मोड. स्थित तिराहे पर ले जाया गया, कम जगह के कारण यहां कुछ दुर्घटनाएं भी हुई, अब प्रशासन फिर जागा हैं | और हंसने की बात है कि लोगों ने इसे लंगोट तिराहे का नाम दे दिया है | लंगोट तिराहे या लंगोट चौराहे के इस उपनाम ने तो हमारे प्रसिद्ध शहर को दूसरे लोगों की नजर में एक मजाक सा बना दिया |
और अब लोग एक दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं कि बस स्टेंड को फिर से पुराने बस स्टेंड पर ले जाया जा रहा हैं |

अब बात ये है कि लोग शहर में बस स्टेंड की जगह को बार बार परिवर्तित क्यों करते हैं ?

पुराने बस स्टेंड के जे.के. मोड चले जाने से पुराने बस स्टेंड पर दुकानों की ग्राहकी में फर्क पड गये, प्रोपर्टी की वेल्यू कम हो गई वही जे.के मोड के वहां दुकानों मकानों के भाडे यकायक बढ़ गये |
लोग ये भी कहते है कि धोइंदा के किसी स्थानिय नेता ने अपने कार्यकाल में रहते बस डिपो को धोइंदा रखवा दिया जहा रसूखदार लोगों की जमीनें थी जमीनों के भाव बढ़े और धोइंदा जैसे गांव में कुछ सरकारौ प्रोजेक्ट आया ये बडी बात थी |
यहां शहर में पहले बस स्टेंड के परिवर्तित हो कर जे.के मोड. स्थित जगह पर जाने से जा जाने कितने आम शहरी ग्रामीण लोगों को दिक्कते आयीं | क्यों नही सत्ता के लोगों व प्रशासन के कारिन्दों मे कुछ सूझबूझ हो जिससे एक बार में ही ए॓सा निर्णय लिया जाए की जो हमेशा के लिय॓ लाघु रहे |
कुछ प्रशासनिक अधिकारीयों व स्थानिय नेताऔं के अदूरदर्शितापूर्ण कृत्यों से ही आम आदमी सालों तक परेशान होते रहे | क्या अब ये सब करने का कुछ तुक है ?

→ अब तक कोई टिप्पणीं नहींटैग्सः ····

चुनावी चर्चा

October 5th, 2013 · उलझन

लिजीये फिर से चुनाव होने वाले हैं, और विभीन्न चुनावी चर्चाओं के बाजार गर्म हैं | हर कोई अपनी अपनी चुनावी पार्टी में अपनी खुद की महत्ता को सिद्ध करने मे लगा हुआ है, की हम फलां आंदोलन के भाषण में थे, फलाना रेलीयों में हमने बढ़ चढ़ कर भाग लिये थे, और आलाकमान आप चाहे आपकी खिदमत नें पुराने फोटो और विडीयो की सीडीयां भी प्रस्तुत हैं बस अब की बार सिर्फ मुझे टिकट दिलवा दो, प्लीज प्लीज………… |

अब देखना ये है कि उपर के लोग किसके कांधे पर हाथ रखते हैं, या फिर कोई छुटभैये कैसे जोड जुगाड लगा कर अपनी बात सिद्ध करवा ही ले, सब तरफ सब तरफ भाई भतीजावाद, भ्रष्ट्राचार और रिश्वतखोरी का आलम जो हैं, पता ही नहीं चलता है कि कौनसी राजनीतीक पार्टी साफ छवी वाली हैं, फिर इन तथाकथित राजनीतीक पार्टीयों में उपर के लोग भी तो ग्राहक को देखते हैं कि कौन जिम्मेदारी उठाने के योग्य है भी नहीं कि बाद में पता चले लुटिया ही डूब गयी |

राजनीती गंदी नहीं है पर लोग इसे गंदा बनाते हैं, अच्छे लोग चाहे तो क्या कुछ नहीं हो सकता हैं हमें तो कभी याद नहीं आता कि किसी मोहल्ले का पार्षद चुनाव के बाद भी अपने मुहल्ले में जनसंपर्क करके लोगो से उनकी तकलीफे पूछता हो | अलबत्ता उसने चुनावी समय में हर किसी को हाथ जोड जोड करके अपने पक्ष में वोट करने की अपीलें की हो | ये नेता लोग अपने एरिये से जीतने के बाद ए॓से गायब होते हैं जैसे गधो के सिर से सींग |

पर अब हम किसे वोट देवेः

अब किसी ना किसी को तो वोट देना ही होगा, इसलिये सिर्फ और सिर्फ इमानदार, हर किसी की मदद करने वाले और खास तौर से साफ छवी वाले व्यक्ति को ही हमें वोट देना चाहिये |

→ अब तक कोई टिप्पणीं नहींटैग्सः ····

काकंरोली टिप्स

July 25th, 2013 · राजसमन्द जिला, हास्य

क्या आप कांकरोली शहर में आये हैं, या यहीं रहते हैं तो हम देते हैं आपको हमारे शहर के बारे में कुछ टिप्स | इस शहर में रहते हुए हमें सालों हो गये हैं पर शहर विकास की बाट जोह रहा हैं, हमारे शहर का हर हिसाब से चौतरफा विकास हो यह यहां का हर एक शख्स चाहता है | इसी बीच कुछ चुटीले व्यंग्य भी आप इन टिप्स में पायेंगे | पर ये सारी टिप्स हमें मिली यहां के लोकल एरिया और शहरी जनमानस पर सालों सालों तक अन्वेषण के बाद | शहर में पहले हुआ करती थी वे बहुत सी बाते हम दिल से मिस करते हैं, यहां के लोगों की सोच, शहर की व्यवस्था, यहां क्या करें आदि के बारे में कुछ विशेष टिप्स अग्र लिखित हैं |

तो कांकरोली पर कुछ टिप्स इस प्रकार से हैः

1

Tip 1

2

Tip 2

3

Tip 3

4

Tip 4

5

Tip 5

6

Tip 6

7

Tip 7

8

Tip 8

9

Tip 9

10

Tip 10

11

Tip 11

12

Tip 12

13

Tip 13

14

Tip 14

यह सिर्फ हमारे शहर कांकरोली की एक झलक मात्र हैं आप भी ए॓सी ही किसी बात को जानते है या फिर रोजाना ए॓सा ही कुछ देखते हैं तो हमे जरुर लिखिये, हो सकता हे हम आपकी भी टिप इसमें जोड दे |

डिस्क्लेमरः कोई बुरा ना मानें, दिल पर ना ले, ये पोस्ट सिर्फ लोगो को हमारे शहर का एक चित्रण या ट्रेलर मात्र दिखाने के लिये एक कोशिश हैं |

→ अब तक कोई टिप्पणीं नहींटैग्सः ···

एक पहेली नसीरुद्दीन शाह की कुछ फिल्मों को लेकर

July 13th, 2013 · उलझन

एक पहेली नसीरुद्दीन शाह की कुछ फिल्मों को लेकर

मुझे अभी नसीरुद्दीन शाह की बेस्ट फिल्मे देखने का बुखार चढ़ा हुआ हे, इसी कोशिश में मेनें एक बहुत जोरदार चीज को पकडा | की नसीर साहब कि कुछ फिल्मों में हर हीरोइन वीणा या सितार बजाते हुए गाने गाती है, और गाने भी ए॓से ए॓से की दिल को छू जाए | तो नसीर साहब कि एक से अधिक फिल्मों में ये अभिनेत्रीयां वीणा या सितार बजाती हैं, और जब में नसीर साहब की एक के बाद एक फिल्में देख रहा हूं तो ये सब मुझे एक पहेली के जैसा लग रहा हैं |

जैसे कीः

khli hath

khli hath

फिल्म इजाजत में रेखा गाती हें खाली हाथ शाम आई हे
badi dheere

badi dheere

फिल्म इश्किया में विध्या बालन गाती हैं बडी धीरे जली
khali pyala

khali pyala

फिल्म स्पर्श में शबाना आजमी भी एक गाना गाती हैं खाली प्याला धूंधला दर्पण
तीनो गानो के फोटो भी साथ हैं ताकि याद आ जाये | या तो ये बडा जोरदार इत्तेफाक हैं, या फिर हो सकता है कि इसके पीछे जरुर कोई खास कहानी है | या फिर इत्तेफाक से मुझे नसीरुद्दीन शाह का कोइ धुरंधर फैन कभी मिल जाये, तो वो ही बता सकता हैं कि इस पहेली के पीछे क्या खास बात है |
और एक बात गुलजार साहब के बारे में, वे भी वाकई गुलजार है, फिल्म इजाजत के “मेरा कुछ सामान” गीत में कुछ पंक्तियां लिखी हैं, पंक्तियां भी क्या खूब हैं कि दिल को छू जाती हें |

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पडा हैः 

एक दफा वो याद है तुमको, बिन बत्ती जब साईकिल का चालान हुआ था |
हमने कैसे भूखे प्यासे बेचारों सी एक्टिंग की थी,
हवलदार ने उल्टा एक अठन्नी दे कर भेज दिया था
एक चवन्नी मेरी थी, वो भिजवा दो……………………….. गुलजार

→ 1 टिप्पणींटैग्सः ······

बदला लेना क्या इंसानी प्रवृर्ति है

July 6th, 2013 · उलझन

बदला लेना क्या इंसानी प्रवृर्ति हैं

हां शायद बदला लेना इंसानी प्रवृर्ति ही तो हैं, मान लो कोई व्यक्ति आपका अहित करता हैं, आपको नीचा दिखाता हैं और आप उसे फुलों के हार पहनाओ , मुझे तो ये ठीक नहीं लगता, शायद इसलिये ही कहा गया है कि बदला लेना इंसानी प्रवृर्ति हैं, जो सब कुछ माफ कर दे वो भगवान ही हो सकता हैं और आज के दौर में भगवान बना नहीं जा सकता, अपन तो इंसान ही भले |

कहते हें कि जो लोग प्रभू यीशू के विरोधी थै और उन्हें क्रोस पर लटकाने को ले जा रहे थे उस समय भी यीशू एकदम शांत मना थे, और उन्होनें कहा था की हे इश्वर ये लोग नहीं जानते कि ये क्या करने जा रहे हैं इन्हें माफ करना | कितने सही थे वे | और ये भी कहा जाता हैं कि किसी को माफ कर दो इससे बडी कोई सजा भी नहीं हो सकती हैं | जो सोचता है कि मुझसे गलती हुई है और चाहता है कि मुझे सजा मिले पर उसे माफ करो, बडा दिल रखते हुए की चल जा बे तू मेरे लिये कुछ मायने ही नहीं रखता |

पर आज के जमाने में ये संभव नहीं है, जब छोटे थे तब स्कूल के जमाने में एक दोस्त की कापी के पहले पन्ने पर से एक छंद मेंने पढ़ा, में उसे पढ़ कर बहुत हसां था | वो दोहा या छ्दं मुझे अभी भी याद आता हेः

जो तोको कांटा बोए, वाके बोओ भाला |
वो साला क्या याद करेगा, पडा किसी से पाला ||

वाह, वाह क्या खूब लिखा था ना | दिल कि भडास निकलनी ही चाहिये नहीं तो कहीं ये कोई रोग ना पैदा कर दे | लोग कुछ गलत सलत सोचें तो हमें क्या ?

→ अब तक कोई टिप्पणीं नहींटैग्सः ···