Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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जानिये एक हाबी – पक्षी प्रेम

May 26th, 2010 · अब तक कोई टिप्पणी नहीं की गई · आपबीती

काकंरोली के एरिगेशन पाल पर मुझे घुमना बहुत पसंद है, और यहां तेज हवा में कौवे जो करतब करते हैं वो तो गजब है ! बचपन से ही यह मुझे जगह विशेष रुप से प्रिय है, यहां की सुबह, यहां की शामें, यहां रोजाना रूटिन से आने वाले छोटे, बडे व बुजुर्ग लोग सभी ! झील के किनारे होने के कारण अक्सर यहां मेहमान प्रवासी पक्षी भी आते हैं, और छिछले पानी में उनकी क्रीडाएं, मस्तीयां बहुत ही आनंदविभोर कर देती हैं !

गेट के पास एक दो उंचे पेड है, जहां वे सफेद मेहमान पक्षी अक्सर अपना डेरा डालते हैं। लम्बी चोंच व टांगो वाले ये सफेद झक पक्षी ए॓सी ए॓सी क्रीडाएं करते हैं कि बस, कोई टांगो पर खडा है , तो कोई गरदन को हिला हिला कर मछलियां पचा रहा है तो कोई अपने डैने खोल कर ए॓से बैठा है जैसे अपने पंखों को धूप में सूखा रहा है । ये सब देखना बहुत ही आनंददायक होता है मेरे लिये !

कौवे जो कि पक्षीयों में सबसे चतुर माने जाते हैं, कोई इनका शिकार हरगिज नहीं कर सकता ! बडे से बडा शिकारी भी कौए को पकड नहीं सकता ! इनकी भी हवा में अठखेलियां लाजवाब होती हैं, खास तौर से तब जब कि यहां एरिगेशन पाल पर जोर से हवा चल रही हो ! तेज हवा के झनझनाते हुए झोंके ए॓सी रफ्तार से आते हैं कि चलते हुए आदमी को भी थपेडे का सा अहसास होने लगता है !

पाल पर तेज हवा में कौए जब उडते हुए एक पल में उपर व दुसरे पल में कई फीट नीचे जाते हैं । एक एक सेकंड में पचास फीट उपर व नीचे होते है और इस दौरान एक दूसरे से वे जो लडाईयां व चुहलबाजीयां करते हैं तो बडा ही मनोहारी दृश्य बनता है । में तो कई बार रुक कर मिनटों तक ये सारी क्रियाएं देखता रहता हूं । अहा … क्या आनंद के पल होते हैं वो !

ये एक विडियो देखिये जिसमें कुछ कौए हवा में अठखेलियां व लडाई कर रहे हैं । ये विडीयो एरिगेशन पाल के कौओं का नहीं है पर लगभग ए॓सा ही वहां भी देखा जा सकता है ! क्या करूं में आलसी राम कैमरे का बोझ कौन उठाये ! इसी चक्कर में एक बार नहीं, कई कई बार अच्छी अच्छी घटनाएं व फोटो के दृश्य मेरे हाथ से निकल चुकें हैं ! खेर अब भी कुछ नहीं बिगडा हैं, जब जागो तभी सवेरा !

कौए व उनकी अठखेलियां हवा मेः

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