Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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दुखः का कारण क्या है ?

June 15th, 2011 · 1 टिप्पणी · उलझन

दुखः का कारण जहां तक मेरी नजर में है वो है चाह, अभिलाषा, तृष्णा या फिर सरल शब्दों में कहें तो हमारी इच्छा | संसार सागर के समान बडा है और अनवरत जीवन हमारा चलता ही जाता है, रुकने का नाम नहीं, कभी सोचता हूं बहुत से जानवर और अन्य प्राणी सुखी हैं, क्योंकि उन्हे लम्बी उम्र नहीं मिलती ! छोटी या कम उम्र में ही उन्हें जीवन के सारे रंगों को देखने का मौका मिल जाता हैं |

कोई विरले लोग ही इन बातों से दूर रह पाते हैं, और हम तो आम इंसान हैं कोई साधू महात्मा नहीं | हम अपने आस पास देखें तो ये भी संभव नहीं है कि अपनी इच्छाऔं का दमन कर पायें ! इच्छाएं और ज्यादा बलवान हुई जाती हैं, क्योंकि पडौसी के पास वो है जो मेरे पास नहीं और यही हमारे दुख का कारण भी बनता है |

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दूसरा यह कि हम कभी कभी अपने हिसाब से जमाने को चलाना चाहते हैं, और वैसा किसी भी हालत में संभव नहीं हैं, चंद पैसे देकर हम किसी को नौकर रख सकते हैं पर उसको मानसिक तौर पर गुलाम नहीं बनाया जा सकता है | दुनिया में हर किसी के विचार अलग हैं ‌और अपने आस पास के लोगों पर हम अपनी कोई बात या विचार थोपना चाहते हैं क्योकि हम उनसे उम्र या अनुभव में बडे हैं पर यह काफी नहीं, हर नया बच्चा नई सोच लेकर पैदा होता हैं | अपने विचार या इच्छाऔं को हम दूसरों पर थोपना चाहते हैं बडा बनना चाहते हैं, चाहते है कि लोग हमें मानें और यह भी बहुत बडा कारण बनता है दुख का |

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