Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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द्धारिकाधीश प्रभु का जयघोष

September 17th, 2011 · अब तक कोई टिप्पणी नहीं की गई · कांकरोली

shree dwarikadheesh ji prabhu

shree dwarikadheesh ji prabhu

वैसे तो कांकरोली राजसमन्द के द्धारिकाधीश प्रभु का मंदिर मेवाड के चार धामों मे से एक है और बहुत प्रसिद्ध भी है | द्धारिकाधीश प्रभु के मंदिर को गिरधरगढ़ भी कहा जाता हैं | राजसमंद झील के किनारे बना ये विशाल मंदिर कई पर्यटकों को आकर्षित करता हैं, पुष्टिमार्ग की तृतीयपीठ होने से यह मंदि अपने आप में काफी समृद्ध भी है औेर वैभवशाली भी |

पुष्टिमार्ग में श्रीकृ्ष्ण का, उनकी लीलाओं का बहुत महत्व है | यहां मंदिर की हर बात निराली है, यहां के कीर्तनकार, मंदिर की बनाचट, निर्माणशैली, यहां मंदिर का ताजा स्वादिष्ट प्रसाद और मंदिर के मुखियाजी और यहां के युवराज वाघीशकुमार जी आदि | कभी कोई काकंरोली आये और द्धारिकाधीश प्रभु के मंदिर में दर्शन ना करे तो समझो की उसका यहां आना व्यर्थ ही है | इतने अलौकिक प्रभु है और यहां मंदिर में दर्शन भी ए॓से गजब के होते हैं कि बस, विभिन्न प्रकार के श्रंगार रोजाना हर दर्शन के दौरान प्रभू को धराये जाते हैं |

यह जयघोष संबंधित है गिरिराज पर्वत की परिक्रमा से और इसलिये ही इसमें श्री गिर्राज धरण की जय का भी नाम आता हैं | कहा गया है कि गिरिराज पर्वत की परिक्रमा के दौरान शुरु में पूंछडी और समाप्ति के लगभग पास लोठा नाम के ये दो स्थान आते हैं | कहने का अभिप्राययह है कि शुरु से अंत तक बन्दे तू प्रभू का नाम लिये जा और श्री गिर्राज धरण की जय बोले जा |

यहां के मंदिर में लगभग हर काम के आगे पीछे यहां के भक्तों द्धारा प्रभु द्धारिकाधीश का जयघोष या जयकारा लगाया जाता हैं यह वाकई में बडा ही विस्मयकारी और आश्चर्यजनक हैं | कई लोग तो इसे समझ भी नहीं पाते हैं पर सुनने मात्र से ही बडा आनंद मिलता हैं |

पुराने लोग कहते हैं की श्री द्धारिकाधीश की जय… यह बोल ना पाओ और खाली ध्यान लगा कर सुन भी लो तो समझो की उपर स्वर्ग में अपनी सीट पक्की हैं | यह जयकारा इस प्रकार से हैः

जय बोलो श्री द्धारिकाधीश की जय, बोल श्री राधे |
पूंछडी के लोठा की हूक बोल मेरे प्यारे, श्री गिर्राज धरण की जय ||

प्रभु द्धारिकाधीश का जयघोष थोडा राग में और अलग ही शैली में बोला जाता है कि बस समां बंध जाता हैं | सभी प्रभु भक्त बाव विभोर हो जाते हैं और इस जयघोष के तुरंत बाद ………” आज के आनंद की जय ” का जयकारा भी लगाते हैं | यह आनंद अलौकिक है | तो एक बार आप सब भी बोलोः

द्धारिकाधीश प्रभु का जयघोषः

जय बोलो श्री …………………..
द्धारिका………धीश की जय……..
बोल श्री राधे……………………..
पूंछडी के लोटा की हूक बोल मेरे प्यारे………………
श्री गिर्राज धरण की जय………………………………

आज के …………आनंद की जय…………………….

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