Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

Rajsamand District, Rajasthan header image 3

पाठकों के विचार

पिछले चार पांच सालों से यह “राजसमन्द जिले की हिन्दी वेबसाइट” अनवरत हमेशा कुछ ना कुछ नयेपन के लिये जानी जाती है ! अब तक यहां 157 लेख लिखे जा चुके हैं, व 251 पाठकों नें अपने विचारों को टिप्पडीयों के माध्यम से प्रषित किया है । पाठकों के विचार बहुत बडा माध्यम होते हैं जिनसे ही किसी लेखक कौ कार्यक्षमता में विकास होता है । तो पेश है अब तक पाठकों के इस साईट के बारे में विचार कुछ खास टिप्पडीयों के द्वारा !

पाठकों के विचारः

यह एक बहुत ही खास वेबसाइट है ! ए॓सी वेबसाइट बनाने के लिये धन्यवाद ! इस वेबसाइट में हर गांव की जानकारी भी हो तो ये सभी के लिये बहुत खास हो सकती है आपने बहुत ही अव्छी मेहनत की है ! में यह चाहता हूं कि में भी कुछ एसा काम करूं ! इसमें राजसमनंद के सभी गांव व कस्बों की जानकारी फोटौ सहित हो तो और भी अच्छा रहेगा ! साथ ही स्टुडेन्ट, कालेज व नौकरी आदि से संबन्धित जानकारी भी दें तो काफी सुविधा होगी ! इस वेबसाइट को राजसमन्द के लोगों की जरुरत बना दो ! धन्यवाद
भरत बागोरा “सुन्दरचा”

सर, मेनें राजसमन्द जिले पर एक मेवाडी भाषा में कविता “कविता क्या उसका बाप” लिखी है, अगर आप चाहें तो में आपकी इस बढ़िया सी साईट पर अपनी टिप्पडी के माध्यम से भेज सकता हुं ! धन्यवाद
कवि सुनिल जी “सुनिल”
कांकरोली

में यह समझता हूं कि आपको सरकार के मेवाड काम्प्लेक्स के प्लान के बारें मे जानकारी नहीं है ! सरकार की घोर अपेक्षा का उदाहरण है यहां का म्यूजियम आखिर कैसे कोई गरिब आदमी लाईट और साउंड का शो देखने के लिये बीस रुपये खर्च कर सकता है ! धन्यवाद
कमल पालीवाल
खमनोर, हल्दीघाटी

हेलो, आप से एक छोटी सी जानकारी लेना है अगर आप मेरी मदद करें तो बहुत अच्छा होगा ! राजसमन्द में बोहरा समाज के बारे में कुछ जानकारी आप देवें, बहुत मेहरबानी होगी ! धन्यवाद
जोयेब शिकारी

जय श्री कृष्ण,
कृपया कुछ फोटो साईट पर डालिये ना ! ‍
१. द्वारिकाधीश जी के विभिन्न दर्शनों के
२. द्वारिकाधीशमंदिर के फोटो
३. साईट सीन के फोटो
दिनेश वर्मा

कुछ रोज पहले राजसमन्द जाना हुआ था ! अभी तक इस जिले का विकास नहीं हुआ ! इतनी सुंदर जगह का विकास न होने से में व्यथित हुआ !
लोकेश वर्मा

आपकी साईट बहुत बढिया लगी मेरा जनम यही हुआ, मेरी बचपन की यादे यही की है ! में मेरे दोस्तो को जिनमें अमित , हेप्पी, अभिषेक, निधी थे सबको अभी भी याद करता हुं मेरे पिता जे.के. इन्डस्ट्रीज कांकरोली में कार्यरत थे ! राजसमन्द झील मेरे जीवन का एक हिस्सा है । में जे.के. कोलोनी के बारे में भी और जानना चाहता हूं !
राकेश राठी

हेलो ! आपका यह कार्य इस शहर के बारे मे बहुत सराहनीय है, हमें आपके टाईप के लोगों की जरुरत है । मेनें अभी अभी इस साइट को देखा, बहुत अच्छा कार्य है आपका, मेरी ओर से शुभकामनाएं ।
बी. एल. पालीवाल
MCA Msc (cs).
जल चक्की, कांकरोली

हल्दीघाटी का इतिहास जानकार बहुत खुशी और रोमांच का अनुभव हुआ !
कायम सिहं राठौड

में इस साल गंगापुर, भीलवाडा से पद यात्रा पर अवश्य आउंगा, पिछले साल में कार लेकर आया था इस बार में यहां पैदल आना चाहुंगा ! जय चारभुजानाथ !
लखन लोहिया

आपका यह प्रयास सराहनीय है, आपको इसके लिये बधाई । यदि समय दे सकें तो इसे रोज नए नए लेखों से अपडेट करते रहिये ! आपका शुभचिंतक
परितोष पालीवाल

मुझे अपने कस्बे को आनलाईन डाट काम के रुप में देखकर बहुत खुशी हुई ! सराहनीय कार्य है आपका ! गणगोर, स्कूलों के त्योहार आदि के बारें में भी कुछ लिखें, घुमने लायक जगह जेसे दयालशाह किले का सुर्यास्त आदि पर भी प्रकाश डालें । नौकरी व केरियर के बारे में भी जानकारी दें ! आप लोकल केबल टी.वी. पर अपने साइट की मार्केटिंग करवायें जिससे लोग और ज्यादा से ज्यादा संख्या में आपकी साईट से जुड सकें ! और अपने टेलेन्ट का फायदा उठा सकें ! काफी लोग स्कूलों व त्योहारों पर भी प्रस्तुतियां देते हैं, उनको भी लाभ होगा ! धन्यवाद
मनीष शर्मा

प्यारे बन्धु
में यह पेज देख कर प्रसन्न हुआ ! इस साईट से हमारे जिले को जरुर कोई न कोई लाभ मिलेगा ! खास तौर से आपके दार्शनिक विचारों से भरा स्वयं का परिचय वाला पेज मेरे दिल को छू गया ! बहुत आकर्षित हुआ पढ़ कर में ! धन्यवाद !
डा. एच. एस. चोहान

हेलो,
बहुत समय से आप कुछ लिख नहीं रहे हो ! में ये साईट हमेशा देखता हुं ! आप इस वेबसाईट के माध्यम से यह छोटे से कस्बे राजसमन्द के लिये बहुत ही उम्दा प्रयास कर रहे हों ! उपयोगी साईटों के लिंक, विश्च प्रसिद्ध होटल्स जो कि यहां है में उनके बारे में नहीं जानता था, जो आपको पहले से मालूम थे ! आपको यहां एक फोटो गेलेरी भी लगानी चाहिये ! आसपास के अच्छे फोटो डाले, इससे और भी लेखकों का इस साईट के प्रति जानकारी होगी ! साथ ही आपका लिखा हार्न प्लीज व दूरदर्शन के एडवर्टाइजमेन्ट व पुराने सीरीयल के बारे में पढ़कर अच्छा लगा ! भारत एक खोज मेरा पसंदीदा प्रोग्राम था ! में जब भी अपने दोस्तों से मिलता हूं तो यहां राजसमन्द के बारे में बताता हूं ! यहां का शांत माहौल, घुमने की जगहें सब गजब की है, ये सब कुछ दुनियां में कहीं और नही मिल सकता जो कि राजसमन्द में है ! सबसे खास है यहां के लोग जो कि बहुत खुशमिजाज है व अपनी ही मस्ती में रहते हैं । जैसे की “लाल” जो कि पान या फिर भांग की दुकान के सामने अक्सर टाइमपाद करते मिल जाते हैं ! आप उनके बारे में भी कुछ जानिए और लिखिये कुछ ! अच्छी बारिश में कु्भलगढ़ और बाघेरी के नाके पर जाने पर भी बहुत अच्छा लगता है । आपने बहुत ही अच्छा कार्य किया है , लिखते रहिये !
नरेश राजावत

राजसमन्द जिले के बारे में काफी कुछ जानकारी आपने दी है। धन्यवाद। चारभुजा गढबोर के बारे में और जानकारी प्रदान करने की कृपा करावे।
राजेंद्र माहेश्वरी

यह आपका अच्छा प्रयास है ! इसके माध्यम से हम इतना दूर रहते हुए भी अपने जगह से जुडे हैं ! बहुत अच्छा कार्य किया है आपने ! अगर कुछ और यहां डाल सकें तो यहां के मुख्य बाजार, सव्जी मंडी, मंदिर की गली आदि के विडियो डालें ! एक बार फिर धन्यवाद !
जीतू

हेलों, केसे हैं आप ! राजसमन्द के बारे में छोटी छोटी जो बातें आपने लिखी हैं वे आश्चर्यजनक है ! दूरदर्शन के पुराने सीरीयल व हार्न प्लीज के बारे मे पढ़ना मेरे लिये बहुत ही अच्छा अनुभव रहा ! आप यहां की पढ़ाई की व्यवस्था के बारे में भी कछ लिखें ! बहुत ही कठोर परिश्रम आपने किया है आपने साईट के द्वारा ! हमारी ओर से शुभकामनाएं !
अरोडा एम. एस.

आपने राजसमंद की वेबसाइट हिन्दी मे बनाकर बड़ा अच्छा कार्य किया है. इसके लिए आपको बधाई. आप प्रातःकाल की वेबसाइट भी अवलोकन करें !
ऋतु राज – प्रातःकाल

में यह वेबसाइट देखकर और पढ़कर बहुत प्रसन्न हुआ ! कृपया यहां के होशियार छात्रो व महान लोगों के बारे में भी कुछ लिखें ताकि हर कोई उनके बारे में जान पाए !
संजय पालीवाल

मुझे आपके साइट को देखने का मौका पडा ! मेरे साथ यहां की बहुत सी छोटी बडी यादें जुडी हैं ! में राजसमंद आने पर आपसे मिलना चाहता हुं ! आप अपने बारे में भी कुछ लिखिये ना ! उम्मीद है यह फरमाइश जरुर पुरी होगी !
शिव चरण

में खुद इस बहुत ही खुबसुरत जगह राजसमन्द का एक बाशिन्दा हूं ! मुझे बडी खुशी हुई की हमारा राजसमन्द भी अब इन्टरनेट पर आपकी साईट के माध्यम से दुनिया में लोकप्रिय हो रहा है ! में राजसमन्द के सभी नागरिकों की तरफ से आपको साधुवाद देता हुं जो इस शानदार साईट के निर्माण मे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुडे हुए हैं । धन्यवाद !
विवेक धुत

प्रिय भाई, आपकी तत्परता और उदारता के प्रति नतशिर हूं.
दर असल मैंने यह टिप्पणी अपनी एक आम शिकायत के क्रम में ही की थी. हम सर्वत्र यह देखते हैं कि साहित्य को उतना महत्व नहीं दिया जाता, जितने का वह अधिकारी है. मैं यह क़तई नहीं कहता कि साहित्य को आप गैर ज़रूरी महत्व दें, लेकिन कृपया उसे एकदम अनदेखा भी न करें. जैसे इलाहाबादा का महत्व नेहरु के कारण ही नहीं, पंत, महादेवी, निराला के कारण भी है, वैसे ही, कम से कम मेरे जैसों के लिए तो राजसमन्द की कोई तस्वीर क़मर मेवाडी के बगैर पूरी नहीं होती. आपने मेरे सुझाव पर अमल किया, आभारी हूं. आशा करूंगा कि आप भविष्य में भी अपनेब्लॉग पर राजसमन्द के साहित्य को भी समुचित स्थान देते रहेंगे.
डां दुर्गा प्रसाद अग्रवाल

कांकरोली का द्वारिकाधीश मंदिर बहुत ही आनंद दायक और भक्तीमय है यहां के दर्शन प्रोग्राम जेसे दीवाली, होली, जनमाष्टमी आदि बहुत ही अच्छे लगते हैं
भरत पालीवाल

आप बहुत अच्छे हैं ! यह साईट एक सुनहरा मौका है जिससे हम राजसमन्द जिले के बारे में सब कुछ जान सकते हैं ।
चन्द्र भान

हेलो दोस्तों,
आपका वेबपेज देखा ! मुझे बहुत ही अच्छा लगा राजसमन्द जिले के बारे में यहां कुछ पढ़ कर क्यों कि में खुद यहां के एक छोटे से गांव मुण्डोल का रहने वाला हूं ! मेरा नाम सोमेश है और में डेल कोर्पोरेशन, गुडगांव में सिस्टम एडमिस्टेटर के पद पर कार्य करता हूं ! में आपकी पुरी टीम को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं !
सोमेश

भाई साहब प्रणाम,
आज चिठ्ठाकार में राजसमन्द का नाम पढ़ते ही इतनी प्रसन्नता हुई कि पूछिये मत:) लेख भी नहीं पढ़ा और आपको पहले टिप्पनणी कर रहा हूँ। दरअसल मैं भी आप ही के जिले राजसमन्द के कस्बे देवगढ़ से हूँ, अभी सिकन्दराबाद में हूँ। आशा है अब आपके द्वारा मेरे प्रिय गाँव की जानकारी मिल जाया करेगी।
सागर चन्द नाहर

आपका यह प्रयास सरहानिय है और आप बधाई के पात्र है। कोशिश कीजिये की राजसमन्द के साथ-साथ पूरे राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर को अंतरजाल पर लाया जा सके, इस संबंध में यदि मुझ से किसी भी प्रकार की सहायता चाहिये तो मुझे सूचित कीजियेगा।
गिरिराज जोशी “कविराज”

अच्छा प्रयास है ! कृपया साइट प्रर और भी मजेदार फोटो अपलोड कीजिये :)
हिमांशु

हेलों में ब्रजेश शर्मा हूं ! व एन आई सी कार्यालय जिला पाली में कार्यरत हूं ! में अपने मित्रों के साथ बारिश के मौसम में गौरम घाट घुमने गया था ! मुझे यह स्थल बहुत ही खुबसुरत लगा ! वहां बहुत आनन्द का अनुभव हुआ जिसकी यादें मेरे जेहन में अभी तक बसी हैं ।
ब्रजेश शर्मा, पाली

25 टिप्पणीयां

25 टिप्पणीयां ↓

  • prakash

    namste ,
    mere gaw ki smasaya me apko batana chahta hu
    aap mere samshya ko aage dhyan de me apko meri bate batta rahuga……….

  • kishan gadri emdi

    rajsmand district vikas ke mamle me kafe pecheda huae ha iseke vikas ke bare me yaha ke janpartinide ko dayan dena cahiya

  • सत्यम जायसवाल

    मैँ सत्यम जायसवाल देवरिया जिला यू पी का हूँ मै आपका हिन्दी वेबसाइट राज समन्द हमेशा देखता हुँ मुझे इससे बहुत कुछ सिख मिली है हमारी ओर से आपको शुभ काँमनाए लिखते रहिए

  • Anjaan

    सत्यम जी, आपने अपने विचारों से हमें अवगत कराया, बहुत बहुत धन्यवाद !

  • Ramesh kumar Bagora

    Hum Videsho me,Apne Watan ke Nazadik rahte he,es Koshish ka dhanyawad,
    Ramesh u.Bagora (Sundercha)
    Dubai (UAE)

  • kamlesh paliwal (kankroli)

    hello and namste
    bahut accha laga apki hindi bebsite ko dekhkar.
    ap ese time mile to daily update kare

    ap rajsamand ki history se related litrature bhi upload kare to hame bahut si nai jankariya milegi

    kuch bhi kaho but NICE

  • Naresh

    Hi Bhiya,

    Its a long time to make a scrap on your blog site.So How’s life in kankroli……in rainy season.Rajsamand becomes like a heaven when it rains.The lake is awesome and the Irrigation garden which is my favourite place to visit when its raining and you run just parrallel to the lake and when you feel the air flowing in your nostrils.I am always eager to visit my hometown anytime specially during the rainy season.I’ll catch you soon.

  • Anjaan

    जरुर भाई ! बारिश के मौसम में तो राजसमन्द जन्नत जैसा ही होता है लगभग

  • harisinghRathore

    rajsmand jila ke bare mai aap duvra batai gai jankari shrahniye hai aane wali pid ke liye upiyogi hogi

    thank u
    UDC
    treasury office Rajsamand

  • dharmendra ameta

    thank u sir
    aaj ke jamane mai itna karne kam karne wale log kam hi melate hai aap ne jo kam kiya hai wo humre or is jile ke liye khusi hai ki aap jo kam kar rha hai us mari jarurat hogi to mai man se aap ka shyoge duga

  • Anjaan

    आपका आभार व्यक्त करता हूं ! आते रहियेगा इस वेबसाइट पर |

  • rhiniagaw

    बहुत समान है.

  • rahul sen

    sabse pahle to sir me aapko thanks kah na chahunga ke aapne rajsamand ki sari bate user ke hisab se batayi taki sab achi tarh se read kar sake.
    isliye me aapko 1 baat or batana chahta hu ke aap jo bhi kar rahe h aap karte raheye ok.

    lekin 1 baat jo me ab aapko bolne wala hu plz abhi kese kese ke sath share mat karna plz.

    vese sir baat khuch ese h ke aaj ke 2saal baad rajasamand ki tasvir badlne wali h vaha ki jo bhi problems h ab bas un sab se chutkara mine wala h .agar krishn nw chaha or aap jese dost ka sath raha to kasm h muje us peda karne wale ki agar rajasamand ko us jagah pahcha dunga jaha kise or diss. ki pahuch nhi hogi ok /to dost mere taraf se lagatar proccesing chalu h or bas aap is tarah or problems bata te rahna taki vo mere liye 1apporchunite ban seke plz.jai shree krishn.

  • Rajesh kumar joshi

    इतिहास में पन्ना धाय
    मैं शायद तब सोया हुआ था
    जब तुम मुझे अपनी बांहों में उठा कर
    राजकुमार की शय्या तक ले गई मां,
    हो सकता है, नींद के बीच यह विचलन
    इस आश्वस्ति में फिर से नींद का हिस्सा हो गया हो
    कि मैं अपनी मां की गोद में हूं
    लेकिन क्या उस क्षणांश से भी छोटी, लेकिन बेहद गहरी यातना में
    जिसमें हैरत और तकलीफ दोनों शामिल रही होगी,
    क्या मेरा बदन छटपटाया होगा,
    क्या मेरी खुली आंखों ने हमेशा के लिए बंद होने के पहले
    तब तुम्हें खोजा होगा मां
    जब बनवीर ने मुझे उदय सिंह समझ कर अपनी तलवार का शिकार बना डाला?
    पन्ना धाय,
    ठीक है कि तब तुम एक साम्राज्य की रक्षा में जुटी थी,
    अपने नमक का फर्ज और कर्ज अदा कर रही थी
    तुमने ठीक ही समझा कि एक राजकुमार के आगे
    तुम्हारे साधारण से बेटे की जान की कोई कीमत नहीं है
    मुझे तुमसे कोई शिकायत भी नहीं है मां
    लेकिन पांच सौ साल की दूरी से भी यह सवाल मुझे मथता है
    कि आखिर फैसले की उस घड़ी में तुमने
    क्या सोच कर अपने बेटे की जगह राजकुमार को बचाने का फैसला किया?
    यह तय है कि तुम्हारे भीतर इतिहास बनने या बनाने की महत्त्वाकांक्षा नहीं रही होगी
    यह भी स्पष्ट है कि तुम्हें राजनीति के दांव पेचों का पहले से पता होता
    तो शायद तुम कुछ पहले राजकुमार को बचाने का कुछ इंतज़ाम कर पाती
    और शायद मुझे शहीद होना नहीं पड़ता।
    लेकिन क्या यह संशय बिल्कुल निरर्थक है मां
    कि उदय सिंह तुम्हें मुझसे ज़्यादा प्यारे रहे होंगे?
    वरना जिस चित्तौ़ड़गढ़ का अतीत, वर्तमान और भविष्य तय करते
    तलवारों की गूंज के बीच तुम्हारी भूमिका सिर्फ इतनी थी
    कि एक राजकुमार की ज़रूरतें तुम समय पर पूरी कर दो,
    वहां तुमने अपने बेटे को दांव पर क्यों लगाया?
    या यह पहले भी होता रहा होगा मां,
    जब तुमने मेरा समय, मेरा दूध, मेरा अधिकार छीन कर
    बार-बार उदय सिंह को दिया होगा
    और धीरे-धीरे तुम उदय सिंह की मां हो गई होगी?
    कहीं न कहीं इस उम्मीद और आश्वस्ति से लैस
    कि राजवंश तुम्हें इसके लिए पुरस्कृत करेगा?

    और पन्ना धाय, वाकई इतिहास ने तुम्हें पुरस्कृत किया,
    तुम्हारे कीर्तिलेख तुम्हारे त्याग का उल्लेख करते अघाते नहीं
    जबकि उस मासूम बच्चे का ज़िक्र
    कहीं नहीं मिलता
    जिसे उससे पूछा बिना राजकुमार की वेदी पर सुला दिया गया।

    हो सकता है, मेरी शिकायत से ओछेपन की बू आती हो मां
    आखिर अपनी ममता को मार कर एक साम्राज्य की रक्षा के तुम्हारे फैसले पर
    इतिहास अब भी ताली बजाता है
    और तुम्हें देश और साम्राज्य के प्रति वफा़दारी की मिसाल की तरह पेश किया जाता है
    अगर उस एक लम्हे में तुम कमज़ोर पड़ गई होती
    तो क्या उदय सिंह बचते, क्या राणा प्रताप होते
    और
    क्या चित्तौड़ का वह गौरवशाली इतिहास होता जिसका एक हिस्सा तुम भी हो?

    लेकिन यह सब नहीं होता तो क्या होता मां?
    हो सकता है चित्तौड़ के इतिहास ने कोई और दिशा ली होती?
    हो सकता है, वर्षों बाद कोई और बनवीर को मारता
    और
    इतिहास को अपने ढंग से आकार देता?
    हो सकता है, तब जो होता, वह ज्यादा गौरवपूर्ण होता
    और नया भी,
    इस लिहाज से कहीं ज्यादा मानवीय
    कि उसमें एक मासूम बेख़बर बच्चे का खून शामिल नहीं होता?
    इतिहास का चक्का बहुत बड़ा होता है मां
    हम सब इस भ्रम में जीते हैं
    कि उसे अपने ढंग से मोड़ रहे हैं
    लेकिन असल में वह हमें अपने ढंग से मोड़ रहा होता है
    वरना पांच सौ साल पुराना सामंती वफ़ादारी का चलन
    पांच हजार साल पुरानी उस मनुष्यता पर भारी नहीं पड़ता
    जिसमें एक बच्चा अपनी मां की गोद को दुनिया की सबसे सुरक्षित
    जगह समझता है
    और बिस्तर बदले जाने पर भी सोया रहता है।

    दरअसल इतिहास ने मुझे मारने से पहले तुम्हें मार डाला मां
    मैं जानता हूं जो तलवार मेरे कोमल शरीर में बेरोकटोक धंसती चली गई,
    उसने पहले तुम्हारा सीना चीर दिया होगा
    और मेरी तरह तुम्हारी भी चीख हलक में अटक कर रह गई होगी
    यानी हम दोनों मारे गए,
    बच गया बस उदय सिंह, नए नगर बसाने के लिए, नया इतिहास बनाने के लिए
    बच गई बस पन्ना धाय इतिहास की मूर्ति बनने के लिए।

    गुजरात के बादशाह बहादुर शाह ने जनवरी १५३५ में चित्तोड़ पहुंचकर दुर्ग को घेर लिया इससे पहले हमले की ख़बर सुनकर चित्तोड़ की राजमाता कर्मवती ने अपने सभी राजपूत सामंतों को संदेश भिजवा दिया कि- यह तुम्हारी मातृभूमि है इसे मै तुम्हे सौपती हूँ चाहो तो इसे रखो या दुश्मन को सौप दो | इस संदेश से पुरे मेवाड़ में सनसनी फ़ैल गई और सभी राजपूत सामंत मेवाड़ की रक्षार्थ चित्तोड़ दुर्ग में जमा हो गए | रावत बाघ सिंह ने किले की रक्षात्मक मोर्चेबंदी करते हुए स्वयम प्रथम द्वार पर पाडल पोल पर युद्ध के लिए तैनात हुए | मार्च १५३५ में बहादुरशाह के पुर्तगाली तोपचियों ने अंधाधुन गोले दाग कर किले की दीवारों को काफी नुकसान पहुचाया तथा किले निचे सुरंग बना उसमे विस्फोट कर किले की दीवारे उड़ा दी राजपूत सैनिक अपने शोर्यपूर्ण युद्ध के बावजूद तोपखाने के आगे टिक नही पाए और ऐसी स्थिति में जौहर और शाका का निर्णय लिया गया | राजमाता कर्मवती के नेतृत्व में १३००० वीरांगनाओं ने विजय स्तम्भ के सामने लकड़ी के अभाव बारूद के ढेर पर बैठ कर जौहर व्रत का अनुष्ठान किया | जौहर व्रत संपन्न होने के बाद उसकी प्रज्वलित लपटों की छाया में राजपूतों ने केसरिया वस्त्र धारण कर शाका किया किले के द्वार खोल वे शत्रु सेना पर टूट पड़े इस युद्ध में इतना भयंकर रक्तपात हुआ की रक्त नाला बरसाती नाले की भांति बहने लगा | योद्धाओं की लाशों को पाटकर बहादुर शाह किले में पहुँचा और भयंकर मारकाट और लूटपाट मचाई | चित्तोड़ विजय के बाद बहादुर शाह हुमायूँ से लड़ने रवाना हुआ और मंदसोर के पास मुग़ल सेना से हुए युद्ध में हार गया जिसकी ख़बर मिलते ही ७००० राजपूत सैनिकों ने आक्रमण कर पुनः चित्तोड़ दुर्ग पर कब्जा कर विक्रमादित्य को पुनः गद्दी पर बैठा दिया |

    लेकिन चितौड़ लौटने पर विक्रमादित्य ने देखा कि नगर नष्ट हो चूका है और इस विनाशकारी युद्ध के बाद उतना ही विनाशकारी झगड़ा राजपरिवार के बचे सदस्यों के बीच चल रहा है | चितौड़ का असली उत्तराधिकारी , विक्रमादित्य का अनुज उदय सिंह , मात्र छ: वर्ष का था | एक दासी पुत्र बनबीर ने रीजेंट के अधिकार हथिया लिए थे और उसकी नियत और लक्ष्य चितौड़ की राजगद्दी हासिल करना था | उसने विक्रमादित्य की हत्या कर , लक्ष्य के एक मात्र अवरोध चितौड़ के वंशानुगत उत्तराधिकारी बालक उदय की और ध्यान दिया | पन्ना धाय राणा साँगा के पुत्र राणा उदयसिंह की धाय माँ थीं। पन्ना धाय किसी राजपरिवार की सदस्य नहीं थीं। अपना सर्वस्व स्वामी को अर्पण करने वाली वीरांगना पन्ना धाय का जन्म कमेरी गावँ में हुआ था। राणा साँगा के पुत्र उदयसिंह को माँ के स्थान पर दूध पिलाने के कारण पन्ना ‘धाय माँ’ कहलाई थी। पन्ना का पुत्र चन्दन और राजकुमार उदयसिंह साथ-साथ बड़े हुए थे। उदयसिंह को पन्ना ने अपने पुत्र के समान पाला था। पन्नाधाय ने उदयसिंह की माँ कर्मावती के सामूहिक आत्म बलिदान द्वारा स्वर्गारोहण पर बालक की परवरिश करने का दायित्व संभाला था। पन्ना ने पूरी लगन से बालक की परवरिश और सुरक्षा की। बालक उदय की धात्री माँ पन्ना ने , उसकी माँ राजमाता कर्मावती के जौहर (सामूहिक आत्म बलिदान ) द्वारा स्वर्गारोहण पर पालन -पोषण का दायित्व संभाला था तथा स्वामी भक्तिव अनुकरणीय लगन से उसकी सुरक्षा की | उसका आवास चितौड़ स्थित कुम्भा महल में एक और ऊपर के भाग में था | चित्तौड़ का शासक, दासी का पुत्र बनवीर बनना चाहता था। उसने राणा के वंशजों को एक-एक कर मार डाला। बनवीर एक रात महाराजा विक्रमादित्य की हत्या करके उदयसिंह को मारने के लिए उसके महल की ओर चल पड़ा। एक विश्वस्त सेवक द्वारा पन्ना धाय को इसकी पूर्व सूचना मिल गई। पन्ना राजवंश और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग थी व उदयसिंह को बचाना चाहती थी। उसने उदयसिंह को एक बांस की टोकरी में सुलाकर उसे झूठी पत्तलों से ढककर एक विश्वास पात्र सेवक के साथ महल से बाहर भेज दिया। बनवीर को धोखा देने के उद्देश्य से अपने पुत्र को उदयसिंह के पलंग पर सुला दिया। बनवीर रक्तरंजित तलवार लिए उदयसिंह के कक्ष में आया और उसके बारे में पूछा। पन्ना ने उदयसिंह के पलंग की ओर संकेत किया जिस पर उसका पुत्र सोया था। बनवीर ने पन्ना के पुत्र को उदयसिंह समझकर मार डाला। पन्ना अपनी आँखों के सामने अपने पुत्र के वध को अविचलित रूप से देखती रही। बनवीर को पता न लगे इसलिए वह आंसू भी नहीं बहा पाई। बनवीर के जाने के बाद अपने मृत पुत्र की लाश को चूमकर राजकुमार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए निकल पड़ी। स्वामिभक्त वीरांगना पन्ना धन्य हैं! जिसने अपने कर्तव्य-पूर्ति में अपनी आँखों के तारे पुत्र का बलिदान देकर मेवाड़ राजवंश को बचाया।

    पन्ना कई सप्ताह देश में शरण के लिए भटकती रही पर दुष्ट बनबीर के खतरे के चलते कई राजकुलों ने जिन्हें पन्ना को आश्रय देना चाहिए था नहीं दिया | वह देशभर में राजद्रोहियों से बचती , कतराती तथा स्वामिभक्त प्रतीत होने वाले प्रजाजनों के सामने अपने को जाहिर करती भटकती रही | आखिर उसे शरण मिली कुम्भलगढ़ में , जहाँ यह जाने बिना कि उसकी भवितव्यता क्या है | उदय सिंह किलेदार का भांजा बनकर बड़ा हुआ | तेरह वर्ष का होते होते मेवाड़ी उमरावों ने उसे अपना राजा स्वीकार कर लिया और उनका राज्याभिषेक कर दिया इस तरह १५४२ में उदय सिंह मेवाड के वैधानिक महाराणा बन गए |
    स्वामिभक्ति तथा त्वरित प्रत्युत्पन्नमति , दोनों के लिए श्रधेया नि:स्वार्थी पन्ना धाय जिसने अपने स्वामी की प्राण रक्षा के लिए अपने पुत्र का बलिदान दे दिया को उसी दिन से सिसोदिया कुल वीरांगना वीरांगना के रूप में सम्मान मिल रहा है | इतिहास में पन्ना धाय का नाम स्वामिभक्ति के शिरमोरों में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया है | अपने स्वामी की प्राण रक्षा के लिए इस तरह का बलिदान इतिहास में पढने को और कहीं नहीं मिलता |
    नमन है भारतभूमि की ऐसी स्वामिभक्त वीरांगना को |

    इतिहास हमेशा उन्हीं का स्तुति गान करता है जो सत्ता के साथ होते हैं जो उपेक्षित रह जाते हैं उनके लिए इतिहास के पास कोई शब्द नहीं होते। चाहे वह पन्ना का पुत्र हो या लक्ष्मण का 14 साल तक इंतजार करती उर्मिला।

  • madhav nagda

    आपकी सक्रियता का कायल हूं| आनन-फानन में मेरे बारे में जानकारी जुटाकर उसे सम्मानजनक ढंग से अपनी वेबसाइट में सम्मिलित करने के लिये आभार| क़मर मेवाड़ी जी का परिचय देखकर भी अतीव प्रसन्नता हुई|

  • rajhindiadmin

    बहुत धन्यवाद माधव जी, आप भी हमारी वेबसाईट पर पधारे और मार्गदर्शन दिया उसके लिये |

  • MAHESH BAGARWAL

    bijali dhare badhee am adhami ki paresani badhee

    akhir kitna adjust kare sadharan adhmi ???

    Please give information on building Rajsamand and Maharaja Raj Singh who build up this beautiful lack.
    I appreciate dedicated work of the developer of this web on Rajsamand Mr Anjaan.
    Thank u
    MAHESH BAGARWAL

  • dinesh sanadhya

    Thanking you for presentation of Rajsamand History,NOW Required Page of RAJSAMAND PROBLEMS.

  • Dilip Singh Sisodia

    I feel proud to my self that my motherland Kotharia have a big part of Rajsamand Dist Politic…My Village give many political leaders to Dist as State Level…….Some Brave Person are also from My Village …..AS politician…Maharaj Shri Shivdan Singh Ji Chouhan…1st MLA of Nathdwara from BJP & also First Minister in State Cabinet.from Nathdwara . .Mr Kalayan Singh Chouhan Present Mla of Nathdwara…Some are also Kunwar Mahesh Pratap Singh ji Chouhan, Mrs. Sangeeta Chouhan..Mr.Govind Singh ji Chouhan…..I doesn’t want to forget Brave Person from my village …COL.Harendra Singh Ji Chouhan….i hope he is 1st person from our Dist who get this Rank in Indian Army……We feel proud that we are part of Rajsamand Dist as A big Role in MEWAR STATE…from Maharana Pratap Times……

  • Admin अनजान

    दिलीप सिंह जी, बिलकुल सही जानकारी दी आपने कोठारिया गांव अपने आप में वाकई में एक मिसाल है , यहां के बहादुर लोगो व राजनितिक प्रतिनिधियों के बारे में भी कुछ जानकारी यहां शीघ्र जोडी जाएगी….. आपका हार्दिक आभार

  • vikas paliwal

    अरे भाई कोई हे क्या जो स्कूलों में जाने के रास्तो का नक्शा बना के यहाँ के जिला शिक्षा अधिकारी जी के ऑफिस में दे सके

  • Khuman parmar

    मे आप से संपर्क करना चाहता हूं

  • Khuman Singh parmar

    एक निराली सूचना राजसमन्द के कोयल पंचायत के गांव गोवल मे विराजमान माता चामुंडा रानी 👑 का एक मन्दिर है जो ईसा पूर्व या वर्षो पूर्व का एक साधारण रूप में बना मंदिर और जो एक विशेषताओं से जुड़ा है जहां मनुष्य से लेकर पशु के किसी भी प्रकार हुए जेरिले रोग का मुक्त किया जाने एवं विशेष प्रकार कीसी भी कठिनाई एवं अन्य मुश्किलों का सामना करने पर माँ चामुंडा रानी के नाम से पार पाना संभव होता है और यहां तक बहुत ही दुर से जहरीले रोग से निराकरण के लिए यहां आते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों से बहार इस मंदिर का परिचित कम होने से मे एवं मेरे अन्य साथियों ने मिलकर एक साधारण रूप से इस बात को लेकर लोगों को अवगत कराया जाएं किसी भी व्यक्ति को साप
    काटने या किसी भी अन्य जीवों के काटने पर वे गांव गोवल मे विराजमान माता रानी के चरणों में आए और माता रानी 👑 से आरशीवाद ले माता रानी आप के साथ रहेगी और यहां तक कि यहाँ पर हर साल दिसंबर माह में यहां नवरात्रि की शुरुआत होती हैं माता रानी के दरबार में नौ दिनों तक पूजा अर्चना करते है और यह निर्धारित नौवें दिन नवरात्रि समाप्त हो जाता है जिसमें बहुत अधिक संख्या में यात्री यहां तक आवगमन करते हैं तथा यहां की यात्रा में यहां की भजन संध्या का आयोजन किया जाता है जिसमें शामिल होते तथा यहाँ रहने वाले पूजनीय भजनी भजन संध्या करते हैं और रात को बहुत आयोजन रखें जाते हैं बाकी पहले के सालों से अब दो साल से कुछ अधिक परिवर्तन भी यहाँ दीखाइ दिये हैं और यह गांव के बने नव युवक मित्र मंडल की स्थापना के बाद गांव के युवा पुरा सहोयोग करते हैं लेकिन प्रचारित किया जाना आवश्यक रूप से है इस क्षेत्र के बाहर भी कई लोग जो एक दुखी जीवन व्यतीत करने वाले को सूख जीवन वयापन करने कि जरुरत होती है

    मे आपका आभारी खुमान सिंह

    गांव गोवल

  • Khuman Singh Parmar

    राजसमंद एक ऐसा जिला हे, जहा भगवान
    द्दारिकाधीश ,श्रीनाथ जी ,चारभुजानाथ ओर परसराम,
    का ऐतिहासिक मंदिर हे,ओर यह वही श्रेत्र हे
    जहा पांडवो ने माता कुंती के साथ वनवास का वक्त
    यही व्यतीत किया था आज भी फरारा गांव मे
    जहा माता कुंती द्दारा स्थापित शिवलिगं हे
    जो पांचो पाडंव आराधना करते थे, आपको पता हे
    दोस्तो महाभारत मे गटोरगच्छ का नाम
    सुना होगा उसका जन्म इसी श्रैत्र मे हुआ
    था ,उनकी माता का नाम (हडुंबी) जो अपने इसी इलाके मे
    रहती थी, भाइयो यह वही श्रेत्र हे जहा महाराणा कुंभा ने
    कुंभलगढ बनवाया जो आज देश विदेश मे अपने राजसमंद
    का नाम रोशन कर रहा हे,यहवही श्रैत्र हे जिनका नाम
    रामायण मे सुना होगा मेवाड के अमरनाथ भगवान परसुराम
    महादेव का मंदिर राजसमंद की धरती पर बना हुआ हे , ओर
    भाइयो आपने यह स्थान आपने बहुत कम
    सुना होगा उसका नाम हे जलदेवी माता (सांसेरा)
    जहा महाराणा प्रताप ने बादशाह अकबर की मुछ काट
    दी थी यह वही राजसमंद हे, भाइयो 1857
    की क्रांती को रकमगढ का छापर व वंहा बना हुआ रुकमण
    बाई का महल ओर कोठारिया का ऐतिहासि गढ को देखकर
    दिल दहल जाता हे ओर क्या बताउ दोस्तो राणा प्रताप
    की रण भुमी हल्दीघाटी का नाम सुनते ही दिल कांप
    जाता हे ऐसी वीरो की भुमी को सो बार नमन करता हु ,
    भइयो राजसमंद के आमेट के पास कमेरी गांव जहा पन्नाधाय
    रहती थी उसने अपने सपुत्र चंदन को को बलीदान कर
    दिया,ओर उदयसिह को बचा लिया सुना हे भाइयो अपने
    राजसमंद पर मुझे गर्व हे (जय जय राजसमंद)राजसमंद वही श्रेत्र
    हे जो देश के दुश्मनो से लोहा लिया था,।1857
    की क्रांती मे भी राजसमंद पिछे नही हे,गवालियर से
    अग्रेंजो की फोज ने तात्या टोपे का पिछा किया था ओर
    तात्या टोपे राजसमंद के कोठारिया गाव के
    साहसी ठाकुरो ने उनको शरण दी उसके बाद
    अग्रेंजो को खदेडने के लिए यही से सेना बनाई ,ओर (रकमगढ
    के छापर) मे महासंग्राम हुआ लहु से धरती लाल हो गई
    हजारो लोगो ने अग्रेंजो की फोज का सामना करते करते
    देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए,।ओर दोस्तो यह
    वही श्रेत्र हे ,।हल्दीघाटी मे दिल्ली के बादशाह अकबर ओर
    वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप के बिच युध हुआ ,यह
    वही राजसमंद की धरती हे जो मुगंलो को दिल्ली जाने पर
    मजबुर किया ,। ओर यह वही राजसमंद हे,जहा पन्नाधाय ने
    अपने देश के लिए प्राणो से भीप्यारा चन्दन
    को अपनी आखो के सामने देश के लिए कुब्रान कर दिए, ।जय
    जय राजसमंद खुमाण सिंह

  • विजय पालीवाल

    नमस्कार सर
    आपके प्रयास को साधुवाद| बहुत अच्छी लगी वेबसाइट राजसमन्द के गौरवमय इतिहास के बारे में गहराई से जानकारी हो तो आम जन को इतिहास भी मालूम होगा और प्रतियोगी परीक्षा हेतु नयी पीढ़ी को मदद भी मिलेगी|
    जैसे – राजनगर , राजमहल , राजसमन्द की स्थापना (संभवतः १६७१ में उद्घाटन ) अन्याय से खुला संघर्ष (किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमती से नोचोकी के समीप की पहाड़ी पर शादी संभवतः १६६० के दशक में ) विश्व का सबसे बड़ा शिलालेख नौचोकी पर| प्रभु द्वारिकाधीश का पदार्पण आदि

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