Rajsamand District, Rajasthan

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बढ़े चलो

September 11th, 2011 · 2 टिप्पणीयां · इतिहास के पन्नो से

स्कूल में अक्सर पढ़ी पढ़ाई जाने वाली एक कविता है बढ़े चलो, बढ़े चलो | ये कविता देशभक्त और सही लोगों को सन्मार्ग पर चलते रहने का जैसे संदेश देती प्रतीक होती है | इस कविता के रचनाकार है प्रसिद्ध कवि सोहन लाल द्विवेदी | सोहन लाल जी हिन्दी के एक राष्ट्रीय कवि के रूप में प्रतिष्ठित हुए | बहुत ही उम्दा लेखन के कारण ही इन्हें बाद में राष्ट्रकवि की उपाधि से भी अलंकृत किया | देशभक्ती पर ए॓सी जोरदार कविता लिखी है आप भी पढ़िये एक बार |

बढ़े चलो, बढ़े चलोः कवि सोहन लाल द्विवेदी

badhe chalo

badhe chalo

न हाथ एक शस्त्र हो
न हाथ एक अस्त्र हो
न अन्न वीर वस्त्र हो
हटो नही डरो नहीं
बढ़े चलो, बढ़े चलो ||

रहे समक्ष हिम शिखर
तुम्हारा प्रण उठे निखर
भले ही जाए जन बिखर
रुको नहीं झुको नहीं
बढ़े चलो, बढ़े चलो ||

घटा घिरी अटूट हो
अधर में कालकूट हो
वही सुधा का घूंट हो
जीयो चलो मरो चलो
बढ़े चलो, बढ़े चलो ||

घघण उगलता आग हो
छिडा मरण का राग हो
लहू का अपने फाग हो
अडो वहीं गडो वहीं
बढ़े चलो, बढ़े चलो ||

चलो नहीं मिसाल हो
जलो नई मशाल हो
बढ़ो नया कमाल हो
झुको नहीं रुको नहीं
बढ़े चलो, बढ़े चलो ||

अशेष रक्त तोल दो
स्वतन्त्रता का मोल दो
कडी युगों की खोल दो
डरो नहीं मरो नहीं
बढ़े चलो, बढ़े चलो

टैग्सः ····

2 टिप्पणीयां ↓

  • manju

    me bhi ek chi si desh bhat hu pr kbhi moka nhi mila aap jese logo se judne ka

  • om gujjar

    Main bhi bharat mata ka veer suputra hu agar moka mila to jaan bhi de sakta hu…main b.s.t.c. first year ka student hu muje ak desh bhakti geet es 15 augest ko gaana hai muje ak geet mere e-mail par bhejna please

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