Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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भगवान को भी नशीले पदार्थ पसंद है, क्यों ?

May 26th, 2011 · 2 टिप्पणीयां · उलझन

आज इंसान किसी ना किसी नशे में जकडा हुआ है, और चाहते हुए भी छोडता नहीं या फिर कुछ लोग छोडना भी नहीं चाहते ! क्यों कि आदमी मन पक्का कर ले तो कुछ भी हो सकता है बस जरुरत है तो

liquors

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दृढ़ निश्चय की ! तो ये आदमी आखिर ये नशे वशे के चक्कर में पडा कैसे !

कई बार में अपने आस पास देखता हूं और पाता हुं कि भगवान को भी नशीले पदार्थ पसंद थे, एसा क्यों ? यह विचार मेने मन में कई बार आता है पर आखिर कुछ जानकारी मेनें जुटा ही ली इस बारे में ! तो प्रस्तुत है !

इन्द्र आदि देवताः
पढ़ने में आता है कि इन्द्र आदि देवता व्यसनी थे, और वे हमेशा आमोद प्रमोद में ही तल्लीन रहते थे, तभी असुरों नें भी उन पर युद्ध से विजय करने की ठानी ! सुन्दर अप्सराएं और सुरा आदि उनके खास शौक में से थे ! रंभा, मेनका और उर्वषी आदि अप्सराओं की उस जमाने में भला क्या जरुरते थी, राजा थे तो लाईन से लाईन चलते और सद्कार्य करते ताकि कुछ अच्छी मिसाल बनती !

भगवान शिव जीः
कहते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान निकला विष भी भगवान शिव ने पी लिया था ताकि दुसरो पर आंच ना आये ! पर भगवान शिव भी भांग और धतुरा आदि नशीले पेय पसंद करते थे और आज भी हर शिव मंदिर में भांग को प्रसाद माना जाता है लोग बडे चाव से इसका सेवन करते हैं, अपने आप को महान शिव भक्त मानते हैं ! हो सकता है कि कम मात्रा में लेने पर ये भांग से भी शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचता हो पर नशा तो नशा ही है ना ! कालभैरव मंदिर में तो भगवान शिव को शराब का भोग लगाया जाता है और लोगों की मान्यता भी है कि शिवजी यह ग्रहण करते हैं और प्रसाद चढ़ाते वक्त बोतल में से शराब कम होती देखी जा सकती है !

माता जीः
हिन्दुओ में देवी मां पूज्जनीय है और उनका नवरात्री प्रमुख उत्सव होता है ! पर उनके भक्त बहानेबाज है, अक्सर प्रसादियों आदि में शराब का सेवन किया जाता है ! बल्कि ये भी कह सकते हैं कि शराब के शौकिन लोग ही कुछ लोगों में अपना प्रभाव जमाने मात्र के लिये और बताने के लिये की हम कितने सक्षम है, किसी कार्य के सिद्ध हो जाने पर मन्नत को पुरा करते हैं, और पार्टी की शक्ल में प्रसादियां आदि करते हैं ! फिर ये भी है कि जो लोग शराब आदि पीये हुए हैं वे संयम पूरा रखते हैं ! वे मंदिर में नहीं जाते बाहर से ही प्रणाम करते हैं, या फिर पीने से पहले दर्शन कर लेते हैं ताकि देवी मां के कोप से बचा जा सके !

राजस्थान में धार्मिक मेलों मेः
राजस्थान मेलों का राज्य है ! कई तरह के मेले यहां हर साल लगते है ‌और जिनमें से रमदेवरा भी एक है ! यह भी देखा जाता है कि धार्मिक मेलों मे लोग पदयात्राये करते है और मन्नत आदि के पुरी होने की आशा में कई किलोमीटर पैदल चलते हैं कुछ लोटते हैं और कई लोग साईकिल यात्रायें करते हैं ! पर जैसे ही गन्तव्य स्थान पर पहुंचे नहीं कि फिर जैसे अनुशासन कहीं खो जाता है और फिर वे नशे में गिरफ्तार हो जाते हैं, इस तरह के कई लोगों मेले में या सडकों पर नशे की हालत में लडाईयां या उल जुलुल हरकते करते हुए देखा जा सकता है ! आखिर वे ये सब क्या कर रहे हैं अपनी थकान मिटा रहें है या फिर वाकई में वे भक्तिभाव से परिपूर्ण है !

लोकल गांवो के भेरु जी देवरों मेः
आस पास के गांवो में जहां ग्रामीण लोगों की आस्था लोकल भगवान भेरु जी आदि में बहुत होती है वहां मंदिर को देवरे कहा जाता है और कहते है कि यहां दर्शन करने, प्रसाद ग्रहण करने आदि से सारे आने वाले के सारे कष्ट दूर होते हैं ! पर मंदिर तो पवित्र स्थान है ना यहां के प्रांगण में भी कई ग्रामीण लोगों को बीडीयां फुंकते हुए देखा जा सकता है ! कहीं कहीं तो अमल महाप्रसाद यानी अफिम का पानी भी बडी मनुहार करके एक दूसरे को पिलाया जाता है ! क्या अफिम में नशा नहीं होता !

पता नहीं क्यों हजारों लाखों लोग ना ना प्रकार के नशे की समस्याओ से ग्रस्त है, हर कोई गुटखे, पान, पान मसाला, सिगरेट, शराब, भांग, अफिम और ना जाने क्या क्या ! जाने कब ये दुनिया इन सब नशीली वस्तुओं से मुक्त होगी ! कहते है कि पीने वालों को पीने का बहाना चाहिये, क्या सही नहीं है ये ! जब हमारे समाज में देवी देवता भी इन ना ना प्रकार के नशों से अछुते नहीं रहा पाये तो इंसान क्या खाक दूर रह सकता है, ये बडा ही शोचनीय प्रश्न है !

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