Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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मन की भडास

September 12th, 2009 · अब तक कोई टिप्पणी नहीं की गई · उलझन

मन की भडास

सुबह सुबह का समय ना जाने क्यूं,
बचपन से ही मुझे अच्छा लगता है,
पर इस कोरे साफ सुथरे समय में भी कोई है,
जो शायद यह समय ही चुनता है
और निकालता है अपने मन की भडास ।

जाने कहां गन्दी गलियों में वह रहता होगा
ना जाने कहां से हर रोज सुबह के वक्त ही,
अवतरित हो उठता है ।

वह पागल सा व्यक्ती मेरे घर से कुछ दूर,
चौपाटी पर भांग की दुकान के पास खडे हुए
रोजाना अल सुबह ना जाने किसको
भद्दी भद्दी सी गालीयां देता है,
चिल्लाता है इतना दम लगाता है
कि, कि लगे कलेजा मुंह से बाहर आ जाएगा
गले की नसें खिंच सी जाती हैं, उसकी

एक दो पांच दिन हो तो हो पर,
ये तो दिन पर दिन यही काम करता रहता है,

पता किया तो जाना कि वह काम कुछ करता नहीं हैं,
दिन में किसी नें रुपये दो रुपये दे दिये
तो पानी के मटके भर ले आता है
उस ही खटारे हेंड पंप से जो कभी चलता है और कभी नहीं.

सिर्फ भांग के नशे का आदि हो चुका है
रुपये पेसे उसके पास होते हैं नहीं

पर कहा भी गया है ना कि
आवश्यक्ता ही आविष्कार की जननी है

उसको आवश्यक्ता है जरुरत है सिर्फ और सिर्फ भांग के नशे की
इतना लती हो चुका है वह कि जैसे उसकी नसों में भांग जम चुकी हो,

शायद यही सोच कर वह चिल्लाता है, गालियां बकता है,
लोग चाहे उसे पागल समझे पर
उसे अपना काम निकालना आता है ।

और फिर कोई न कोई दया करूणा वश
उसे दो पांच रुपये दे देता है और फिर वह उन चंद सिक्को से
भांग पी कर मस्त होकर अपने रास्ते चल पडता है

फिर अगली सुबह होगी और फिर से उसका यही क्रम चलेगा,
सोचता हूं वह ठीक होगा या नहीं,

कोई तो उसका भी अपना होगा, जो उसकी चिन्ता करे,
या फिर उसकी भी जिन्दगी यूं ही चलती रहेगी, चलती रहेगी ।

अनजान

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