Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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रहीम के कुछ दौहे

September 19th, 2011 · 4 टिप्पणीयां · इतिहास के पन्नो से

रहीम का पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना था और वे भी भारत में जन्में महान कवियों में से एक थे | पन्द्रहवी शताब्दी के दौरान जब उन्होने अपने आस पास के समाज की कुरितियों को देका तो बेबाकी से उन्होनें अपने विचार प्रकट किये दोहों के रूप में | वे दौहै आज भी स्कूलों में पढ़ाये जाते हैं | कठिन से कठिन बात को वे बडे ही सरल शब्दो में ए॓से कह जाते थे कि बस | इसी हाजिरजवाबी और कला प्रेम ने उन्हें बादशाह अकबर के नौ रत्नों में से एक का ओहदा दिलवाया | रहीम ना सिर्फ एक विचारशील कवि थे बल्कि जुजारू योद्धा भी थे | रहीम के हर दौहे बहुत ही खास संदेश देते हैं और हमें दुनिया को देखने का एक जबरदस्त नजरिया देते है |

तो पेश है रहीम के कुछ प्रसिद्ध दौहेः

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोडौ चटकाय |
टुटे से फिर ना जुडे, जुडे गांठ पड जाय ||

बिगरी बात बनै नहीं, लाख करो किन कोय |
रहिमन फाटे दूध को, मथे ना माखन होय ||

रहिमन बात अगम्य की, कहिन सुनन की नाहिं |
जै जानत ते कहत नहीं, कहत ते जानत नाहिं ||

जो रहिम ओछे बढ़े, तो अति ही इतराय |
पयादे से फरजी भयो, टेढ़ों टेढ़ों जाय ||

रहिमन विपदाहू भली जो, थोरे दिन होय |
हित अनहित या जगत में जानि परत सब कोय ||

रहिमन औछे नरन सों, बैर भलों ना प्रीत |
काटे चाटे स्वान के, दोउ भाति विपरीत ||

गही सरनागति राम की, भवसागर की नाव |
रहिमन जगत उधार को, और ना कोउ उपाय ||

रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन को फेर |
जब नीकै दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर ||

दीन सबन को लखत है, दीनहिं लखे न कोय |
जो रहिम दीनहिं लखौं, दीन बंधू सम होय | |

राम ना जाते हरिन संग, सिय ना रावन साथ |
जो रहीम भावी कतहूं, होत आपने हाथ ||

पावस देखि रहीम मन, कोइल साधे मौंन |
अब दादुर वक्ता भये, हमको पूछत कौन ||

रहिमन वे नर मर चुके, जे कहं मागन जाहि |
उनते पहले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहीं ||

जो गरीब तों हित करे, धनी रहीम ते लोग |
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग ||

रहिमन कठिन चितान तै, चिंता को चित चैन |
चिता दहति निर्जीव को, चिंता जीव समेत ||

बडे बडाई ना करै, बडो ना बोले बोल |
रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मम मोल ||

ज्यों नाचत कठपुतरी, करम नचावत गात |
अपने हाथ रहिम ज्यों, नहिं आपने हाथ ||

तरुवर फल नहीं खात है, सरवर पियहीं ना पान |
कहि रहीम परकाज हित, संपति संचहि सुजान ||

रहिमन देखि बडेन को, लघु ना दिजीये डारि |
जहां काम आवे सुई, कहां करे तरवारी ||

समय पाय फल होत है, समय पात झर जाय |
सदा रहै नहीं एक सी, का रहीम पछताय ||

जो बडेन को लघू कहे, नहिं रहीम घटि जाहिं |
गिरिधर मुरलीधर कहे, कछु दःख मानत नाहिं ||

टैग्सः ···

4 टिप्पणीयां ↓

  • mohammed ameen

    Dear,
    I read about rahim ji when I am doing study in primery classes.that time I am not realise actual perfection about life .I have not experience about life .so that was only the chapter for.
    now I am read and know how
    realistic this in life .its good blog

  • Ranjeet Kumar Ojha

    Dear sir,
    Mai request karta hu ki 4 vad / 18 puran / bhagwat gita /ramayan /prawachan, chand/skand/doha/rudh ke sath or sare hindi ka sara gyan jaise doha /chhand/skand/bhasa/sahitya/kabya etc update kare

  • Ranjeet Kumar Ojha

    mantra sabhi devoi davtao ka pujan bidhi or sanskrit se savi jankariya update kare

  • raj sen

    it is history of wonderfull

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