Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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सडक की कुछ घटनाएं

August 18th, 2010 · 1 टिप्पणी · आपबीती, लघु कहानियां

सडक पर चलना आजकल उतना जरुरी है जितना कि खाना खाना, नहाना या काम काज करना ! सडक पर हर आदमी को चलना पडता है चाहे वह कोई सादा सा साधारण मामूली आम आदमी हो या फिर खासमखास ! और आबादी मे अव्वल होने कि वजह से सडक पर ट्राफिक में चलना आसान नहीं रहा, पग पग पर खतरे ! पर कर भी कुछ नहीं सकते क्योकि चले बिना और वाहन चलाए बिना हम रह ही नहीं सकते ! आज में तीन छोटी घटनाएं बताने वाला हूं जो बताती है कि आजकल लोग सडक पर और ट्राफिक में चलने के दौरान किस किस तरह के व्यवहार करते है !

  • घटना नं. एकः

एक आम व्यक्ति अपनी साधारण सी मोटर साईकिल पर मध्यम स्पीड से सडक पर जा रहा है, थोडा आगे देखता है तो सडक संकडी है पर और एक जगह ए॓सी परिस्थिती होती है कि एक मोटरसाईकिल सवार ही एक बार में निकल सकता हो, रास्ता साफ ही था, उसे लगा कि वह निकल जाएगा और आगे निलकते ही सडक फिर चौडी है ही ! पर यकायक महंगी सी मोडीफाईड बाईक पर दो लेटेस्ट फैशन के कपडे पहने हुए लफंगे टाईप के नौजवान रफ्तारपुर्वक तेजी से मोटरसाईकिल चलाते हुए चले आ रहे हैं, उन लफंगों ने भी सडक की स्थिती को देख लिया कि यहां एक बार में एक मोटरसाईकिल सवार ही निकल सकता, नौजवान ने तुरंत एक हाथ से इशारा किया किः अबे तू रूक हम निकल रहें हैं, केवल इशारों कि भाषा में बात हो गई ! आम व्यक्ति नें अपनी साधारण मोटर साईकिल की रफ्तार कम की और लफंगे नौजवान तेजी से कट मारते और धुंआ उडाते हुए निकल गये !

  • घटना नं. दोः

एक सीधी सडक पर एक तिराहा जुडता है जहां वही आम आदमी कम स्पीड में चला जा रहा था अपनी मोटरसाइकिल पर, रात के आठ बजे थे और क्युं कि तिराहे पर उसे मुडना था तो उसने अपनी मोटरसाइकिल का उस तरफ वाला इंडिकेटर चला दिया, अभी बीच सडक पर मुडने को चला ही था कि अचानक तेज रफ्तार में एक ओटो निकला जिसे कि सीधा जाना था, पर वह मोटरसाईकिल वाला आम आदमी तो कम रफ्तार से मुड चुका ही था ! तिराहा होने के बवजुद टेंपों वाला कम स्पीड नहीं करता है और एक भद्दी सी गाली तेज आवाज में मोटरसाईकिल सवार को सुनाता है “ए॓ रे आन्दिया” ! वह मोटरसाईकिल वाला आम आदमी सुन कर भी अनसुना करता है और गलती उसकी नहीं होने के बावजूद भी चला जाता है !

  • घटना नं. तीनः

एक संकडी सडक पर दो मोटरसाईकिलें क्रोस होने वाली थी, एक मोटरसाइकिल पर दो आदमी सवार थे व एक मोटरसाइकिल पर एक अकेला सवार था ! कम जगह होने के वावजुद दो सवारों वाली मोटरसाईकिल अपनी रफ्तार में तेजी से निकलती है और सिंगल वाला आदमी कम स्पीड में ! दोनो वाहनचालकों को लगता हे कि अब अडी अब अडी ! पर गाडीयां अडती नहीं है और निकल जाती है, उस भरे बाजार में दो सवारों वाली मोटरसाईकिल पर से एक सवार चिल्ला कर बहुत ही भद्दी सी गाली देता है !

क्या गालीयां देना, होडा होडी करना, बडा में छोटा सामने वाला ! पहले में बाद में वो ये सब ही हमारी सोच है ! अगर ए॓सा है तो यह गलत है ! अंत में, वह बात में में अपने पाठकों तक पहुंचाना चाहता था वो यह है कि सडक पर भी इंसान बने रहें, वैसा ही व्यवहार करें जैसा आपको खुद भी बुरा ना लगता हो या खुद को पसंद हो ! ए॓सा नहीं कि वाहन हाथ में आ गया तो अपनी बादशाहत हो गई हो जैसे ! हर सेर को सवा सेर मिलता है, सभी लोग कुछ बात सुन कर भी चुपचाप निकल जायें इस टाईप के नहीं होते !

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एक टिप्पणी ↓

  • Prem Prakash

    Guru hairat kee baat hai ki itne achchhe topic par ab tak aapko koi comment nahin mila, Main dil se aapkee bhavnon ke kadra karta hoon. Aap wakai jamin se jude hue lekhak hain. Meree hardik shubhkamnayen.

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