मेरा एक अजीज मित्र कुछ सालों के बाद आया | मिलने पर हमें बडी खुशी हुई और कुछ खासो आम बातें करने के बाद हमने उन्हें पूछा की और सुनाओ क्या नया जूना चल रहा हैं | मित्र ने कहा की अपनी कांकरोली बिलकुल नहीं बदली दोस्त | यहां आते ही हर गली कुचे में घुम कर आया हूं, पर ये शहर अभी भी वैसा ही नियन्त्रणहीन और अविकसित हैं | हां पर एक बात जरुर हैं इस बार लगता हैं कोई सिंघम आया हैं, हमारे शहर के ट्रेफिक पुलिस के जवान हर नुक्कड चौराहों पर मुस्तैद लग रहे हैं | बडे आश्चर्य की बात हैं, सिर्फ दो तीन किमी की एक सडक से जुडा छोटा सा शहर पर इतनी सुव्यवस्थित यातायात की व्यवस्थाएं |
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में राजसमन्द से ही एक साधारण व्यवसायी युवक हूं, 1997 में मुझे कम्प्यूटर और नई तकनीकी आदि के बारे में जानने का मौका मिला तभी से हमेशा कुछ ना कुछ सीखने की कोशिश करता हूं | इसी क्रम में राजसमन्द के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने वेबसाईट, वह भी हमारी सरल सुलभ हिन्दी भाषा में बनाने का
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