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अच्छा देखें, अच्छा साहित्य पढ़ें, अच्छे विचार प्रकट करें

February 17th, 2010 · अब तक कोई टिप्पणी नहीं की गई · उलझन

जी हां सभी लोग अच्छा देखें, अच्छा साहित्य पढ़ें और अच्छे व सटीक विचार प्रकट करें तो शायद बहुत सी समस्याओं का अन्त हो सकता है । शायद आपसभी ने कीप या कुप्पी को देखा ही होगा ।

इसका काम होता है, बोतल में पानी या कुछ भी भरने के लिये । अक्सर बोतलों के मुंह छोटे होते हैं और अगर लोटे से सीधे धार बना कर भी पानी डाले तो कुछ बहर गिर ही जाता है । पर अगर कीप के सिरे को बोतल में सही तरह से पकडो और पानी डालो तो कैसा सीधा एक ही धार से पानी अंदर जाता है । बाहर बिलकुल भी नहीं गिरता । तो इंसान अपने आप को व्यावहारिक जीवन में एक कुप्पी के जैसा बना ले तो कैसा लगेगा ।

यानी कि दुनिया के लोग कुछ भी कहे, चाहे वह बात किसी भी परिप्रक्ष्य में हो, कुछ भी डाले उस इंसान के मन में, पर जब कोई भी बात या विचार मुंह से निकले तो ए॓से सटीक की, बस ! बडे लोगो ने कहा है ही कि पहले तोलो फिर बोलों, क्यों कि शब्दों के बाण ए॓से होते हैं जो लौट कर फिर नहीं आते, एक बार किसी को कुछ कह दिया तो कह दिया ।

कई लोग सालों सालों तक बैर पाले रखते है कि फलां ने मुझे उस मौंके पर यह कह दिया वो कह दिया । बातों की चंचलता से कोई ज्यादा सम्मान नहीं पाते पर , धीर गंभीर या सोच समझ कर बात को प्रकट करने वाले की हर कोई सुनता है । साथ ही एक अच्छा इंसान वही है जो अपने गुस्से को काबू कर सके । तो आज से, अब से में भी एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश करुंगा ।

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