राजसमन्द से एक हिंदी वेबसाईट

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया, कटु सोच आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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हमसे जुडें

कोई कैसे जुड सकता है राजसमन्द जिले की प्रथम हिन्दी साइट से

राजसमन्द के पर्यटन स्थल किले आदि के बारे में जानकारी देने वाली यह साइट वर्ष 2000 में शुरु की गई थी, पहले यह जिला मुख्यालय व प्रशासनिक जानकारी देने वाली साइट थी, जो जिला कलेक्टर निर्मल वाधवानी के प्रयासों से शुरु की गई थी । बाद में रखरखाव व अन्य कारणों से यह बंद हो गई थी !

पुनः वर्ष 2006 में इसे शुरु करने व आगे बढ़ाने का बीडा उठाया राजसमन्द के ही एक बालक नें, धीरे धीरे लोग जुडते गए और कारवां बढ़ता चला गया । काफी सारी जानकारी जब राजसमन्द के बारे में इकट्ठी हो गई तो फिर लगा की अब इस साइट पर और भी कुछ नया किया जाए । शुरुआत हुई अपने मन के भीतर कुलबुलाते रोजाना के विचारों के लेखन से और नतीजा सामने है ।

हम स्वागत करतें हैं अपने तमाम विजीटर लोगों का व इस साइट को चाहने वालों का जो हमारी इस छोटी सी कोशिश को साकार करने के लिए कुछ मदद करना चाहते है । यह इस साइट की विशेषता है कि इसको चलाने में और आगे बढ़ाने मे कई लोग लेखन के द्वारा अपना सहयोग प्रदान कर सकते हैं । आप चाहे जिस विषय पर लिख सकते हैं वह खेल, राजनीति, समाज, धर्म हो या फिर कोई और विषय हो ।

तो अगर आप समझते हैं कि आपकी कलम में भी कुछ लिख डालने की चाहत तो तैयार हो जाइये कुछ लिखने के लिए, हमें खुशी होगी आपके साथ काम करके यदि, आप अगर आप राजसमन्द जिले के ही रहने वाले हैं या राजसमन्द की किसी बात के बारे में कुछ लिखना चाहते हैं

अगर आप की भी अंगुलियों मे झनझनाहट सी होती है कि इस वर्तमान समय में चल रहे वातावरण, घटनाओं या किसी परिस्थिति विशेष के बारे में में कुछ लिखुं तो यह साइट आपके लिए एक बेहतरीन प्लेटफार्म साबित हो सकती है, आप अपने निजी कडवे मीठे अनुभव भी उन तमाम सारे लोगों के साथ बांट सकते है जो यह साइट रेगुलर विजीट करते है !

अपने मन के विचारों और भावनाओं को जन जन तक पहुंचाने का इससे बेहतर कोइ विकल्प नहीं है करना क्या होगा इसके लिये, अपनी रुचि के अनुरुप महिने में न्युनतम दो पोस्ट लिखने होंगें चाहे वो किसी भी विषय पर हों !

हम क्या क्या मदद करेंगे ?
हिन्दी में लिखना सीखाएंगे और साईट पर कुछ कार्य कैसे किया जाए या लेख केसे लिखा जाए ये बताएंगे ।

तो यदि आप तैयार है सम्पर्क करें !

10 टिप्पणीयां

10 टिप्पणीयां ↓

  • vivek dhoot

    i am also a citizen of this ancient place.
    i m really glad that rasamand is also being popular in this world.

    i and we all citizens of kankroli r thankful to all the persons who r involved directly or indirectly in creating this particular site.

    THANK YOU.

  • Kamal Paliwal

    I am very happy to visit this site but would like to inform you that you are promoting a cottage industry from Haldighati namely Maharana Pratap Musume. It is not the part of government and we are still waiting for the government Musume.

  • Narendra Singh Chouhan

    I am very happy to visit this site

  • krishna kumar mishra

    सुन्दर प्रयास

  • zoyeb shikari

    hello,
    aap se ek choti si jaankari lena hai agar aap meri mada kar de to bahut achcha hoga.
    rajsamand mein bohra samaj ke baare mein kuch jaankari agar aap de de to bahut meharbani hogi dhanyavaad.

  • prakash

    aap hame wallpaper and khi sdabhar gane sunna chahahuga agar aap meri ichha puri karege to me aapka abhari rahuga …………………….

  • kulveer singh dharawat

    hi its good that we have our district information on net .so i want to thank all people that made this website. THANK YOU

  • kishan gadri emdi

    rajsmand dist ka bare me jankari badiya ha and
    railmarg ko barodgage me pariwaratan karene ka liya hame pariyash karana padega

  • YOGENDRASINGHRATHORE

    AP BHUT SAHI KAM KER RAHA HO .

  • Kamal Paliwal

    आदरणीय महोदय जी ,

    जय जगत !!

    आपको जानकर बड़ा दुख होगा की हल्दीघाटी का महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक, हल्दीघाटी व्यक्ति विशेष एवं संस्थान की राजनीती व् पूंजीवाद की भेट चढ़ गया और २१ जून २००९ को उदघाटन होने के बाद भी आज तक संचालित नहीं हो पाया है मूल हल्दीघाटी का दर्रा एवं हल्दीघाटी के युद्ध के साक्षी मूल रण स्थल रक्त तलाई मे किसी भी प्रकार का कोई पर्यटन विकास हेतु पर्यटन विभाग द्वारा प्रयास नहीं है पूर्व मे चेतक की स्मृति मे अश्व मेले का आयोजन हुआ भी तो वह भी भोली भाली जनता के नसीब से निकल गया विशालकाय फव्वारा बनने के बाद से ही बंद पड़ा जनता के पैसे का मजाक बना रहा है

    आपसे मानवीयता के नाते निवेदन है की राजनैतिक अटकलों से आगे बढ़ते हुए आप , सामाजिक एवं समानता के इस मुद्दे को हल्दीघाटी के युद्ध स्थल रक्त तलाई से आरम्भ कर मेवाड स्वाभिमान की मानव समाज क्रांति को शांतिमय का रूप देकर प्रताप भक्तो के लिए मानव समाज के सर्वांगींन विकास मे मददगार बने

    धन्यवाद ,

    पत्र के इंतज़ार मे ………………..

    कमल पालीवाल

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