Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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राजसमन्द की मार्बल मण्डी का गन्दा धंधा

February 4th, 2007 · 1 टिप्पणी · मार्बल व्यवसाय, राजसमन्द जिला, हास्य

राजसमन्द प्रसिद्ध है यहां की मार्बल की खानों के लिये । यहां काफी सारी मार्बल खदाने हें व इनसे संबधित काफी सारे व्यवसाय भी यहां इस कारण चलते हैं । 250 से 300 मार्बल गेंगसा प्लान्ट हैं व मार्बल के गौदाम तो हजारों की तादात में है । सन् 1985 के आसपास यहां राजसमन्द में मार्बल के धन्धे मे एक शुरुआती दौर आया और तब से यहां की धरती का दोहन अनवरत हो ही रहा है ।

बाहर से आए लोगों ने यहां आकर इस धन्धे में बहुत पैसा बनाया क्योंकि हर कोई भी व्यक्ती बाहर से आकर कहीं काम धन्धा करता है तो उसका पहला मकसद यही होता है की येन केन प्रकारेण ज्यादा से ज्यादा पैसा लेकर फिर से वो अपने गांव (या जहां से वो आया है) जा सके । मुंबई, बेंगलोर में भला लोग छोटी जगहों से क्यों जाते हैं, क्योंकि वहां काम है, रोजगार है व पैसा कमाने के अवसर है। अगर आप राजसमंद के ही लोकल रहने वाले हें तो आप ये भली भांती जानते होंगे की यहां की 250 से 300 मार्बल गेंगसा आनर्स में से स्थानिय कितने है , 5, 10 या 20 बस । क्वार्टज व फेल्ड्सफार के प्लान्ट्स लोकल लोगों के कितने हैं व बाहर के लोगों के कितने हैं । यहां के स्थानिय लोगों का जितना उत्थान होना चाहिये था उतना नहीं हो पाया है ‌और इसका दर्द एक स्थानिय या लोकल व्यक्ती ही जान सकता है । कुछ एक लोग अपवाद स्वरुप हें पर यहां के स्थानिय लोग इस गडबड जाले के धन्धे में ज्यादा नहीं कमा पाएं है, उल्टे गुजरात व साऊथ के व्यवसाईयों की उधारी में डुबें ही हैं।

यह धन्धा अब बस सिर्फ और सिर्फ बडे बिजनसमेन लोगों के हाथ में ही रह गया है । पर कई बाहर से आकर यहां बसे व्यापारी लोग इसे धन्धे को एक खेल समझते हैं क्योंकि वे जानते हें कहां हाथ खुला रखना है व कहां टाईट।  यहां से काफी लोकल लोग अपना सब कुछ लगाने के बाद भी इतने समय में कुछ खास नहीं कमा पाए ईस बात का मलाल सिर्फ एक स्थानिय को ही हो सकता है ।

यहां उंट गाडी वाले धोती पहनने वाले व्यक्ति भी यहां मोबाईल रखते है, वह भी केसे यह देखने वाली बात है, एक बार एक मि्त्र ने बताया कि यहां का एक उंट गाडी वाला पहनता तो धोती ही है अब समस्या ये आयी कि ये ससुरा मोबाईल कहां रखे तो इसका भी हल उसने इस प्रकार निकाला कि धोती पर ही बेल्ट बांध लिया व बेल्ट से मोबाईल लटक गया । हे ना गजब का आईडिया । अरे ये क्या, में तो धन्धे कि बात करते करते हास्य के फिल्ड में ले आया आपको । खेर और मार्बल व इससे संबधित बाते फिर कभी………..

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एक टिप्पणी ↓

  • sudesh bhardwaj

    स्थानीय लोग हर जगह पिछड़ जातें हैं / अगर देखा जाए तो स्थानीय लोग छोटे-मोटे काम-धंधे तक ही सिमित रह जाते हैं / ऐसा नहीं होना चाहिए /

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