Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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Entries Tagged as 'इतिहास के पन्नो से'

रहीम के कुछ दौहे

September 19th, 2011 · 4 Comments · इतिहास के पन्नो से

रहीम का पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना था और वे भी भारत में जन्में महान कवियों में से एक थे | पन्द्रहवी शताब्दी के दौरान जब उन्होने अपने आस पास के समाज की कुरितियों को देका तो बेबाकी से उन्होनें अपने विचार प्रकट किये दोहों के रूप में | वे दौहै आज भी स्कूलों में […]

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बढ़े चलो

September 11th, 2011 · 2 Comments · इतिहास के पन्नो से

स्कूल में अक्सर पढ़ी पढ़ाई जाने वाली एक कविता है बढ़े चलो, बढ़े चलो | ये कविता देशभक्त और सही लोगों को सन्मार्ग पर चलते रहने का जैसे संदेश देती प्रतीक होती है | इस कविता के रचनाकार है प्रसिद्ध कवि सोहन लाल द्विवेदी | सोहन लाल जी हिन्दी के एक राष्ट्रीय कवि के रूप […]

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हरिवंशराय बच्चन की मधुशाला

September 11th, 2011 · 1 Comment · इतिहास के पन्नो से

हरिवंशराय बच्चन जो कि हिन्दी के विख्यात कवि थे, कौन अरे वो ही अपने एक्टर अमिताभ बच्चन जी के बाबूजी | उन्होनें बहुत सी कविताएं और रचनायें लिखीं जिनमें से मुख्य हैं मधुशाला, निशा निमंत्रण, सतरंगिनी, खादी के फूल, दो चट्टानें, आरती और अंगारे, मधुबाला, मधुकलश, प्रणय पत्रिका आदि | उन्होने हिन्दी कविता के इतिहास […]

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पन्ना धायः सत्य नारायण गौयंका

August 30th, 2011 · 5 Comments · इतिहास के पन्नो से

पन्ना धाय की अदम्य वीरता, त्याग और बलिदान की कहानीः जब मेवाड के महाराजा राणा सांगा का देहान्त हुआ तब उनके पु्त्र उदयसिंह बहुत छोटे थे, बनवीर को सोंपा गया था काम नन्हें उदयसिंह की रक्षा व लालन पालन करके बडा करने का और समुचित शिक्षा दिलवाने का पर बनवीर के मन में कुछ ‌और […]

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कबीर के दौहे

August 30th, 2011 · 2 Comments · इतिहास के पन्नो से

कबीर दास जी का जीवन चरित्र: कबीर कबीर हैं, उनके जैसा कोई ‌और नहीं, वे सिर्फ दुनिया में आये, गये नहीं, आज भी उन दोहों को पढ़ते या सुनते वक्त वो ही रुहानी ताकत का एहसास होता हैं | कबीर नें जितने सरल शब्दों में व्यक्ति, समाज धर्म आदि का चित्रण किया वह कोई शायद […]

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