Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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द्धारिकाप्रसाद जी सांचिहर

April 16th, 2008 · अब तक कोई टिप्पणी नहीं की गई · राजसमन्द जिला, शख्सियत

द्धारिकाप्रसाद जी सांचिहर का नाम भी राजसमन्द से जुडा हुआ है । वे एक विख्यात शख्सियत हैं । वैसे तो पेशे से वे गुजरात की एक युनिवर्सिटी में लेक्चरार है, पर उनकी रुचि साहित्यिक कार्यो में भी काफी हैं । सब कुछ, यहीं कांकरोली राजसमन्द में ही तो है उनका शायद इसलिए ही वे इस शहर को भुला ना पाते हैं। वे श्रंगार रस के एक बेहतरीन कवि हैं । राजसमन्द राजस्थान से गुजरात तक के जीवन का सफर भी उनकी अनवरत रचनाओं को रोक नहीं पाया है ।

नायक का नायिका से मिलन और सावन के मौसम की विशेषताओं को इंगित करती उनकी कुछ कविताएं तो बहुत ही सराहनीय है । एक बहुत ही अच्छे और सुसंस्कृत परिवार में जन्म लेने से इनकी साहित्यिक विधाओं मे रुचि काफी लम्बे समय से है, कहा जा सकता है कि द्धारिकाप्रसाद जी सांचिहर श्रंगार रस के एक बेहतरीन कवि हैं । यही नही उन्होनें राजस्थानी और गुजराती साहित्य को आपस में जोडने के लिए भी अपना काफी अच्छा योगदान दिया है । इनका कविताएं सुनाने का अंदाज काफी निराला है । कविताएं सुनाते वक्त इनके चेहरे की भाव भंगिमाएं श्रोतागणों को उस माहौल में डूबा देती है । कई सारी बेहतरीन रचनाएं इन्होनें की है और काफी सारे पुरस्कार भी ये अपनी साहित्यिक गतिविधियों के कारण प्राप्त कर चुके हैं ।

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