Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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माफी नामा

May 13th, 2007 · 2 टिप्पणीयां · उलझन, नई खबरें

जीवन में काफी सारे ए॓से मोके आते है जब हम किसी अपने को ही कुछ गलत बोल पडते हैं, पर इस बात का एहसास काफी लन्बे समय तक जेहन में रहता है कि क्यों में एसा बोल पडा उस व्यक्ती को । गस्से में सभी एक ही तराजु में तोल दिये जाते हैं चाहे छोटा हो या बडा सही हो या गलत पर कुछ तो है जो हमेशा मन में रहता है व कहता है, कि भई तुने ये काम अच्छा नहीं किया । कोई हमेशा हर बार सही ही हो ये हम केसे बता सकतें है । गलतियां करना इन्सानी स्वभाव है पर कोई अपनी पुरानी गलतियों से कुछ सीखे व उस ही गलती को भविष्य में ना दोहराए, वही तो इन्सान है ।

मुझे इस बात का अफसोस नहीं कि में चुप क्यों रहा ।
बल्कि इस बात का अफसोस है कि में बोल क्युं पडा ।।

किसी महापुरुष द्वारा कही गई ये पक्तियां अक्सर कई बार दिल के किसी कोने में चोट करती है। गुलाम फिल्म के एक गीत “अब नाम महोब्बत के इल्जाम…… सर हमने झुकाया है” का एक दृश्य काफी यादगार बन पडा था – जब हिरो को अपनी गलती का एहसास होता है। हिरो जिसे एक बार बुरी तरह से पीट चुका होता है,  उसके पास बेट या स्टंप (याद नहीं) ले कर जाता है व माफी की मुद्रा में खडा हो जाता है । वह कहना वाहता है कि भाई निकाल ले अपने मन की भडास, अपुन सरन्डर है इधर इच्च । पर सामने वाले व्यक्ती को भी इस बात का एहसास होता है व वह हिरो के कन्धे पर हाथ रखता है, मानों उसने माफ कर दिया है । 

एक या दो दृश्य में कितनी कुशलता से फिल्म का डायरेक्टर वह चीज बता गया, जिसका कोई बन्दा पुरी जिन्दगी इंतजार करता रहता है। में भी चाहता हुं अपने छोटे से जीवन काल में (चाहे वो स्कूल के दिन थे या काम धन्धे की टेन्शन के दिन)  अगर गलती से भी कुछ गलत कृत्य मुझसे हुआ है व जिससे किसी का दिल दुखा है तो में माफी चाहता हूं ।

हम काफी स्वार्थी हो जातें हैं कभी कभी । वेसे जाना तो है ही एक दिन उपर, पर जीवन में अपने द्वारा की गई किसी भी गलत बात, या बुरे कार्य के लिये में आज इस ब्लाग के माध्यम से सबके सामने माफी मांगना चाहता हुं। अब बताओ भी ना कि आपने माफ किया या नहीं । वेसे हमने यह पोस्ट अपने किसी मित्र की पोस्ट से ही प्रेरित हो कर लिखी है। सो वो भी हमें माफ करे । वेसे किसी से प्रेरणा लेना गलत बात नहीं है ।

टैग्सः ···

2 टिप्पणीयां ↓

  • aroonarora

    ठीक है भाई अब हमारे पंगो से भी{ वैसे हम मानते नही है} कि किसी का दिल दुखा होगा (इस मे अगर मगर तगर सब शामिल है)पर फ़िर भी आप की राय मान कर माग लेते है वो ही जो आपने मांगी है अब जो भाई नही देगे वो तैयार रहे पंगे झेलने के लिये
    अब ठीक है भाई अब हमे भी तसस्ली हो गई की हमने भी मांग ळी

  • श्रीश शर्मा

    जिस दिन आप “ईस” को “इस” को लिखना शुरु कर देंगे उस दिन हम आपको माफ कर देंगे। :)

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