Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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चश्में का चक्कर

January 25th, 2007 · 4 टिप्पणीयां · नई खबरें, हास्य

कुछ समय पुर्व हमारे एक पहचान वाले बुजुर्ग व्यक्ति की मृत्यु हो गई । उनके शव को नहला धुला कर शवयात्रा के लिये तैयार किया गया। सब लोग बडे गमगीन माहोल में उनकी शवयात्रा की तैयारियां कर रहे थे । खासतौर पर उनके परिवारजन व पडौसी सचमुच काफी दुखी थे । कई लोग तरह तरह की बातें भी कर रहे थे जैसे – अच्छे आदमी थे, पर वृद्ध भी थे, शरीर ने उनका साथ छौड दिया बाकी वे बडे अच्छे आदमी थे, वगेरह वगेरह।

एक बडी अजीब सी बात हुई उस दौरान जब उनकी शवयात्रा की सारी तेयारियां हो चुकी थी, तो मृतक की पत्नी बाहर आयी व उन्होने आकर अपने मृत पति के चेहरे पर चश्मा लगा दिया ताकी वे और भी ज्यादा अच्छे लगे । फिर थोडी देर में शवयात्रा उनके घर से रवाना हुई । सारा कार्य विधी विधान से सम्पन्न हुआ व अन्त में सब लोग अपने अपने घरों पर गए। काफी दिनों के बाद जब ईस चश्मा पहनाने की घटना का किसी के द्वारा फिर से जिक्र किया गया तब परिवार के ही एक और अन्य बुजु्र्ग व्यक्ती ने कहा कि क्या तुम्हे पता है उनको (मृत व्यक्ती के बारे में) उनकी पत्नी ने आखिरी या्त्रा के दोरान चश्मा क्यों पहनाया ?

कोई भी जवाब नहीं दे पा रहा था, घर में । भला किसे पता था की मृतक को उनकी पत्नी ने शवया्त्रा के दोरान चश्मा क्यों पहनाया ।

स्थिती संभालते हुए उन्होने (बुजु्र्ग व्यक्ती ने) कहा कि, आखिर उन्होनें अपनी आंखों की कमजोरी के कारण जिन्दगी भर चश्मा पहना, तो जाहिर सी बात है कि वे बगेर चश्मे के अपनी पत्नी को पहचानेगें कैसे ? उन्हें चश्मा ईसलिये लगाया गया ताकी वे (मृतक) फिर से ढ़ंढ़ते हुए उनकी पत्नी को पहचान ले व उनके पास आ जाएँ । गम के ईस माहोल में भी परिवार के सदस्य अपनी हंसी को चेहरे पर आने से रोक नहीं पाए ।

एक छोटा सा डिस्क्लेमर –
ईस घटना का किसी से भी, कोई ताल्लुक नहीं हे, सो कोई अपने दिल पर ना ले। घटना चाहे अच्छी हो या बुरी पर कभी कभी उसमें से भी हास्य निकल उठता है। यह सिर्फ एक घटना मात्र है, जो आपके, हमारे, सभी के साथ हो सकती है ।

टैग्सः ······

4 टिप्पणीयां ↓

  • Ravindra Bhartiya

    Aap na batate ki ap logon ko hansi ayi to main adhiktar blogs par ki gayi bhavuk baton ke adhaar par , main bhi bhavuk hone ko taiyaar tha…

  • Dr Prabhat Tandon

    मजेदार !

  • सागर चन्द नाहर

    दुख: में भी हंसी के मौके ढूंढ़ लेना भी जीवन का एक नाम है।
    इस तरह की एक घटना पर एक चुटकुला प्रसिद्ध है जिसमें अपने पिता की अर्थी ले जाते समय एक युवक अर्थी उठाने वालों से कहता है “आप जरा धीरे धीरे चलिये” उन्होने पूछा क्यों?
    तो उस युवक का जवाब था कि मेरे पिताजी को दमें की बीमारी है और जल्दी चलने से उनकी साँस फ़ूल जाती है।

  • admin

    सागर जी !
    बेहतरीन कमेन्ट करते हें आप तो ! सुख दुख तो जिन्दगी में आते जाते रहते हें व अगर ये ना हो तो भला इन्सान सोने से कुन्दन कैसे बनेगा ।

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