Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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मकर संक्रान्ति पर्व

January 14th, 2007 · 1 टिप्पणी · उत्सव एवं त्योहार, राजसमन्द जिला

राजसमंद में भी पुरे देश की भांति मकर संक्रान्ति का यह पावन पर्व बडे ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन ए॓सा पवित्र दिन हे कि ईसी दिन पंजाब में लोहडी, गुजरात में उतराण, केरल में पोंगल के त्योहार मनाए जाते हैं । यह दिन बच्चों के लिये एक खेल व मस्ती का दिन होता है, वहीं घर परिवार के बडे सदस्य इस दिन दान पुण्य आदि करके स्वर्ग में अपनी सीट रिजर्व करने हेतु प्रयास करते हैं । छोटे बच्चे तो इस दिन का जैसे काफी दिनों से ईतंजार ही कर रहे होते हे, दिन उगते ही अपने मिशन पर निकल जाते हैं । कोई बेट, बाल कोई स्टंप ले जा रहा हे, तो कोई फुटबाल, कन्चे, गिल्ली डंडा, सितोलिया, रामदोस्त आदि पारम्परिक खेल खेलने में व्यस्त है । यहां हमारे राजसमंद में तो पहले खेल के मैदान भी छोटे पड जाते थे,  पर आजकल के बच्चे जेसे आउटडोर गेम्स खेलना सीखे ही नहीं, सभी लगे हुए हें कम्प्यूटर या वीडीयो गेम्स पर और या फिर टी.वी. पर ।

अर्थोपाजन हेतु यह दिन भिखारियों का सबसे बडा दिन होता है। लगभग सारे नगरवासी ईस दिन सुबह ईनके नादस्वरों की गुंज से जाग जाते हैं। और उनका यह क्रम शाम ढ़लने तक अनवरत चलता रहता है । भिखारियों के सालाना बजट का एक बहुत बडा हिस्सा ईस दिन ही जेसे उन्हें मिलता है, युं समझिये कि उनके साल भर के पहनने ओढ़ने के वस्त्रों की व्यवस्था एक ही दिन में हो जाती है। तरह तरह की वेषभुशा में आए भिखारियों के झुन्ड के झुन्ड जब किसी गली मोहल्ले से गुजरते हैं, तो छोटे बच्चे व घरों की महिलाएं कोतुहलवश उन्हें देखती हैं । सुबह सुबह ईतनी तादात में आए भिखारियों से माथा पच्ची के डर के कारण तो कई व्यवसायी देर से अपने काम धन्धे पर जाते हैं। तरह तरह के सम्बोधनों  से ये अपने यजमानों को पुकारते हैं जैसे ‍ ‍- ओ आण्टी जी,ओ बहन जी, संकरात का दिन है कुछ तो दान धर्म करो ।

कांकरोली, राजसमन्द तो ठहरी खेल प्रेमीयों की नगरी, कई खेल प्रेमी लोग ए॓से आज भी हैं, जो मकर संक्रान्ति पर्व के दिन अपने सारे काम काज छोड कर दोस्त लोगों से साथ खेलने जाते हैं। कुछ लोग पतंगबाजी में भी रुची लेते हैं व पुरे दिन ईसी पुनीत कार्य में ही व्यस्त रहते हैं । चुंकि हिन्दु धर्म में यह दिन बडा ही पवित्र दिन माना जाता है,  कहा गया है कि मकर संक्रान्ति के दिन किया गया दान पुण्य बहुत ही शुभ होता है। घर परिवार के बडे बुजुर्ग सदस्य ईस दिन अन्न दान, वस्त्र दान, धन का दान आदि करते हैं । पशुओं को जी भर के चारा, घास डाला जाता है। सभी घरों में खास तौर से तिल के व्यजंन, खीच(मक्के व दुध से बनी खीर) आदि बनाए जाते हें।

धन्य है, भारत की परम्पराएं व ए॓से त्योहार जिनमें दान धर्म का विशेष महत्व है । आप सभी को भी मकर संक्रान्ति पर्व की ढ़ेरों शुभकामनाएँ ।

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