Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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राजसमंद का नौ चोकी सन 1910 में कैसा दिखता था !

November 13th, 2010 · प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला

राजसमंद का नौ चोकी सन 1910 मे कैसा रहा होगा ! अब तो नौ चोकी पाल पर गार्डन वगैरह बन चुका है और नगरपालिका वाले काफी अच्छा डेवलप भी कर रहे हैं ! पर मेरे एक अभिन्न मित्र नें मुझे यह फोटो का लिन्क भेजा है और इसलिये यह फोटो यहां भी प्रेषित है ! देखिये यह ब्लेक एंड व्हाईट फोटो कितना अलग सा था, ना यह जगह पहले !

तो देखिये हमारे देश कि आजादी से भी पहले का यह नायाब फोटो जो कि राजसमन्द की ए॓तिहासिक धरोहर पाल को दर्शाता है !

राजसमंद नौ चोकी पाल का फोटो 1910 मेः

nau choki year 1910

Nau Choki 1910

लिन्क साभारः
http://sphotos.ak.fbcdn.net/hphotos-ak-ash2/hs568.ash2/149020_1665984530335_1258926954_31789685_1339968_n.jpg

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राजसमंद में भूकंप के झटके

November 10th, 2010 · आपबीती, नई खबरें

जी हां आज दिनांक 10-11-2010 को सुबह 4.15 पर जब पूरा शहर सुबह की गहरी नींद में सो रहा था, तब अचानक सब कुछ हिलने लगा, जमीन कांपने लगी और यह सब कुछ हुआ बडी तेजी से, लोग पहचान भी नहीं पाये कि यह भूकंप है या कुछ और ! बाद में यह पता चला कि डूंगरपुर, उदयपुर, कांकरोली, पाली आदि कई जिलों में इसी भूकंप के झटके महसूस किये गये थे और यह रिक्टर स्केल पर 4.5 पाईंट तीव्रता का भूकंप था ! अल सुबह पूरे शहर के शहर जाग चुके थे और सभी अपने परिचितों व प्रियजनों के हाल चाल पूछने में लगे थे !

जहां तक मेरा खुद का मानना है कि यह एक तरह से पर्यावरण और प्रकर्ति का बदला है जो वह हम इंसानो से लेना चाहती है ! पेडों की कटाई, अंधाधुंध ट्युबवेल खोदना, मार्बल की माइंसों की खुदाई, वृक्ष ना लगाना और इस तरह के कई सारे कार्य हम लोग करते रूक नहीं रहे हैं ! ए॓सा ही भूकंप लगभग छः सात महिने पहले भी आ चुका है और यदि अब भी सभी लोग नहीं जागे तो कुछ भी हो सकता है !

बडा ही जोरदार अनुभव रहा वह भूकंप के दौरान एक दो मिनट को निकालना, सब कुछ सही हो जाने के बाद भी घंटो तक रह रह कर मन में उसी कि दहशत व्याप्त रही ! कुछ सालों पहले राजस्थान में यह कोई कहता तो लोग उसका मजाक उडाते थे पर आज ए॓सा भी हो रहा है ना जाने कल क्या क्या हो !

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सरदारगढ़ के किले के कुछ फोटो

October 6th, 2010 · कहां ठहरें, प्रमुख दर्शनीय स्थल

सरदारगढ़ का किला अब हेरिटेज होटल में तब्दील हो चुका है ! कांकरोली राजसमंद से आमेट की तरफ मार्ग मे 16-18 किलोमीटर दूर जाने पर आता है लावा सरदारगढ़ । यह एक बहुत विशाल किला है, और थोडी उंचाई पर बना हुआ है इसलिये काफी दूर से ही दिखाई देता है । नाम से ही लगता है कि इसे सरदारसिंह जी ने सन 1738 से 1743 के दौरान बनवाया था ।

यह सरदारगढ़ अब राजसमंद की मुख्य हेरिटेज होटलों में से एक है। यहां लगभग सारी लग्जरी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। तो लिजीये सरदारगढ़ के किले के कुछ फोटो पेश हैः

सरदारगढ़ किले के कुछ फोटोः

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It’s Good To Be Bad

October 5th, 2010 · उलझन

It’s Good To Be Bad

एक नई नई फिल्म अभी रिलिज होने जा रही है उसका पंच लाईन मुझे बडा भाया ! मेरे खयाल से शायद यह लाईन काफी मायनों में एकदम सटीक और सही साबित हो रही है,

क्योंकि में खुद अपने आस पास के जीवन में यह देखता और महसूस करता हुं कि It’s Good To Be Bad. युानी कि बुरा होना कई मायनों में काफी अच्छा है !

बुरे आदमी से कोई पंगे नहीं लेता, साईड से निकल लेता है,क्योंकि सभी जानते हैं कि इससे लडाई करना मतलब अपने लिये आफत खडी करना ! अब अपने नेता लोगों को देखो जो बुरे हें वे नेता है और जो नेता हैं वे बुरे !

आज हर आदमी अपने खुद तक ही सिमित रहना चाहता है और सिर्फ अपने भले कि ही सोचता हैं, जमाना बडा खराब है, आस पास कई बुराईयां है पर सबको सही करने का ठेका किसी व्यक्ति विशेष या आम आदमी ने तो ले नहीं रक्खा है ना, फिर काई कू पंगे लेने का !

  • कुछ उदाहरणः बुरा होना अच्छा है

अपने शहर में ही में देखता हूं कि लोग उन उम्रदराज लोगों कि तारीफ करते हैं जिन्होने अपनी लाठी के जोर पर किसी जमाने में आस पास कि बिलानाम जमीनों पर कब्जे किये, लडाईयां की और आज आबादी के बढ़ने पर उनकी जमीनों के उंचे दाम मिल रहे हैं ! तो वे लोग अच्छे हैं ना जिन्होनें अपने बुरे होने का फायदा अपने आप को और परिवार, समाज आदि को दिया !

बुरा आदमी अस्पतालों, बेंको में अपनी धोंस से जल्दी मिनटों में काम निकलवा लेता है, जब कि आम आदमी लगा रहता है लाईनों में और हर कोई उसको इधर से उधर ठेलता रहता हैं !

मेरे एक करीबी मित्र का भी तजुर्बा है कि जहां किसी सरकारी कार्यालय में अपना काम सिद्ध नहीं हो पा रहा हो तो वहां जाकर हो हल्ला करो, सीधी बडे अधिकारी से बात करो या तमाशा खडा करो, जो भले आदमी होगें वे यही कहेंगे कि भाई हमारा काम तो लेट होगा तो भी चलेगा पर पहले इस आदमी का काम कर दो !

ये तो चंद उदाहरण मात्र है बाकी आप अपने आस पास के ही किसी भी लडाकू पहलवान टाईप के आदमी को देख लो, उसके सारे काम चुटकियों में हल हो जाते हैं और भला मानूष जो होता है, वह जीवन की छोटी मोटी मुसीबतों से भी हार जाता है कि हाय ये कैसी परेशानी सामने आयी ! हकीकत में बुरा भी हर कोई नहीं बन सकता ! किसी के बुरा इंसान बनने के पीछे भूी कोई दिल को छू लेने वाला मर्म हो सकता है ! कोई हथियार क्यों उठाता है, कोई बुरा क्यों बन जाता है ये सोचने वाली बात है, बुराई को अगर मिटाया जाए तो बुरे लोग अपने आप ही नहीं बचेंगें !

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कुभंलगढ़ में लाईट एंड साउंड शो चालू

September 26th, 2010 · नई खबरें

ये बडी ही खुशी की बात है कि कुभंलगढ़ में लाईट एंड साउंड शो चालू आज होने जा रहा है !

मुख्य अतिथी व उद्घाटनकर्ता के रुप में बुलाया गया है पर्यटन मंत्री बीना काक को जो एक फिल्म “मेंने प्यार क्युं किया” में अभिनय भी कर चुकी है ! और गणेश सिंह जी परमार जो कि कुभंलगढ़ एरिया के कद्दावर नेता है वे भी यहां उपस्थित रहेंगे !

लाईट वगेरह तो काफी पहले ही शुरु हो चुकी थी पर साउंड के बिना कुछ खाली खाली सा था पर अब इस किले की शान में कहानीनुमा एक रचना बनायी गई है, जिसे आवाज दी है मशहुर अभिनेता रजा मुराद और रंजीत ने !

अब रोजाना लाईट एंड साउंड शो शाम को चालू होगा जिसे पर्यटक देख सुन कर कुभंलगढ़ के इतिहास के बारे में और भी ज्यादा जान सकेंगे !

Photo Source: http://www.flickr.com/photos/renal/4607056598/

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