Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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नील गगन पर उडते बादल… आ आ आ

August 4th, 2009 · नई खबरें, फिल्म रिव्यु, राजसमन्द जिला

हरियाली का मौसम फिर से आ चुका है । आज सावन के महिने का आखिरी दिन है । राखी का पवित्र त्योहार भी पास है, और ठीक ठाक सी बारिश के बाद भी यहां आस पास के खेत हरे भरे हो चुके है । पेश है एक बहुत ही उम्दा नगमा ” नील गगन पर उडते बादल… आ आ आ” जो है फिल्म खानदान (1965) से । रफी साहब की अभी अभी सभी ने याद किया ही था । यह गीत भी उनके ही बहुत बढ़िया गानों में से एक है, गाने में उनका साथ दिया था आशा भोंसले नें ।

सुनील दत्त साहब और नूतन पर फिल्माया हुआ यह गीत आज के जमाने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है । पहले लोग कितने खुश रहते थे क्योंकि वे प्रकर्ति के इतना नजदीक रहते थे, और आज का समय एकदम से अलग हो चुका है, लोग बस अपनी ही धुन में लगे हुए हैं, क्या कर रहे हैं, कहां जा रहे हैं कुछ पता नहीं । खैर छोडो अपने को क्या ?

इस गाने के बोल इस प्रकार हैं

नील गगन पर उडते बादल… आ आ आ
धूप में जलता खेत हमारा कर दे तु छांया ।

छुपे हुए ओ चन्चल पंछी ….जा जा जा
देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा ।

तो आनंद लिजीये इस बेहद ही अनोखे गाने का, सोचिए कैसे थे वे कलाकार लोग, जो सालों पहले हमें हरियाली से नाता जोडे रखने का संदेश दे गए ।

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किताबें पढ़ना एक अच्छी आदत

July 7th, 2009 · शख्सियत

किताबें पढ़ना एक बहुत ही अच्छी आदत है । इस संसार में जो बडे बडे व्यक्तित्व हुए हें, वे सभी बहुत पढ़ते थे । कोई धार्मिक ग्रंथ, तो कोई अपने विषय की पुस्तके, तो कोई रोजाना के समाचार, पढ़ते तो सभी लोग थे ही । सोचो यदि कोई शख्स बचपन से ही किसी मित्र को तोहफे के रुप में यह अच्छी आदत दे दे तो क्या हो सकता है । अच्छी पुस्तके किसी व्यक्ती के लिए बहुत बडी मददगार मित्र होती हैं वहीं गलत पुस्तके विनाश की ओर भी ले कर जाती है ।

सालों पहले कांकरोली से ही एक छोटी सी सात साल की लडकी रिंकू नें अपनी छः वर्षिय मित्र पुर्णिमा कुलातू को यह पुस्तकें पढ़ने की आदत डाल कर, एक अनमोल तोहफा दिया था । वह अनमोल तोहफा जो वे आज भी भुल ना पायी हैं । पुर्णिमा सालों बाद आज एक मां लगभग छः वर्षिय बच्चे की मां है, वे अपनी बचपन की अभिन्न मित्र रिंकू को नहीं भुली हैं । और कुछ इसी प्रकार का तोहफा वे अपने बच्चे को दे रही हैं, उसे अच्छी पुस्तके पढ़ने की आदत डालना सिखा रहीं है ।

इसी विषय में आप सभी को टाइम्स आफ इंडिया के वेब एडिशन पर एक बहुत ही रोचक लेख दिखाना चाहता हूं जो स्वयं पुर्णिमा जी ने लिखा है, टाइम्स आफ इंडिया के सोल करी कालम पर ।
LInk To That Articls

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कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

June 25th, 2009 · इतिहास के पन्नो से

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती :

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है ।

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है ।

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है ।

मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में ।

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो ।

जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम ।

कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती !
:- “निराला”

जाने क्यों मुझे बचपन में पढ़ी हुई यह “निराला” जी द्वारा रचित कविता बार बार कुछ नया करने को प्रेरित करती है, कुछ करने के बाद रुकना नहीं , सिर्फ और सिर्फ मेहनत करते जाओ, बस यह कहती है !

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चुनाव का मौसम फिर से

May 6th, 2009 · उलझन, नई खबरें, राजसमन्द जिला

लिजीये फिर से चुनाव आ गए हैं । राजसमंद में भी बडी दो मुख्य पार्टीयों नें अपने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारें हैं । राजसमंद का भी अब चुनाव की नजर से एरिया काफी बडा हो चुका हैं, और अब इस कारण ही दुसरे तरफ के मतदाता भी अब यहां से खडे होने वाले प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे । पहले हैं जनता पार्टि से रासासिंह रावत और दूसरे कांग्रेस से गोपालसिंह शेखावत । अब देखना हैं कि जीतता कौन है ? यहां के लोगो नें दोनो ही बडी पार्टियों के इन प्रत्याशियों के नाम तक नहीं सुने थे अब तक तो पर देखना है कि विजयश्री किसके माथे पर तिलक करती हे ।

देखने वाली बात यह है कि जहां रासासिंह रावत पुराने व जमे हुए नेता हैं तो दुसरी तरफ गोपालसिंह जी नए चेहरे हैं । चुनाव सही तरीके से सम्पन्न हो एसा सारे इंतजामात कर लिए गए हें । हर आदमी खाता तो है अपने घर की अपने हाथ से कमायी हुई रोटी पर, एक बात है कुछ भी हो इस बार का चुनाव होगा बडा ही मजेदार, परिणाम चौकाने वाले होंगे । पर अपनी तो एक अपील है कि हर व्यक्ती को जात पांत, समाज से उपर उठकर अपनी नजर में समझदार नेता को चुनते हुए वोट जरुर करना चाहिए । चाहे गर्मी तेज हो, वोट देने के लिए लाइन में लगना पडे, या कुछ और भी हो पर वोट करना ही है । एक एक वोट का भी महत्व है । याद है ना हमारे यहां के कद्दावर नैता भी एक बार एक वोट से हारे थे ।

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शादी के सपने

April 20th, 2009 · उलझन, नई खबरें, हास्य

आमतौर पर हर व्यक्ती की शादी जीवन में एक बार ही होती है । लोग यह कहते हैं कि शादी एक एसा लड्डु है जो खाये वो पछताए और जो ना खाये वो भी पछताए । तो कुछ शादी को एक बर्बादी कहते हैं । कोई शादी के सपने देखता है, तो कोई शादी से घबराता है । शादी हर समाज, हर वर्ग के तबको में होती है और हर कोई इस अनूठे मौके पर आनंद उठाना चाहता है, कोई खाना खाने का तो कोई चुहलबाजी का, और सबसे ज्यादा मजा आता है शादी में दूल्हे या दुलहन को जो की शादी रुपी नाटक का मुख्य किरदार होता है, अब पुरी कहानी मुख्य किरदार के आगे पीछे घुमती है । हिन्दुओ में शादी का बहुत ज्यादा ही मह्त्व है और इस दौरान कई सारे रीती रिवाज रस्में होती हैं जिन्हें पूरा किया जाता है, सगाई, बिन्दोली, महिला संगीत या फिर बारात ।

शादी में हर कोई दुल्हे या दुलहन को लाड लडाता है, कोई लिफाफे, मनपसंद गिफ्ट तो कोई कपडे, गहने आदि देता है । नख से लेकर शिख तक का श्रंगार करवाया जाता है, गीत जाये जाते हैं और ना जाने क्या क्या । कुल मिला कर ये एक तरह का एसा उत्सव होता है जिसमें हर कोई दुल्हे या दुलहन को ज्यादा से ज्यादा खुशियां देना चाहते हैं । तो दुनिया भर के दुल्हे दुलहनों एक हो जाओ और शादी के अधिक से अधिक मजे या आनंद लो क्यो कि एक बार यह सुनहरा समय निकल गया तो कोई पूछने वाला भी नहीं मिलेगा । मजे लो शादी के, ये वक्त [Read more →]

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