Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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भंवर म्हाने पूजन द्य्यो गणगौर

April 13th, 2008 · उत्सव एवं त्योहार, कला एवं शिल्प, नई खबरें, राजसमन्द जिला

राजस्थान में वेसे तो गणगौर का त्योहार खास महत्व रखता है ही पर, हमारे राजसमन्द जिले के कांकरोली में भी इस गणगौर के त्योहार पर लोगों का हर्षोल्लास चरम पर दिखाई पडता है । पिछले कई सालों से यहां गणगौर धूमधाम से मनाई जाती है, इस सब की शुरुआत हुई थी काफी सालों पहले शहर के ही कुछ उत्साही नवयुवकों के एक समूह जनतामंचसे । बहुत पहले ये सब रस्म को पारम्परिक तौर पर किया जाता था । पर बाद में धीरे धीरे युवकों के उत्साह से लोगों का शौक परवान चढ़ा और फिर एक समय एसा भी आया की नगरपालिका ‌और प्रशासन भी इस गणगौर की शोभायत्रा व मेले में उत्साह दिखाने लगी ।

हर साल गणगौर की सवारी निकाली जाती है जो लगभर चार पांच किलोमीटर तक लम्बी होती है व सब कुछ कार्यक्रम भी काफी भव्यता के साथ होते हैं । शोभायात्रा में भंवर म्हाने पूजन द्य्यो गणगौरका यह गीत तो जैसे चार चांद लगा देता है । काफी सारे तामझाम और भव्यता के साथ सुसज्जित हाथी, घोडे, उंट, झांकिया, कच्छी घोडी नर्तक, बेंड बाजे, भगवान द्वारिकाधीश की छवि और मंदिर के छडीदार, मशाल लिए हुए घुडसवार, सेवरा ले कर जाती स्कूली लडकियां आदि इस गणगौर की सवारी या शोभायात्रा में प्रदर्शन करते हैं । शोभायात्रा के पीछे की तरफ नगरपालिका की बडी बडी हस्तियां जेसे पार्षदगण, नेता एवं प्रभुत्वशाली लोग चलते हैं ।

यह शोभायात्रा भगवान द्वारिकाधीश के मंदिर से शुरु होती हुई मुख्य मार्गों से हो कर स्कूल मैदान पर पहुंचती है जो कि मेला स्थल होता है । [Read more →]

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मांगन ते मरना भला मत कोई मांगो भीख

April 10th, 2008 · उलझन, हास्य

लगता है कि भीख मांगना भारत में सबसे आसान धंधा है । किसी भी साधारण स्वस्थ सा दिखने वाले व्यक्ती को सिर्फ माथे पर साफानुमा कपडा बांधने और धोती कुर्ता पहनते ही जेसे भीख मांगने का लाईसेंस मिल जाता है । अब कोई भीखारी हरे रंग के वस्त्रों का प्रयोग करे या केसरिया रंग का आखिर वह खेल तो रहा ही होता है हमारी आस्था के साथ ही । धर्म के नाम पर हम सभी रोजाना कितने बेवकूफ बन रहे हैं ।

विश्वास नहीं आता तो अपने शहर में किसी भी दुकान पर जा कर बैठिये कुछ मिनट और देखिये की कितने कम समय में तरह तरह के अलग भेस बनाए भीखारी आ जा रहे होते हैं । जगह जगह भीखारी और भीख का यह धन्धा जेसे इन लोगों के लिए खेल बन चुका है । कोई लाचार या अपंग व्यक्ती अगर कुछ मांग रहा है तो ठीक है पर हट्टे कट्टे और स्वस्थ से दिखने वाले लोग जब भीख मांगते नजर आते हैं तो बडा बुरा लगता है । [Read more →]

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फतेह लाल “अनौखा”

April 10th, 2008 · राजसमन्द जिला, शख्सियत

फतेह लाल जी “अनौखा” एक बहुत ही ख्यातनाम कवि हैं, कांकरोली राजसमन्द के। वेसे तो पेशे से ये अध्यापक हैं पर कविताएं बडी ही सुन्दर कविताएं, कहानियां और साहित्यादि लिखते हैं । स्वभाव से फतेह लाल जी बडे ही गंभीर और शांतचित्त हैं पर उनका लेखन कार्य वाकई में अनौखा है शायद इसलिए ही उन्हे ये उपाधि मिली है ।

प्रकृतिप्रेमी होने के साथ साथ ही ये राजसमन्द के रोचक इतिहास के भी अच्छे जानकार हैं । कई सारे अलंकरणों से अब तक इन्हें बहुत से मंचो पर सम्मानित किया जा चुका है । फतेह लाल “अनौखा” जी का कविताएं सुनाने का ढ़ंग भी बडा अलग सा है, कभी मौका पडे तो सुनियेगा जरुर इनकी “छोटी पर बेहद प्रभावी” कविताएं।

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किशन जी खत्री “कबीरा”

April 5th, 2008 · राजसमन्द जिला, शख्सियत

किशन जी खत्री राजसमन्द के जाने माने कवि हैं । चाहे स्थानिय कवि सम्मेलन हो या फिर कोई भी छोटी मोटी साहित्यिक गोष्ठी, इनके बिना कविता सुनने वाले श्रोताओं को कुछ अधुरा सा लगता है । पेशे से किशन कबीरा चिकित्सकीय कार्यों (आर. के. राजकीय चिकित्सालय) से जुडे हुए हैं । “कबीरा” उपनाम से ही कोई भी कवि प्रेमी जान सकता है, कि इनकी रचनाएं छोटी पर एकदम सटीक होती हैं, और ये मानो गागर में सागर का सा काम करती है। देश और समाज के कई सारे विषयों पर कबीरा जी ने अपनी लेखनी से नित नए प्रयोग किये हैं ।

कबीरा जी साहित्यिक गतिविधियों में सालों से सक्रिय रुप से जुडे हुए हैं । कवि समम्मेलन हो या फिर इस तरह का कोई भी मौका, ये आपको वहां दिखाई पडेंगें फिर आप अगले कवि सम्मेलन में आ रहे हैं ना इनके ध्यानमग्न कर देने वाले काव्यपाठ को सुनने के लिए …….

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भगवान सब देख रहा है !

April 4th, 2008 · नई खबरें, राजसमन्द जिला

पिछले दो तीन दिन से अप्रेल के महिने में बेमौसम की जोरदार बारिश और धूल भरी आंधीयों से यह तो साबित हो ही गया है कि भगवान सब देख रहा है ! कुछ तीन चार महिने पहले कि बात ही थी कि राजसमन्द के आस पास के गांव वाले किसान वगेरह लोगों ने सिंचाई हेतु उचित पानी दिये जाने के बावजुद भी एक और पाणेत (सिंचाई) की मांग की थी । और नगरपालिका प्रशासन के ना मानने ले बावजूद किसान लोगों के द्वारा हाथों में गेंती, फावडे, कूंट, लट्ठ आदि हथियारों सहित शहर को बन्द करवाने का आव्हान किया गया था । शहर बन्द करवाया भी गया, और लडाईयां भी हुई ।

प्रशासन व राजसमन्द के स्थानिय निवासियों के सामने उनका विद्रोह सिर्फ पानी के लिए था, वहीं पर राजसमन्द के स्थानिय निवासी यह चाहते थे कि उचित पानी झील में ही रहे ताकि झील का सौन्दर्य बना रहे साथ ही स्थानिय पानी कि आपुर्ती में भी व्यवधान ना हो पर …..

अब उन लोगों की फसल पक कर एकदम तैयार खडी थी, बस कटाई ही बाकी थी कि उपर वाले ने भी एसा चक्कर चलाया कि उन लोगों को रुपये की अठ्न्नी भी नहीं मिल पा रही है । इसी लिये कहते हैं कि [Read more →]

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