Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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हार्न ओ. के. प्लीज

April 16th, 2008 · आपबीती, उलझन, नई खबरें, हास्य

टाईटल पढ़ते ही चौंक गए ना ! आप सों रहे होगें की फिर से कोई ट्रक या बस से सबंधित बात होगी पर एसा नहीं है । अक्सर ट्रकों के पीछे लिखे ये टाईटल हार्न ओ. के. प्लीज सभी को याद आते हैं । आज शाम को स्कूटर से चक्की तक जाते जाते कुछ घटना ही एसी घटित हुई की इस पर कुछ लेखनी घिसने का मानस बन ही गया । यूं तो हम हैं एक नम्बर के आलसी राम, तो इस हिसाब से अब तक जिन्दगी में गिनती की बार गेहूं को पिसवाने के लिए आटा चक्की पर ले गए होंगे, पर क्या है कि मुसिबत कह कर नहीं आती तो हमें भी जाना पडा ।

तो साहब हम नहा धो कर आए ही थे और चक्की पर जाना पडा, इस बात से पहले ही टेंशन हो रही थी पर हमने गेहूं के कट्टे को स्कूटर के आगे रखा और स्टार्ट किया । मुश्किल से पांच मीटर की दूरी भी तय नहीं कि थी कि कोई सामने आ गया । थोडा रास्ता जाम हो गया अब कोई दूसरे लोग भी किसी के निकलने का दो पल इंतजार कर रहे हैं तो अपने को भी रूकना पडा, सडक पर पेर टिकाया ही था कि पीछे से पता नहीं कौन कम्बख्त (शायद कोई रईस जादा रहा होगा ) अपनी नई मोटरसाईकिल ले कर आ गया उसे शायद थोडी जल्दी थी । सडक संकरी थी और आस पास से कट मार कर निकलने की भी जगह नहीं थी । तो वह अपनी मोटरसाईकिल के अजीब के टाईप हार्न को बजाने लगा । बजाया ही क्या जी बार बार बजाने लगा । मेनें गुस्से में घूरते हुए पीछे मुड कर देखा एक लडका था । एक दम लेटेस्ट कपडे पहने [Read more →]

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अरुणकांत जी “उस्ताद”

April 14th, 2008 · राजसमन्द जिला, शख्सियत

अरुणकांत जी उस्ताद कांकरोली राजसमन्द के जाने माने व्यक्ती है । छोटाकद, भरा भरा सा शरीर, ओजपुर्ण वाणी और चेहरे पर एक अलग सा, अनोखा सा आत्मविश्वास, दूर से ही कोई देखे तो एक ही नजर में जान सकता है कि उस्ताद जी आ रहें हैं । शहर के छोटे बडे सभी लोग आदर के साथ इनके चरणस्पर्श करते हैं ।

अरुणकांत जी वीर रस के कवि हैं और ओजपुर्ण कविताएं सुनाने का इनका अंदाज भी काफी दर्शनीय होता है, कुछ एसा अंदाज कि मुर्दे भी जोश में आ कर एक बार खडा हो जाए, फिर आपके हमारे जैसे लोगों की बिसात ही क्या है। ये ना केवल अव्छे कवि हैं बल्कि एक बहुत ही अच्छे शिक्षक, अनुभवी ज्योतिषी और अखाडे के दांव पेचों के गहन जानकार “उस्ताद” भी हैं । शायद इसलिए ही इन्हें सभी लोग आदर से उस्ताद के नाम से पुकारते हैं ।

अरुनकांत जी उस्ताद ज्योतिष के भी काफी अच्छे जानकार हैं और लोग काफी दूर दूर से इनके पास आते हैं । जिला एवं राज्य स्तर पर इन्हें काफी सारे पुरस्कारों से अब तक नवाजा जा चुका है । गुरुपूर्णिमा का दिन हो या फिर कोई भी साहित्यिक कवि सम्मेलन हो, इनकी उपस्थिति हमेशा वहां रहती ही है।

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भंवर म्हाने पूजन द्य्यो गणगौर

April 13th, 2008 · उत्सव एवं त्योहार, कला एवं शिल्प, नई खबरें, राजसमन्द जिला

राजस्थान में वेसे तो गणगौर का त्योहार खास महत्व रखता है ही पर, हमारे राजसमन्द जिले के कांकरोली में भी इस गणगौर के त्योहार पर लोगों का हर्षोल्लास चरम पर दिखाई पडता है । पिछले कई सालों से यहां गणगौर धूमधाम से मनाई जाती है, इस सब की शुरुआत हुई थी काफी सालों पहले शहर के ही कुछ उत्साही नवयुवकों के एक समूह जनतामंचसे । बहुत पहले ये सब रस्म को पारम्परिक तौर पर किया जाता था । पर बाद में धीरे धीरे युवकों के उत्साह से लोगों का शौक परवान चढ़ा और फिर एक समय एसा भी आया की नगरपालिका ‌और प्रशासन भी इस गणगौर की शोभायत्रा व मेले में उत्साह दिखाने लगी ।

हर साल गणगौर की सवारी निकाली जाती है जो लगभर चार पांच किलोमीटर तक लम्बी होती है व सब कुछ कार्यक्रम भी काफी भव्यता के साथ होते हैं । शोभायात्रा में भंवर म्हाने पूजन द्य्यो गणगौरका यह गीत तो जैसे चार चांद लगा देता है । काफी सारे तामझाम और भव्यता के साथ सुसज्जित हाथी, घोडे, उंट, झांकिया, कच्छी घोडी नर्तक, बेंड बाजे, भगवान द्वारिकाधीश की छवि और मंदिर के छडीदार, मशाल लिए हुए घुडसवार, सेवरा ले कर जाती स्कूली लडकियां आदि इस गणगौर की सवारी या शोभायात्रा में प्रदर्शन करते हैं । शोभायात्रा के पीछे की तरफ नगरपालिका की बडी बडी हस्तियां जेसे पार्षदगण, नेता एवं प्रभुत्वशाली लोग चलते हैं ।

यह शोभायात्रा भगवान द्वारिकाधीश के मंदिर से शुरु होती हुई मुख्य मार्गों से हो कर स्कूल मैदान पर पहुंचती है जो कि मेला स्थल होता है । [Read more →]

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मांगन ते मरना भला मत कोई मांगो भीख

April 10th, 2008 · उलझन, हास्य

लगता है कि भीख मांगना भारत में सबसे आसान धंधा है । किसी भी साधारण स्वस्थ सा दिखने वाले व्यक्ती को सिर्फ माथे पर साफानुमा कपडा बांधने और धोती कुर्ता पहनते ही जेसे भीख मांगने का लाईसेंस मिल जाता है । अब कोई भीखारी हरे रंग के वस्त्रों का प्रयोग करे या केसरिया रंग का आखिर वह खेल तो रहा ही होता है हमारी आस्था के साथ ही । धर्म के नाम पर हम सभी रोजाना कितने बेवकूफ बन रहे हैं ।

विश्वास नहीं आता तो अपने शहर में किसी भी दुकान पर जा कर बैठिये कुछ मिनट और देखिये की कितने कम समय में तरह तरह के अलग भेस बनाए भीखारी आ जा रहे होते हैं । जगह जगह भीखारी और भीख का यह धन्धा जेसे इन लोगों के लिए खेल बन चुका है । कोई लाचार या अपंग व्यक्ती अगर कुछ मांग रहा है तो ठीक है पर हट्टे कट्टे और स्वस्थ से दिखने वाले लोग जब भीख मांगते नजर आते हैं तो बडा बुरा लगता है । [Read more →]

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फतेह लाल “अनौखा”

April 10th, 2008 · राजसमन्द जिला, शख्सियत

फतेह लाल जी “अनौखा” एक बहुत ही ख्यातनाम कवि हैं, कांकरोली राजसमन्द के। वेसे तो पेशे से ये अध्यापक हैं पर कविताएं बडी ही सुन्दर कविताएं, कहानियां और साहित्यादि लिखते हैं । स्वभाव से फतेह लाल जी बडे ही गंभीर और शांतचित्त हैं पर उनका लेखन कार्य वाकई में अनौखा है शायद इसलिए ही उन्हे ये उपाधि मिली है ।

प्रकृतिप्रेमी होने के साथ साथ ही ये राजसमन्द के रोचक इतिहास के भी अच्छे जानकार हैं । कई सारे अलंकरणों से अब तक इन्हें बहुत से मंचो पर सम्मानित किया जा चुका है । फतेह लाल “अनौखा” जी का कविताएं सुनाने का ढ़ंग भी बडा अलग सा है, कभी मौका पडे तो सुनियेगा जरुर इनकी “छोटी पर बेहद प्रभावी” कविताएं।

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