Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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मोबाइल मेनिया

March 21st, 2008 · उलझन, तकनिकी

गांव गांव शहर शहर में मोबाइल क्या हुए आफत हो गई हमारे जैसे लोगों के लिए तो । शांति से कोई जीने नहीं दे रहा है, और जहां देखो वहां कोई ना कोई जान का दुश्मन जोर जोर सेः हेलो, हेलो आवाज नहीं आ रही है, जरा तेज बोलो,, कह कर परेशान किये जा रहा है और अपने राम जी के सब्र का इम्तिहान लिए जा रहा है ।

ये सब किया इन गुजराती बंधुओं का है जिन्होने 500 – 500 रपये में लोगो को मोबाइल फोन पकडा दिए, अब ठेले वाला हो या करोडपति इस मोबाइल के मामले में सब एक ही श्रेणी में आ गए । इस पर से बाजार में हर कंपनी के प्रतिदिन नए नए मोबाइल उपकरण आ रहे, लोग काम काम रहे है और फालतु की बातें ज्यादा कर रहे हैं । तेज आवाज वाली व उलजुलुल रिंगटोन्स का प्रचलन इतना हो गया है कि किसी शोक सभा या सत्संग में बैठे हुए लोगों के बीच जब तेज आवाज में लोगों की तन्द्रा भंग करती हुई जलक दिखला जाया कुत्ते की भों भोंवाली रिंगटोन बज उठती है [Read more →]

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15 बातें जो मुझे कतई पसंद नहीं

March 13th, 2008 · आपबीती, उलझन

हर किसी व्यक्ती की कुछ पसंद तो कुछ नापसंद होती है, हमारी भी है कुछ एसी ही, कुछ लोग गलत समय पर गलत बात कर बैठते है, पर उमर व अनुभव में हम छोटे हे और छोटे का कुछ नहीं हो सकता । इस तरह की ही कुछ बातें हैं जो हमें बिलकुल भी पसंद नहीं है । अतिशीघ्र इस लिस्ट में बहुत सारी और भी बाते जुडने वाली है जो हमे अटपटी सी लगती है । 15 बातें जो मुझे कतई पसंद नहीं …..

1. तुम कितना कमा लेते हो ?

2. और आपके पास क्या क्या है मसलन जमीन, जायदाद, पैसा या कुछ और ?

3. ये काम धंधा तो ठीक है, पर भविष्य में और, आपके क्या क्या प्लान्स है ?

4. अरे खुल्ले देना, अरे केंची है क्या, चाकु है, पेचकस है क्या, टेप है क्या चिपकाने वाली ?

5. आपके खाते किस किस बेंक में हैं ?

6. तुम शादी कब कर रहे हो ?

7. ईमानदारी से बताओ तुम्हे कौन कौन सी सब्जीयां भाती है ?

8. तुम और कुछ शुरु क्यो नहीं करते ?

9. तुम किसी बात को समझते क्यों नही ?

10. तुम ये मोटरसाइकिल, मोबाईल फोन अब बदल क्यों नहीं डालते ?

11. तुम्हारी कोई गर्लफफ्रेंड क्यों नहीं है ?

12. तुम्हें बाहर आना जाना, लोगो के बीच उठना बैठना पसंद क्यो नहीं है ?

13. ये यहां के कायदे हैं और इनको हमें मानना ही पडेगा !

14. सत्संग में क्यो नहीं आते ये बुरा थोडी है । 15. भगवान को मानोगे तो क्या तुम घिस जाओगे ।

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भौतिकवादी युग औ‌र हम

February 23rd, 2008 · उलझन

कई बार हमारे जेहन में यह सवाल आता है कि, क्या थप्पड मार कर गाल को लाल रखना और लोगों को दिखाना अच्छी बात है ? कई लोग शायद यह आज की आम जिन्दगी में सही समझते होंगे पर हमें तो यह ठीक नहीं लगता । बडे लोग कह गए हैं कि उतने ही पांव पसारिये जितनी लम्बी आपकी रजाई है । पर आजकल का युग तो भौतिकवादी युग है, हर किसी को नई टी.वी., कार, क्रेडिट कार्ड, मोटरसाईकिल व बाजार में बिक रहे महंगे से महंगे उत्पाद चाहिए । हर कोई चाहता है कि जिस वस्तु का बुद्धुबक्से में एड आता है, वह तो घर पर होनी ही चाहिए ।

पर क्या एसा कर के हम खुद के साथ कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं । दिन भर की मेहनत से चंद रुपये कमाने वाला व्यक्ती भी अपने परिवारजनों के सामने आ कर हार जाता है, और मजबुरन जिन्दगी में कुछ ए॓से गलत कदम उठा लेता है कि जिनका पछतावा उसे हमेशा खलता है

क्या महंगे कपडे, गहने, नए इलेक्ट्रिनिक्स, मोटरसाईकिल या कार किसी व्यक्ती को हमेशा का सुकुन प्रदान कर सकते हैं, नहीं । पर फिर भी जिसे देखो उन्हीं के पीछे भागता है । लोग होडाहोडी में अपने घुटने तुडवा रहे हैं । पर दुनिया भी अजीब चीज है हमेशा, उगते हुए सुरज को सलाम ठिकती है । कुछ लोग बहुत ही अतिउत्साही हो चुके है, जिन्हें जीवन में चांद तारे भी तोड कर के लाने हैं, पर अफसोस आज के जमाने में सबसे कठीन काम है तो वह है लून लकडी का जुगाड करना । ए॓से में कुछ लोग जो नाकामयाब होते हैं वे अपनी इहलीला भी समाप्त करने से बाज नहीं आते पर इससे होता क्या है, वह अपने ही परिवारजन व दुसरे लोगों को दुखी कर के चला जाता है । [Read more →]

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नए साल के नए फन्डे

January 5th, 2008 · उलझन, हास्य

फिर से नया साल आ गया है ! सभी लोगो अपने अपने नए टारगेट बनाते हैं, अपने आप से वादा करते हैं कि में इस साल ये करुंगा ये नहीं करुंगा। पर शायद ही उनमें से कुछ लोग अपने प्लान के हिसाब से पुरे साल चल पाते होंगे । इन्सान है ना कुछ भी चीज से जल्दी उब जाता है । मान लो सुबह जल्दी उठ कर बगीचे में सेर करने जाने का ही निर्णय अगर कोई लेता है तो पहले दिन क्या होता है महाशय उठ जाते हैं, तैयार होते ही सेर पर निकल पडते है, दो चार दिन में ही बाजार से ट्रेक सूट, जुते मोझे और पता नहीं क्या क्या तामझाम घर आ जाते है । पर कुछ दिन बाद ही सुबह का घडी का अलार्म कडवा लगने लगता है लगता है कि आज ना जाएं तो क्या होगा । कल से रेगुरल जाउंगा । पर क्या है कि एक भी दिन छूटा तो सुरक्षा चक्र टुटा । फिर जाना बंद हो जाता है, धीरे धीरे हम यह सोचने लगते है कि क्योंकि स्वस्थ शरीर के लिए पुरी नींद की भी भरपूर आवश्यकता होती है इसलिए पहले नींद पुरी लो, फिर दुसरे सारे काम ।

अमिताभ बच्चन साहब एक फिल्म में डायलोग मारते है कि कोशिशे कामयाब होती हैं और वादे अक्सर टूट जाया करते हैं । कोशिश करते रहने कि यह सोच कब तक अनवरत जारी रहती है । बहुत कुछ करना है पर कब, आपसे, मुझसे कब तक ये सारे वादे निभ पाते हैं, अब बस यह देखना है ।

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कितना जानते हैं, आप अपने राजसमन्द जिले को ?

December 21st, 2007 · मार्बल व्यवसाय, राजसमन्द जिला

जी हां । राजस्थान के राजसमन्द जिले से जुडी कुछ बहुत ही रोचक बातें जो शायद यहां के रहने वाले निवासी लोग भी नहीं जानते होंगे । पेश ए खिदमत है कुछ इस तरह की ही रोचक जानकारी …….

यह जिला अपनी मीठे पानी की राजसमन्द झील के लिये प्रसिद्ध है जो कि पुरे एशिया में दुसरे स्थान पर आती है।

मेवाड के चारधाम कहे जाने वाले दर्शनीय मंदिरों में से नाथद्धारा का श्रीनाथ जी मंदिर, कांकरोली का द्धारिकाधीश मंदिर और गढ़बोर चारभुजा का मंदिर तीनों राजसमन्द जिले में ही आते है ।

यहां के जिला कलेक्ट्रेट परिसर का निर्माण जयपुर के कलेक्ट्रेट परिसर के जैसा ही है ।

अजेय दुर्ग कुंभलगढ़ भी राजसमन्द जिले में ही आता है यह महाराणा प्रताप की जन्मस्थली के रुप में प्रसिद्ध है, और इस किले की दीवार को दुनिया में चीन की दीवार के बाद दुसरी सबसे लम्बी दीवार के लिये जाना जाता है । यह भी माना गया है कि इस दीवार को चांद से भी स्पस्ट रुप से देखा गया है ।

अपने प्रसिद्ध ‌और अनूठे मार्बल के व्यापार के कारण यह जिला प्रदेश में सर्वाधिक रायल्टी देने वाला जिला बन चुका है ।

वह दो बातें जिनके लिये राजसमन्द का नाम गिनिज बुक आफ रिकार्ड में दर्ज हैः

पहलाः यहां राजसमन्द झील के किनारे नौचोकी पाल पर, सफेद संगमरमर के पथ्थरों पर खुदाई से विश्व का प्राचीन व सबसे बडा संस्कृत का महाकाव्य लिखा गया था, जो कि “राजप्रशस्ति महाकाव्यम” के नाम से जाना जाता है। इस हेतु यह अपना स्थान गिनिज बुक में दर्ज करा चुका है।

दूसराः यहां स्थित आर. के. मार्बल एवं माइन्स विश्व का सबसे बडा मार्बल प्रोसेसर व निर्यातक है, और इस कारण यह अपना स्थान गिनिज बुक आफ रिकार्ड में दर्ज करा चुका है।

स्थापत्य कला, संगीत, खेल, राजनिति या फिर संस्कृति के बारे में, यह स्थान अपने आप में एक अलग जगह रखता है । यह तो कुछ भी नहीं है, सिर्फ अंश मात्र है ! यहां के जर्रे जर्रे में, हर बात में कुछ ना कुछ जुदा है । एसा खास की शब्दों में बयां करना बहुत ही मुश्किल है ।

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