Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

Rajsamand District, Rajasthan header image 1

लो जी फिर से आ गए गरबे

October 1st, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, उलझन, नई खबरें

गरबा नृत्य एक विशेष तरह का नृत्य है जो कि आजकल प्रसिद्धि की उंचाईयों को छू रहा है, वेसे तो इसकी शुरुआत गुजरात से चालू हुई पर शने शने इसने पुरे भारत को कवर कर लिया । चंदे के पैसों से ही सही पर हर कोई अपने मोहल्ले के चोराहे पर गरबे होते देखना चाहता है । शुरुआत होती है मोहल्ले से ही

हर बच्चा कुछ अलग दिखना चाहता है गरबे की प्रतियोगिता में
, कोई भिन्न भिन्न तरीके के उछलकूद कर के डांस करता है तो कोई झुक झुक कर के । अब इसमें फेंसी ड्रेस प्रतियोगिता का भी समावेश कर लिया गया है हर दो तीन दिन में फेंसी ड्रेस प्रतियोगिता होती है गरबों के दौरान ईसमें सेंकडो नौकरी पेशा लोगों की मेहनत की कमाई बच्चों को खुश करने के नाम पर व्यर्थ खर्च हो जाती है ।

लडका हो या लडकी उसे तो नो दिन के लिये नो नई ड्रेसें चाहिये, साथ ही उनके लिये मेंचिंग के डांडीया, जूते, ज्वेलरी, दुपट्टे और ना जाने क्या क्या चाहिए, महंगे क्लब के पास या टिकट भी चाहिए जहां डांडिया का लुत्फ लिया जा सके, गाडी में पेट्रोल, मोबाईल में रिचार्ज और पर्स में थोडे एक्स्ट्रा पैसे भी चाहिए । और यदि बच्चे को फेंसी ड्रेस प्रतियोगिता भी अटेंड करनी हो तो कुछ एसा चाहिये जो किसी के पास ना हो । अब ये सारी नायाब चीजें व सुविधाएं ईकठ्ठा करने में तो साधारण घर परिवार वाले का दम निकल जाता है ।

हमारे एक परम मित्र ने अभी अभी एक शाम को आपसी परिचर्चा के दौरान बताया कि अब वो दिन दूर नही जब गणपति बप्पा के साथ ही गरबे चालू हो जाएंगे और दिवाली तक लगातार चलते ही जाएगें । यह सुन कर थोडी हंसी आई पर पता नही क्यों मन आशंकित हो उठा

→ अब तक कोई टिप्पणीं नहींटैग्सः ·····

मिमिक्री कलाकारों की धूम

September 23rd, 2007 · उलझन, फिल्म रिव्यु

तो जनाब आईये कुछ बातें करते हैं स्टाइल के बारे में । आजकल बुद्धुबक्से में अलग अलग कार्यक्रम में आने वाले नकलची बन्दरो की तरह के मिमिक्री कलाकारों की बडी धूम है । जिसे देखो वही घिसे पिटे चुटकलों पर हंसने हंसाने की बात ही कर रहा है । टी.वी. पर कोई मिमिक्री कलाकार लडकियों या महिलाओं के कपडे पहन कर अपनी अदाओं के जलवे दिखा रहा है तो कोई एसे एसे किरदार की नकल कर रहा है जो कि अपने जमाने के उस्ताद रह चुके हैं ।

फिल्मी अदाकारी के मैदान में अपनी स्वयं की एक अलग पहचान बनाना काफी मुश्किल ही होता होगा, क्यों कि दुनिया में कोई भी आसानी से अपनी मंजिल को नहीं पा लेता है । जिसने अपनी एक स्टाइल या कार्यशैली बना ली वह तो महान ही हो गया, हर किसी आए गए को कोई नहीं देखता या पूछता है, सभी उन्हीं लोगों को याद रखते हैं जो अपने किरदार के अंदर घुस कर अभिनय करता है । गंभीरता के मामले में चाहे अमिताभ हो या संजीव कुमार, या फिर देव आनंद के जेसा हरफन मौला किरदार इन महान कलाकारों नें अपने जमाने में बेहतरीन कार्य किया है ओर कुछ तो अभी भी सबसे आगे ही हैं । क्या किशोर या रफी के गीतों को अब भी कोई मात दे सकता हैं, या फिर क्या शोले के गब्बर के किरदार को कोई भूल सकता है नहीं ना । ये सभी महान कलाकार अपनी एक अलग पहवान बनाने में काफी हद तक सफल रहे थे । तो कहने का मतलब यह है कि चाहे अपनी स्पेशल संवाद अदायगी के कारण या फिर अपने खासे व्यक्तीत्व के कारण ही चर्चित रहे महान कलाकारों कि नकल करना क्या मजाक का भी मजाक नहीं है ।

→ 2 टिप्पणींयांटैग्सः ·····

हमारे जिले राजसमन्द में मातम भरा दिन

September 9th, 2007 · उलझन, नई खबरें, राजसमन्द जिला

जी हां ! हमारे जिले के ही गांवो के लोगों से भरी हुई रामदेवरा दर्शन के लिये जा रही एक ट्रक देसूरी के घाटे में दु्र्घटनाग्रस्त हो गई थी । जिसमें कई 60 से अधिक घायल हो गए एवं 86 के लगभग मारे गए । ट्रक में 211 बच्चे, बुढ़े, औरतें बेठे थे । इसमें लकडी के पट्टे लगा कर जगह बनाई गई थी ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग बैठ सकें । वेसे यह देसूरी का घाटा पाली की तरफ आता है । यह बडा ही भयावह, विकट मोड, चढ़ाव उतारों व घने जंगल से युक्त कठीन रास्ता है । वेसे इसके घाटे के जेसा ही हमारा उदयपुर के मार्ग में आने वाला चीरवा का घाटा भी है ।

अनुभवी बडे लोग बतातें है, कि आज से 15-20 साल पहले ना तो गाडीयों में पावर स्टीयरिंग होते थे ना ही सडके चौडी हुआ करती थी, ना रोड लाईट्स, ट्रक चलाने वाले के तो हाथ गियर बदल बदल कर और स्टियरिंग को मुडा मुडा कर ही दुखने लग जाते थे । साथ ही यह भी बता दुं की देसूरी की नाल या घाटे के शुरुआत में एक मंदिर भी है, काफी सारे लोगों का मानना है कि अगर रुक कर दर्शन किये बिना चले गए तो दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं । बहुत सी गाडीयों से लोग रुक रुक कर पेसे चढ़ाते हैं, व दर्शन करते हैं यहां ।

इस से एक बात तो साफ हो जाती है कि हमारे राजस्थान के लोग काफी धर्मांध है, किसी के थोडे से आग्रह करने मात्र से ही खतरनाक यात्राएं करने के जोखिम तक उठाने से नहीं चुकते । ये तो कुछ भी नही हमारे हाइवे के रास्ते पर हर साल सडक के किनारे पैदल जाने वाले रामदेवरा के यात्री वाहनों की टक्कर के शिकार होते हैं व मारे जाते हैं। भगवान मृत लोगो की आत्मा को शांति दे ।

→ 2 टिप्पणींयांटैग्सः ····

कानून अभी भी जिन्दा है ? हां या नहीं

September 8th, 2007 · उलझन, नई खबरें

क्या कानून आज तक भी जिन्दा है यह सवाल अब तक हमारे मन में कई बार उठता है । पर आज जब हम बडे बडे राजनेता और अभिनेताओं को अपने अपराधों के कारण जेल का रुख करते देखते हैं तो मन में एक अजीब सी खुशी महसुस होती है । चलो कुछ तो एसा है जो कि पैसे या वैभव से नहीं खरीदा जाता, सच में कानून जिन्दा है ।

बचपन से आज तक सेंकडो हजारों फिल्मों का यह डायलोग कानून के हाथ बडे लम्बे होते हैं सुन सुन कर हम लोग भारी बोर होते हैं पर जब आज के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कानून के लन्बे हाथों का जलवा देखते हैं तो लगता है कि कानून के हाथ बडे लम्बे होते हैं । बडे बडे रईसों, पेसे वालों, अभिनेताओं और राजनेताओं का जीवन हमेशा विवादों से घिरा ही रहता हैं और जब किसी गलती या अपराध के लिये उन जेसे बडे पहु्च वाले लोगो पर भी जब हम कानून का शिकंजा कसते हुए देखते हैं तो लगता है कि इन लोगों की जिन्दगी भी आपके हमारे जीवन के जैसी ही तो है । शिबू सोरेन, सलमान खान, संजय दत्त या फिर कोई और, कानुन सबके लिये एक सा है, फिर चाहे कोई बडा व्यक्तीत्व हो या साधारण सा आदमी । हर गलती की सजा मिलेगी ………………..बराबर मिलेगी

→ 2 टिप्पणींयांटैग्सः ·······

हम आजाद हैं !

August 19th, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, उलझन, नई खबरें

अपने देश की आजादी के साठ साल होने आए हैं, सभी देशवासियों को बधाई । वेसे देखा जाए तो इन गुजरे सालों में बहुत कुछ हुआ है, जो नहीं होना चाहिए था मसलन बडे बडे घोटाले, सी. डी. व कई सारे मोबाइल के क्लिपींग कान्ड, बम कान्ड, हत्याएं, बाढ़, सुखा वगेरह वगेरह । पर कुछ तो है जो अच्छा है, बाकी क्यों भला हर कोई व्यक्ती इस दिन नए चमचमाते हुए सफेद प्रेस किये हुए कपडे और पालिश किए गए जुते पहन कर निकल पडता है, जवानो की कदम ताल और बच्चों की परेड को नजदीक से देखने के लिये ।

आखिर कुछ तो है उन देशभक्ती गीतों में, जिन्हें चाहें हम 26 नवरी या 15 अगस्त के दिन ही सुनते है । जाने क्यों एसा हर व्यक्ती को अंदर से महसुस होता है कि अगर आस पास कुछ किलोमीटर दूर कोई 5-50 हथियारबंद देशद्रोही हो, और स्थानिय सरकार नें अपन को भी हथियार व खुली छूट दे रखी हो तो, अभी उन देश के दुश्मनों को सलटा डालें । कुछ तो है कि हमें अपने देश की खातिर शहीद हुए देशभक्त लोगों की याद आने लगती है! ना जाने वे लोग केसे थे, क्या करते थे पर आज शायद उन्हीं लोगों के प्रयासो् की वजह से आप और हम आजाद देश में चैन की सांस ले रहे हैं ।

हजारों गुमनाम लोगों ने देश की आजादी की खातिर संघर्ष किया पर उनमें से केवल कुछ प्रसिद्धी को पा सके । बडे फख्र से हम उनके नाम लेते हैं जेसे सरदार भगत सिंह, गांधी जी, नेहरू चाचा, सरदार पटेल, चन्द्रशेखर आजाद एवं एसे कई और । बाकी उन सेंकडों हजारों लोगों को पता नहीं क्यों याद नहीं किया जाता, क्यों नहीं सरकार उनके परिजनों को कुछ आर्थिक सहायता देती है । आपके हमारे पास ही कई सारे एसे देशभक्त लोग होंगे, जिन्होनें आजादी के संघर्ष में बडे लोगों के साथ सक्रिय भागीदारी निभाई है । स्थानिय पुलिस व कलेक्टर ढ़्रारा सिर्फ उन्हें 26 नवरी या 15 अगस्त के दिन शाल ओढ़ा कर सम्मानित कर दिया जाता है । शायद किसी को पता नहीं हैं कि वे लोग इतना सब देश की खातिर कर चुके हैं, पर फिर भी अभी तक फटेहाल जिन्दगी बसर कर रहें हैं । अभी अभी कुछ ही समय पुर्व शहनाई वादक महान उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहेब के बारे में एक निजी चेनल ढ़्रारा बताया गया था, की वे केसे अपनी जिन्दगी की गाडी चला रहे थे ….. ये तो सिर्फ एक छौटा सा उदाहरण मात्र है ।

→ अब तक कोई टिप्पणीं नहींटैग्सः ····