Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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हम आजाद हैं !

August 19th, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, उलझन, नई खबरें

अपने देश की आजादी के साठ साल होने आए हैं, सभी देशवासियों को बधाई । वेसे देखा जाए तो इन गुजरे सालों में बहुत कुछ हुआ है, जो नहीं होना चाहिए था मसलन बडे बडे घोटाले, सी. डी. व कई सारे मोबाइल के क्लिपींग कान्ड, बम कान्ड, हत्याएं, बाढ़, सुखा वगेरह वगेरह । पर कुछ तो है जो अच्छा है, बाकी क्यों भला हर कोई व्यक्ती इस दिन नए चमचमाते हुए सफेद प्रेस किये हुए कपडे और पालिश किए गए जुते पहन कर निकल पडता है, जवानो की कदम ताल और बच्चों की परेड को नजदीक से देखने के लिये ।

आखिर कुछ तो है उन देशभक्ती गीतों में, जिन्हें चाहें हम 26 नवरी या 15 अगस्त के दिन ही सुनते है । जाने क्यों एसा हर व्यक्ती को अंदर से महसुस होता है कि अगर आस पास कुछ किलोमीटर दूर कोई 5-50 हथियारबंद देशद्रोही हो, और स्थानिय सरकार नें अपन को भी हथियार व खुली छूट दे रखी हो तो, अभी उन देश के दुश्मनों को सलटा डालें । कुछ तो है कि हमें अपने देश की खातिर शहीद हुए देशभक्त लोगों की याद आने लगती है! ना जाने वे लोग केसे थे, क्या करते थे पर आज शायद उन्हीं लोगों के प्रयासो् की वजह से आप और हम आजाद देश में चैन की सांस ले रहे हैं ।

हजारों गुमनाम लोगों ने देश की आजादी की खातिर संघर्ष किया पर उनमें से केवल कुछ प्रसिद्धी को पा सके । बडे फख्र से हम उनके नाम लेते हैं जेसे सरदार भगत सिंह, गांधी जी, नेहरू चाचा, सरदार पटेल, चन्द्रशेखर आजाद एवं एसे कई और । बाकी उन सेंकडों हजारों लोगों को पता नहीं क्यों याद नहीं किया जाता, क्यों नहीं सरकार उनके परिजनों को कुछ आर्थिक सहायता देती है । आपके हमारे पास ही कई सारे एसे देशभक्त लोग होंगे, जिन्होनें आजादी के संघर्ष में बडे लोगों के साथ सक्रिय भागीदारी निभाई है । स्थानिय पुलिस व कलेक्टर ढ़्रारा सिर्फ उन्हें 26 नवरी या 15 अगस्त के दिन शाल ओढ़ा कर सम्मानित कर दिया जाता है । शायद किसी को पता नहीं हैं कि वे लोग इतना सब देश की खातिर कर चुके हैं, पर फिर भी अभी तक फटेहाल जिन्दगी बसर कर रहें हैं । अभी अभी कुछ ही समय पुर्व शहनाई वादक महान उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहेब के बारे में एक निजी चेनल ढ़्रारा बताया गया था, की वे केसे अपनी जिन्दगी की गाडी चला रहे थे ….. ये तो सिर्फ एक छौटा सा उदाहरण मात्र है ।

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अहा, बारिश की फुहारे आई

July 4th, 2007 · उलझन, नई खबरें, राजसमन्द जिला

बहुत दिनों के बाद, पसीने व तेज गरमी से निजात दिलाने वाला मानसून फिर से आ गया है । पहली बारिश की फुहारें, इसकी बुंदे, जब सुखी मिट्टी में पडती हैं तो मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबु बडी अच्छी लगती है । पहली बारिश में नहाने का भी अपना अलग ही मजा है । तुनक मिजाजी या ज्यादा गुस्सेल लोग भी जब मौसम की पहली बारिश देखते हैं तो बरबस ही खुशी से मुस्कुरा उठते है । लोग कहते हैं कि इस बार गरमी भी बहुत तेज पडी थी तो बारीश भी रिकार्ड तोड होनी चाहिये । [Read more →]

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बचपन की कुछ सुनहरी यादें

May 30th, 2007 · आपबीती, तकनिकी, हास्य

बात है बहुत सालों पहले, बचपन के समय की। उन दिनों रोजाना स्कुल से आने के बाद शाम को (जेसा की हर स्कुली बच्चा करता है) हम लोग खेलने जाते थे पास के ही स्कुल ग्राउंड में । लेटेस्ट खेलों से लेकर पारम्परिक देसी खेल जेसे की क्रिकेट, बेडमिन्टन, गुल्ली डंडा, रामदोस्त,  कंचे (अंटिया) सब बडे मजे से खेले जाते थे, आज के जेसे नहीं कि हर बच्चा टी. वी. से चिपका हो । आलम ये था की उस दौरान शाम सुबह तो जगह नहीं मिलती थी, खेलने के लिये तो फिर जल्दी किसी गुरगे को बिठा कर जबरन कब्जा जमाया जाता, कि पहले हम आएं हैं तो हमारी टीम यहां खेलेगी, और इस ही क्रम में कभी कभी पंगे भी हो जाते थे । 

पहली टीम दुसरी टीम को कहती कि आ जाना कल शाम को चार बजे देख लेते हैं कि किसने असली मां का दुध पिया है, तो दुसरी टीम में से कोई पहलवान टाइप का लडका कहता कि कल क्या है आज ही देख लेते हैं, चल बता क्या करेगा हम सबके साथ । कोई बहुत बहसे होती व कभी कभी लडाई भी । [Read more →]

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हम क्यों जिये जा रहें हैं ?

May 22nd, 2007 · उलझन

हो सकता है कि आप लोग यह हेडिंग पढ़ कर चौंक गए होंगे । पर यह सवाल जहां तक में सोचता हुं हर व्यक्ती के मन में आता ही होगा कि क्या जीवन में ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना ही हमारा मकसद होना चाहिये ? क्या दुनिया में हम मर्द सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने की एक मशीन हैं ।  कुछ भी काम ना होते हुए भी काम के बोझ का ढ़ोंग करते हुए क्या हम रोजाना की छोटी मोटी खुशियों को नजरअंदाज करते जा रहे हैं व स्वतः ही दुखी जीवन भी बीता रहे हैं ।

कृपया आप अपने विचार कमेन्टस् के माध्यम से व्यक्त करें, व बताएं की क्या आप भी वही सोचते हैं जैसा की में सोचता हुं l

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एक्युप्रेशर के फायदे नुकसान

May 17th, 2007 · आपबीती, उलझन, हास्य

यह बात है काफी पुराने दिनों की, हम दोस्त लोग अक्सर शाम को अपने अपने देनिक कार्यों से निवृत हो कर थके हारे आते और शहर के पास ही स्थित राजसमन्द की पाल पर घुमने जाया करते थे। शाम को चहल कदमी भी हो जाती थी व मित्रगणों के साथ थोडी हंसी ठिठोली भी, तो रोजाना वहां आने जाने का एक नियम सा बन गया था ।

तो उन दिनों मुझ पर भी पता नहीं एक्युप्रेशर का एक भूत सा चढ़ा हुआ था (अक्सर एसा होता है सबके साथ कि हमेशा कुछ नया करने को तैयार रहते हैं व अगर वह एक लिमिट से ज्यादा हो जाए तो भारी बोर हो जाते हैं, उसके बाद फिर से कुछ नया सोचते हैं, कि अब क्या नया किया जाए जिससे दिल को शांती व सुकुन चैन मिले) वेसे पिताजी भी हमारे एक्युप्रेशर व पिरामिड चिकित्सा पद्धतियों के अच्छे जानकार है, हर बार शहर में लगने वाले खादी मेले व इस तरह के आयोजनों से अक्सर कुछ ना कुछ एक्युप्रेशर हेतु काम आने वाले आईटम उठा कर लाते ही रहते हैं, अब तो अलमारी का एक कोना उन सब साजो सामान से ही भर गया है । [Read more →]

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