Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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अब एक और किस का बवाल

May 10th, 2007 · उलझन, नई खबरें, हास्य

कुछ समय पहले पहले राखी मिका के किस का बवाल मचा, तो अभी अभी रिचर्ड शिल्पा किस का लोचा हुआ, अभी अभी अपने क्रिकेटर धोनी मियां को भी उनकी कोई फेन सरे आम किस कर बेठी । मुझे तो लग रहा है कि हमारे इस महान भारत देश में अब किस किस के किस कि कोन्ट्रोवर्सी बाकी रही है, वो भी तो आ जाएं जरा । ससुर उन्हें भी झेल लेते है ।

हमारे भारतवर्ष में हर साल हजारों लाखों विदेशी पर्यटक आते हैं अब उन्हें भी बताया जाता है कि यहां खुले आम किस करना मना है व इसे यहां बुरा माना जाता है पर क्या वे लोग यह नहीं सोचते होंगे की जिस देश में सभ्यता संस्कृति की इतनी दुहाई दी जाती है वह देश बच्चे पैदा करने में अव्वल है दुसरा यहां खुले में मल मुत्र करने पर पाबन्दी नहीं है पर किस करने की पाबंदी है ।

कुछ बुरा है तो है अब, पर अकेला चना भी तो भाड नहीं फोड सकता है, जरुरत है तो जन जन में एक नई सोच एक जागृति लाने की । वो अब कब आएगी वो तो भगवान ही जाने ।

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आम की बहार

April 29th, 2007 · नई खबरें, राजसमन्द जिला

 लिजीये फिर से आम खाने का मौसम आ गया है ! हमारे यहां इस छोटे से शहर में भी काफी सारे आमरस वाले जाने कहां से आ गए है । इतने सारे आमरस वाले हैं कि पुछो मत । हर सडक, हर नुक्कड पर ये आमरस वाले अपने सारे साझो सामान व ताम झाम लिये बैठे हैं । ताम खाम भी क्या बस कुछ प्लास्टिक की कुर्सियां, एक अदद मिक्सी व जार,  गिलासें, पानी, आम वगेरह वगेरह ।

हमारे फलों के राजा मीठे रसीले आम की दसहरी, लंगडा, हापुस, कलमी और ना जाने कितनी सारी किस्में है, हर किस्म का एक अलग टेस्ट, आकार प्रकार व अलग गुण। तो जी भर के मजे लिजीये फलों के राजा आम को खाने का इस गरमी के मौसम में। 

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हर किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता

April 11th, 2007 · उलझन, राजसमन्द जिला

हमारा एक परम मित्र चाहता है कि वो फिर से एक बार देस की मिट्टी की खुशबु को महसुस करे, छोटा गांव जैसा दिखने वाला शहर ही सही पर है तो यह अपना, बचपन से लेकर अब तक कई सारी सेंकडों यादे जुडी हुई है इस छोटे से शहर से, स्कुल की, साथीयों की दोस्तों की । सारे सुख दुख यहीं तो देखे थे अपनी ही आंखों से। पर अफसोस रोटी के लिये मिट्टी से दुर होना भी तो उसकी मजबुरी है।

वो आना चाहता है वापस, दौडना चाहता है अपने खेतों की खुली जमीन में, झम कर हुई बारिश के बाद मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबु को फिर से अपने आप में रचा बसा लेना चाहता है, पर मजबुरी यह है कि अब जिन्दगी के ईस पडाव पर आकर बडे शहर में जमे जमाए अपने कारोबार को भी नहीं छोड सकता । सालों की मेहनत से अब जाकर बढ़ते हुए अपने व्यापार को एसे किसी भी हाल में घटते हुए नही देख सकता।

वो किसी प्रसिद्ध शायर नें कहा है ना कि -‍

हर किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता ।
किसी को जमीं तो किसी को आसमां नहीं मिलता ।।

जो जमीन पर है उसे उंचाइयां अच्छी लगती है व वह किसी भी हाल में अपने आप को उस स्तर पर पहुंचा देखना चाहता है जिसके बारे में वह सोचता है या सपने देखता है। दुसरी ओर चंद लोग ए॓से भी हैं जो उन्नति के शिखर को पा चुके है पर अपनी जमीन चाहते है, शहर की तडक भडक से दुर वे गांवो सी सादगी व सौम्यता चाहते हैं, चाहते हैं कि काश ये फोन, मोबाईल, इमेल, टी.वी., इन्टरनेट व तमाम इस तरह की व्यस्तता से कुछ दिन के लिये छुटकारा मिल जाए, पर उन्हें भी ये सब नहीं मिल पाता, सुना है कि दुनिया में स्वर्ग यहीं है व नर्क भी यहीं है तो कहीं एसा तो नहीं कि ईस तरह हर कोई अपने अपने हिस्से का नर्क भोग रहा हैं ।

कभी कभी सोचता हुं काश कुछ एसा हो कि जो सोचो वह हो जाए। दुनिया में ए॓से बहुत सारे लोग हैं जो मस्त मौला है व स्वभाव से काफी अच्छे हैं पर यह यह दाल रोटी का चक्कर ही एसा है कि कोई इससे निकल ही नही पाता । सबको 10 है तो 20 चाहिये और 20 है तो 40 पर क्या संतोष धन भी तो कुछ है कि नहीं । सब भाग रहे हैं अपनी अपनी कतार में, हर कोई अपने प्रतिद्वंदी से काफी आगे निकल जाना चहता है पर भगवान जाने यह दौड कब जाकर खत्म होगी………

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नाम किसी का काम किसी का

April 5th, 2007 · उलझन, नई खबरें, राजसमन्द जिला, हास्य

राजसमन्द के कांकरोली में दो व्यक्ती पकडे गए जो अपने आप को पुलिसकर्मी बता रहे थे,  वे दोनो व्यक्ती अपने आप को पुलिसकर्मी बता रहे थे। आम के ज्युस की दुकान वाले ने बताया की उन्होने एक एक गिलास आमरस पहले टेस्ट किया व फिर चार गिलास पेक और करवाया, फिर बगेर रपये पेसे दिये जाने लगे तो दुकानदार ने पुछा क्या बात है, तो उन्होने धोंस जमाते हुए आमरस वाले दुकानदार को डराया व कहा कि इसका रंग ज्यादा पीला क्यों हैं हम इसकी जांच करवाएंगे, वगेरह वगेरह। बाद में आमरस वाले के हो हल्ला करने से असली पुलिस आ गई व दोनो व्यक्ती जो कुछ देर पहले तक अपने आप को पुलिसकर्मी बता रहे थे वे पकडे गए ।

यह एक अजीब सी बात है, जो हर किसी आम नागरिक के अन्तस को झकझोर कर रख सकती है । कुछ ही दिनों पुर्व यहां एसा हो चुका है हुआ युं था,  की एक स्थान पर लडके लडकी को दो व्यक्ती अपने आप को पुलिसकर्मी बता कर डरा रहे थे, वे उनसे पेसे एंठना चाहते थे पर बाद में यह मामला पब्लिक के सामने आया ।

आखिर एसा क्यों होता है ? क्या वाकई में पुलिस का व्यवहार जनता के प्रति ए॓सा ही हे कि हर कोई मनचला पुलिस के नाम की धोंस जमाते हुए किसी भी राह चलते को डरा सकता है व हर किसी दुकान से मुफ्त में कुछ भी ले जा सकता है। ए॓से केसे कोई पुलिस के नाम का दुरुपयोग कर सकता है ? क्या वर्दी का खौफ जनता में एसा ही हे कि हर कोई उलझना नहीं चाहता है व ले दे के किसी भी तरह की समस्या से निजात पाना चाहता है ।

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राजसमन्द में गणगोर महोत्सव

March 23rd, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, नई खबरें, राजसमन्द जिला

गणगौर का पर्व फिर से आ गया है । कुछ दशकों से हमारे यहां राजसमन्द में गणगोर महोत्सव बडी धुमधाम से मनाया जा रहा हैं। विशेष तौर से अब नगरपालिका राजसमन्द इस कार्य व आयोजन में इन्ट्रेस्ट लेने लगी है बाकी पहले यह सारे इन्तजामात जनता मन्च, कांकरोली के द्वारा द्वारा किये जाते थे। वेसे तो पुरे राजस्थान में गणगौर काफी प्रसिद्ध त्योहार के रुप में मनाया जाता रहा है पर इस गणगौर को भव्यता के साथ मनाने के मामले में जयपुर, उदयपुर और राजसमन्द थोडे ज्यादा ही मशहुर है ।

gangaur-kankroli-rajsamand.jpgमुख्य रुप से गणगौर तीन दिन तक मनायी जाती है। जिनके नाम है हरी गणगौर, गुलाबी गणगौर व चुन्दडी गणगौर । बालकृष्ण स्कुल के ग्राउंड में हर साल विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। राजसमन्द में द्वारिकाधीश मन्दिर से गणगौर की सवारी (शोभायात्रा) निकाली जाती है जो नगर के मुख्य रास्तों से होती हुई मेला प्रांगण तक पहुंचती है। इस भव्य सवारी पर नगर के लोगों द्वारा जगह जगह पुष्प वर्षा की जाती है। कहीं कहीं तो सज्जन लोग सवारी में सम्मिलित लोगों के लिये जल व शरबत का भी इंतजाम करवाते है।

अंत गणगौर की सवारी मेले तक पहुंचती है फिर पुजा, घुमर, मल्यार्पण आदि के बाद शुरु होते हैं सांस्कृतिक कार्यक्रम, जो देर रात तल चलते हैं। एसा तीनों दिन होता है। कवि सम्मेलन, लोकल कलाकारों की नृत्य व गायन कला का प्रदर्शन और बाहर से बुलाए गए कलाकारों के प्रदर्शन [Read more →]

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