Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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राजसमन्द में गणगोर महोत्सव

March 23rd, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, नई खबरें, राजसमन्द जिला

गणगौर का पर्व फिर से आ गया है । कुछ दशकों से हमारे यहां राजसमन्द में गणगोर महोत्सव बडी धुमधाम से मनाया जा रहा हैं। विशेष तौर से अब नगरपालिका राजसमन्द इस कार्य व आयोजन में इन्ट्रेस्ट लेने लगी है बाकी पहले यह सारे इन्तजामात जनता मन्च, कांकरोली के द्वारा द्वारा किये जाते थे। वेसे तो पुरे राजस्थान में गणगौर काफी प्रसिद्ध त्योहार के रुप में मनाया जाता रहा है पर इस गणगौर को भव्यता के साथ मनाने के मामले में जयपुर, उदयपुर और राजसमन्द थोडे ज्यादा ही मशहुर है ।

gangaur-kankroli-rajsamand.jpgमुख्य रुप से गणगौर तीन दिन तक मनायी जाती है। जिनके नाम है हरी गणगौर, गुलाबी गणगौर व चुन्दडी गणगौर । बालकृष्ण स्कुल के ग्राउंड में हर साल विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। राजसमन्द में द्वारिकाधीश मन्दिर से गणगौर की सवारी (शोभायात्रा) निकाली जाती है जो नगर के मुख्य रास्तों से होती हुई मेला प्रांगण तक पहुंचती है। इस भव्य सवारी पर नगर के लोगों द्वारा जगह जगह पुष्प वर्षा की जाती है। कहीं कहीं तो सज्जन लोग सवारी में सम्मिलित लोगों के लिये जल व शरबत का भी इंतजाम करवाते है।

अंत गणगौर की सवारी मेले तक पहुंचती है फिर पुजा, घुमर, मल्यार्पण आदि के बाद शुरु होते हैं सांस्कृतिक कार्यक्रम, जो देर रात तल चलते हैं। एसा तीनों दिन होता है। कवि सम्मेलन, लोकल कलाकारों की नृत्य व गायन कला का प्रदर्शन और बाहर से बुलाए गए कलाकारों के प्रदर्शन [Read more →]

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क्या किसी ने भगवान को देखा है

March 23rd, 2007 · उलझन

क्या किसी ने भगवान को देखा है या फिर क्या कोई है जो उनसे जा कर मिला है, क्या भगवान को पाया जा सकता है ? इस तरह के ढ़ेर सारे सवाल हर व्यक्ती के मन में आते ही होंगे, ए॓सा मेरी व्यक्तीगत सोच है ।

मेरे खयाल से तो मन की शान्ति, या परम आनन्द ही भगवान को पाने के जेसा ही है, चाहै आत्मा या मन की शान्ति किसी भी प्रकार से मिले, कोई शख्स खीर या अपनी कोई पसंद की मिठाई खा कर के भी बडा अच्छा महसुस करता है, तो कोई स्नान, वर्जिश, ध्यान या मेडीटेशन करने के बाद परम आनन्द को प्राप्त करता है, तथा कोई शख्स तब परम आनन्द को प्राप्त करता है जब कोई व्यक्ती अपनी अंगुलियों के पोरों से उसके सिर के बालों मे हल्के हाथों से मालिश करे व थपथपाए ।

परम आनन्द को प्राप्त करना या किसी भी मायने में अपनी मंजिल तक पहुंच जाना लगभग एक जैसा ही है । पर जब कोई व्यक्ती अगर जीवन में मेहनत कर कर के थोडा आगे बढ़ता है तो लोग कहते हैं कि उसके सर पर तो फलां भगवान, फलां बाबा का आशिर्वाद है । मेहनत कोई करे पर नाम किसी का हो जाता है, क्या ए॓से में क्या वह व्यक्ती रत्ती भर भी हीन भावना से ग्रसित नहीं होता है ? कि जो ढ़ेर सारी मेहनत उसने अपनी मंजिल को पाने में की है, उसका सारा श्रेय बिना कारण किसी भगवान, संत बाबा या फिर किस्मत को चला जाता है। क्या उस व्यक्ती की अपनी मेहनत या कर्मों के कोई मायने नहीं हैं ?

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चिट्ठी आयी है

March 17th, 2007 · नई खबरें, राजसमन्द जिला

क्या अपने देश की, अपने शहर में रहते हुए घर की आधी रोटी खाना अच्छा है या दूर बाहर कहीं अनजान देश या शहर में जाकर चार रोटी वो भी बटर के साथ अच्छा है ?  इस प्रश्न पर हम कई बार आकर अटक जाते हैं। हमारे सामने ही यहां वहां आस पास एसे ढ़ेर सारे उदाहरण भरे पडे हुए हैं जो लोग बाहर जाकर बहुत सारा पैसा कमा कर वापस अपने देस आना चाहते हैं। पर क्या वे लोग अपने देस में अपने लोगों के बीच वापस आ पाते है ? या फिर आते हैं तो भी फोरमेलिटी करने के लिये, वो भी तब जब परिवार में किसी की डोली उठ रही हो या फिर अर्थी ।

हमने तो महसुस कि या है कि बडे शहरों में जाकर व्यापार या नौकरी करने वाले शादी ब्याह अपने पुराने शहर में ही आकर के करते हैं एसा क्यों ईसके पीछे हमें कुछ कारण लगते हैं जेसे बडे शहरों में जेसे कमाना आसान है वेसे ही खर्चे करना भी अत्यन्त आसान है। जो ठाठ बाठ से शादी आदमी गांव में आकर दो लाख रुपये में कर सकता है [Read more →]

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हिन्दी ब्लॉग व ब्लागिंग

March 17th, 2007 · तकनिकी, नई खबरें

हिन्दी ब्लॉग व ब्लागिंग अब आसमान की उंचाईयों को छु रहा है। आप हम दोस्त लोग , भाई, बहन सभी यहीं तो है। हिन्दी ब्लॉग के एक शोधार्थी ने जीतु जी को कुछ सवाल भेजे थे । इन सवालों के जवाब मेरे अपने नजरिये से इस प्रकार होंगे ।

हिन्दी ब्लागिंग से सबंधित सवाल जवाबः-

सवालः  क्या ब्लॉग को आनलाइन डायरी कहना ठीक होगा?
जवाबः हां, पर यदि यह रोजाना लिखा जाए व एक डायरी की सूरत में लिखा जाए तो ।
सवालः ब्लॉग से किसको लाभ है?
जवाबः ब्लाग लिखने वाले को, इससे ब्लागर की कुछ भी बात को लोगों के बीव प्रेषित करने की योग्यता का विकास होता है, जल्द ही हिन्दी में एडसेन्स भी शुरु होगा तो हो सकता है यह हिन्दी ब्लाग भी लेखक की कमाई का एक जरिया बने । और फायदा है,  हर किसी को जो की उस विशेष प्रकार की सुचना की तलाश में है। आखिर अपने अनुभवों का किसी को तो फायदा मिले।
सवालः वास्तव मे इसे इतने लोग पढते है?
जवाबः वास्तव मे हिन्दी के ब्लाग्स को देश विदेश के काफी लोग पढ़ते है । मेरे खुद के ब्लाग का स्टेट दिखाउं क्या ?
सवालः क्या यह टाइम-पास करने का साधन है?
जवाबः हां बेशक यदि कोई व्यक्ती टाइम-पास करने के हिसाब से ही यह सब करता है तो बाकी तो यहां दुनिया भर की जानकारीयां मिलती है हर विषय पर तो हर किसी की नालेज तो बढ़ता ही है ना । 

” इस ही प्रकार के काफी सारे सवाल होंगे कई लोगों के दिल में हिन्दी ब्लाग्स को लेकर के । सारे सवालों के जवाब खुद ब खुद मिलते चले जाएंगे यदि कोई सवाल करने वाला अपना खुद का एक अदद ब्लाग बना कर नियमित पोस्ट करे तो। “

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सलाम नमस्ते फिल्म से हमारी पसंद का गीत

March 16th, 2007 · कला एवं शिल्प, तकनिकी, नई खबरें

कल ही हमने एम टी. वी. पर यह ‍विडियो फिर से देखा बडा ही अच्छा लगा है हमें तो यह वाला my dil goes huum mmmm गीत है फिल्म सलाम नमस्ते का। सबसे प्यारी बात है इस गाने कि मधुरता व हमममम करके गाने वाला शान व गायत्री अय्यर का स्टाइल। गाने के बोल व इसके विडीयो पर दिखाए जाने वाले दृश्य बडे ही लाजवाब है, सेफ तो सेफ हैं वाकई, कुछ ना कहते हुए भी अपने हाव भावों से सब कुछ कह जाना उन्हें बखुबी आता है । हिरो व हिरोइन की प्यार भरी चुहलबाजी को जिस अनोखे अंदाज मे फिल्माया गया है कि बस एसा लगता है कि यह जेसे आपकी – हमारी कहानी ही तो है।

हिरो के लिये गाने में चन्द एसी बातें है जो काफी इम्प्रेस करती है जेसे जब वो करने लगे सफाई, समझो के शामत आयी और हिरो फिल्म देखते हुए रोता है, खुल्ले मुंह सोता है, वगेरह वगेरह ।

यह गाना न केवल सुनने में बडा सुहाना है बल्कि यह देखने में भी बडा ही अलग किस्म का गीत है। सेफ व बहादुर प्रिती जिन्टा ने इस जो गीत के विडीयो में अपने हाव भाव प्रकट किये हैं वो अपने आप में बडे ही अलग हैं । वेसे ईस फिल्म का संगीत निर्देशन किया है विशाल व शेखर नें । गाने का विडीयो तो बस, क्या कहें बहुत ही प्यारा व देखने लायक है। अगली बार टी.वी. पर जब भी आये तो जरुर देखियेगा यह गाना।

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