Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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एकलव्य फिल्म समीक्षा, फिल्म रीव्यु, स्टार कास्ट एकलव्य द रोयल गार्ड

February 17th, 2007 · कहां ठहरें, नई खबरें, प्रमुख दर्शनीय स्थल, फिल्म रिव्यु, राजसमन्द जिला

हम तो भईया जब से हमारे राजसमन्द के देवीगढ़ मे एकलव्य की शुटिंग युनिट आयी थी।  तब से ही इस फिल्म को थियेटर में ही देखने की इच्छा संजोए बैठे थे वो आज पुरी हुई है। बाकी तो आस पास लगभग सारी होटलों व छोटे मोटे ढ़ाबो पर हमने खाना खाने व घुमने का लुत्फ ले लिया है, पर देवीगढ़ होटल हमारे बजट में नहीं आता है, सो अब तक गए नहीं वहां। वेसे हमारे राजसमन्द में यह बहुत महंगी व शाही सुख सुविधाओं से युक्त होटल मानी जाती है, सभी बडे अभिनेता, नेता व बडे व्यावसायिक घराने के लोग यदि कारणवश राजसमन्द आते है तो यहीं ठहरते हैं। तो भई अब तक तो हम जा नही पाए सोचा, ये फिल्म देख लेते है कुछ आईडिया हो जाएगा। युं तो राजस्थान के अन्य जगहों पर भी शुटिंग कि गई थी पर फिल्म मे अधिकांश शुटिंग देवीगढ़ की है।

अरे हमें तो हर खबर मालुम है क्योंकि जब शुटिंग युनिट यहां आयी थी तो रोजाना अखबारों में नई खबरे पढ़ने को मिलती थी कि आज सेफ आए है, सेफ ने मोटरसाईकिल चालक से लिफ्ट मांगी,  आज अमिताभ के डुप्लिकेट पहुंचे है, हेलिकाप्टर मंगवाया है, आज फलां, आज फलां ईत्यादी । 

शाही परिवार के लोग, आपस की लडाई, गरीब लडकी से शहजादे का प्यार महोब्बत, पुलिस व एक स्वामिभक्त गार्ड एकलव्य (अमिताभ)यही सब कुछ नए अंदाज में दिखाया गया है । अमिताभ, सेफ, संजु बाबा, जेकी व विध्या बालन के गेट अप काफी आकर्षक लगे है। जेसे जुबैदा में करिश्मा कपुर व रेखा ने राजपुती परिधान पहने थे ना लगभग वेसे ही परिधान विध्या बालन नें फिल्म में पहने है । स्टंट सीन में वो दृशय जहां रेल की पटरी के पास बहुत सारे ऊंट होते है बडा अच्छा बन पडा है। देवीगढ़ के दृशय काफी सुन्दर लगे है, खासकर के वो छतरीयां, स्वीमिंग पुल, बडा सा दरवाजा, महल, महल के अन्दर का भव्य आकर्षक ईन्टीरियर, पहाडों के दृश्य आदि ।

फिल्म में राजसी ठाठ बाठ व शाही परिवार के अन्दर की कुछ पारिवारिक कहानी कोदिखाया गया है । पुरानी विन्टेज कार, जीपें, पुराने महल, रेतिला रेगिस्तान, ऊंट, परिधान भी वेसे ही,  कुल मिला कर सब कुछ राजस्थानी अन्दाज में है ! मजा आ गया सच । फिल्म की कहानी एकलव्य के आस पास घुमती है जो की एक शाही रक्षक है और जिसका धर्म है राजपरिवार की रक्षा करना । फिल्म का चन्दा रे वाला गाना..भी बडा अच्छा लगा।

कल के ही समाचार में देखा की उदयपुर में फिल्म देखने के बाद दर्शकों ने कहा की फिल्म के बारे मे जैसा सोचा था वैसा नहीं है, अच्छी नहीं लगी वगेरह । पर हम तो एक बात ही कहेंगे – हो सकता है निर्देशक जो आपको दिखाना चाहता है वो आपने नहीं देखा, व अगर देखा भी तो ध्यान से नहीं देखा । हमें तो अच्छी ही लगी भई ।

अभिनेता : अमिताभ बच्चन, सेफ अली खान, जेकी श्राफ, जिमी, संजय दत्त, परिक्षीत साहनी, विध्या बालन एवं अन्य
रेटिंग : हम इसे 5 में से 3 स्टार देना चाहेंगे ।

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महाशिवरात्री का त्योहार राजसमन्द में

February 16th, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, नई खबरें, राजसमन्द जिला

राजसमन्द में युं तो कई सारे शिव मन्दिर है पर उनमें से कुछ प्रमुख है मन्दिर है – रामेश्वर महादेव का मन्दिर, गुफा श्री गुप्तेश्वर महादेव मन्दिर, चौमुखा महादेव, कुन्तेश्वर (फरारा) महादेव का मन्दिर, काबरी महादेव का मन्दिर, कुभंलगढ़ पर स्थित महादेव जी का मन्दिर, परसराम महादेव मन्दिर आदि । कहने का अभिप्राय यह है कि अगर राजसमन्द के शिव मन्दिरों के बारे में अगर लिखना चालू किया जाए तो कोई सीमा ही नहीं है। हर स्थल अपनी अलग खुबी व कलात्मकता के लिये जाना जाता है ।

महा शिवरात्री के पर्व पर यहां शिवभक्तों के द्वारा उनके प्रसाद भंग का बहुतायत में प्रयोग किया जाता है। यहां के ब्रजवासी लोग तो वैसे भी भांग व ठण्डाई में अक्सर चक (टुन्न) ही रहते हें। हमारे यहां तो एक लोकल भांग की दुकान पर बहुत शानदार लाईनें लिखी गई है जो इस प्रकार से हैं । कृपया गौर से पढ़ें ।

“छान छान छान, मत किसी की मान ।
जब निकल जाएंगे प्राण, तो कौन कहेगा छान ।।”

और इस तरह से एक दुसरे को छानने व छनाने का कार्यक्रम चलता ही रहता है यहां। तो जनाब एसा है हमारा अनौखा कांकरोली व नाथद्दारा शहर। महा शिवरात्री के त्योहार पर तो विशेष रुप से सभी शिव मन्दिरों के बाहर प्रसाद, फुल माला आदि की दुकाने लग जाती है। कुल मिला कर एक मेले का सा माहौल होता है। बहुत से स्त्री पुरुष अलग अलग मन्दिरों में जाते है व शिवजी के दर्शन पुजा आदि करते हैं, प्रसाद चढ़ाया जाता है। विभीन्न मन्दिरों मे भव्य लाइटींग व सजावट की जाती है व भगवान शिव को विशेष रुप से श्रंगारित भी किया जाता है। आरती पुजा, भोग आदी के दर्शन शुरु होते है । समाजसेवी लोग व्यवस्था आदि बनाए रखने में मदद करते हैं, ताकी हर व्यक्ती कतार में जा कर आराम से दर्शन आदि कर सके। हर जगह जाने कहां से ईतने गुब्बारे वाले, खिलोने वाले, कुल्फी वाले एवं चाट पकोडी वाले आ जाते है जो बच्चों व बडों को लुभाते रहते है। बच्चे मचल उठते है व अन्त में हार कर बडों को उनकी इच्छाओं की पुर्ती करनी ही पडती है।

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राजसमन्द का वेलेन्टाईन डे व कुछ टिप्स

February 14th, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, राजसमन्द जिला, हास्य

राजसमन्द कहने को तो बडा अमीर शहर माना जाता है, क्यों की पुरे राजस्थान में  सबसे ज्यादा रिवेन्यु यहीं से सरकार को मिलती है, पर यहां के लोगों की सोच तो उरी बाबा (हालांकी हम खुद भी यहीं के रहने वाले हैं और यहीं की मिट्टी् का एक हिस्सा हैं) यहां भी गिफ्ट की दुकाने सज गई है, बडी साईज के गुलाब तो पिछले बार भी कम पड गए थे, शायद ईस बार भी एसा ही हो यह बात हमें भी कुछ खास सम्पर्क सुत्रों से विदित हुयी थी । 

हमारे स्कुल के समय में भी को एजुकेशन थी, पर तब भी क्लास में जो लडका लडकियों से बातें करता व उनके आगे पीछे घुमता था, उसे दुसरे लडके अच्छा नहीं माना करते थे। ईस प्रकार के (लडकियों के पीछलग्गु) लडकों को दुसरे लडके चिढ़ाते थे व छेडते थे, कभी कभी खास तौर से परोडियां बनायी जाती थी,व बकायदा स्कुल के ग्राउंड या स्टेडियम के उपर भव्य (नाश्ते पानी सहित) अंनत्याक्षरी का आयोजन किया जाता था, जिनमें पेरोडियों का जम के प्रयोग किया जाता था व उन खास किस्म के लडकों को छेडा जाता था । तब तो बहुतों को ये भी पता नहीं था कि ये वेलेन्टाईन डे भी क्या भला ना नाम है।

पर धीरे धीरे यहां भी विकास का आगाज् हुआ है और यहां भी ये वेलेन्टाईन डे मनाया जाने लगा है। लडके लडकियों को कार्ड व गिफ्ट दे रहें हैं तो लडकियां कडको को यानी कि लडको को। घुमने फिरने के स्थल भी आज वेलेन्टाईन डे के उपलक्ष में भरे भरे से ही रहते हैं। यहां भी लडकियां सुबह होते ही चश्मा लगाये अपनी अपनी स्कुटियां ले ले कर निकल पडती है स्कुल कालेज की ओर, कुछ कामकाजी महिलाएं भी अपने अपने वाहनों से आती जाती है । चंद सालों पहले तो कोई महिला या लडकी स्कुटर या कुछ भी वाहन चलाती हुई दिख जाती थी तो जैसे हमने कुछ अजुबा देख लिया हो पर आजकल एसा नहीं है, अरे भई ईक्कीसवीं सदी है। 

सुना है कि बजरंग दल वाले अब पीछे पड गए है, वे माला वाला व पंडितजी को साथ ले कर ही घुम रहें है तब तो आशिको की खेर नहीं, आखिर वो सही भी तो कह रहें हे कि ये पाश्चात्य संस्कृति के कारण भारत के लोग अपनी परम्पराएं भुलते जा रहै हे। उन आशिक मिजाजी लोगों ने कभी अपने मां बाप को भी कोई गिफ्ट या कार्ड ले जा करके दिया है, जो अपने प्रेमी प्रेमिकाओं पर ईतना लुटा रहे है। वैसे हम वेलेन्टाईन डे के खिलाफ नहीं है व ईतने पथ्थरदिल हम नहीं हैं अपने तो वो वाला हिसाब है कि “कोउ नृप होई अपुन को का हानी”

आईये इस बार कुछ नया करने की सोचिये, लिजीये कुछ टिप्स –

अपने प्रिय को कम से कम ईस दिन, हर घंटे एक एस एम एस कीजीये 12 घंटे में 12 रुपये का खर्चा बस ।

कार्ड, फुल, गिफ्ट सब पुराने हुए, अब की बार अपने प्रिय को ईन्टरनेट से अच्छा सा ई ग्रिटिगं कार्ड भेजीये ।

ईस दिन व्यस्त नहीं रहे, सब काम बाद में, आज का दिन अपने प्रिय के लिये बस ।

मनचाहे वाद्य पर अपने प्रिय के पसंदीदा गाने का (कम से कम) एक अतंरा बजा कर उसे सरप्राईज दें ।

अन्तिम – अगर ये अग्रलिखित कुछ ना कर सकें तो मेरे जेसे महान आलसी के पास आ जाएं व ब्लागिंग में नए आईडियाज् दें व मदद करें ।

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राजसमन्द डिस्ट्रीक्ट डाट काम को गुगल का पेज रेन्क 1

February 12th, 2007 · तकनिकी

आज एक बडी खुशी कि बात पता चली वो में आप सब को बताना चहता हु् । वैसे तो हम कभी कभार गुगल का पेज रेन्क देख लेते थे पर काफी दिनों से ये चेक नहीं किया, क्योंकि पता था कि ये एसे ही नहीं मिलता ईसमें “वक्त तो लगता है” । तो http://rajsamanddistrict.com  को 1/10 पेज रेन्क मिला है यानी 10 में से 1 नबंर मिला है पर हम तो फिलहाल 1 में भी खुश है । “ना मामे से काना मामा अच्छा होता है” यही सोच कर मन ही मन खुश हुए जा रहे हैं। पर जब हमने चेक किया http://www.rajsamanddistrict.com  को तो ये हमें 0/10 ही मिला । पर धीरे धीरे ये सब सही हो जाएगा ए॓सी आशा करते है । 

ये पेज रेन्क का मिलना व धीरे धीरे बढ़ना एक अच्छा संकेत है, किसी भी वेबसाईट या ब्लाग के लिये । ये पेज रेन्क गुगल भैया तय करता है हर साईट, ब्लाग या फोरम के लिये, किसी साईट को मिले लिन्क व दिये गए लिन्क से यह तय होता है । पी. आर. एक तरह की वेल्यु हे जो कि गुगल निर्धारित करता है । आप में से कोई भी व्यक्ती अपने ब्लाग या वेब साईट का पेजरेन्क चेक करना चाहे तो http://www.prchecker.info/check_page_rank.php यहां पर जा कर अपनी साईट का PR चेक कर सकते हैं । वेसे काफी लोग fake करके High Pr भी बना लेते है, पर वो असली नहीं है उसके नुकसान ही हैं।

पेज रेन्क बढ़ता है लिन्क पोपुलारिटी से, यह होता है ठीक वेसे ही, जेसे कोई बडा आदमी किसी के कन्धे पर हाथ रख दे तो तो उस बडे आदमी के व्यक्तीत्व व प्रभाव से साधारण व छोटे आदमी का भी कद उंचा हो जाता है । तो इस PR का बढ़ना ब घटना भी वेसी ही एक गणित है । बडे या ज्यादा PR वाली साईट ० PR वाली साईट को लिन्क करे तो छोटे को ० से 1 मिल जाता है पर ईसमें काफी वक्त भी लगता है। गुगल समय समय पर पी. आर. व बेकलिन्क, लिस्टेड पेजेस आदि की सुचना को अपडेट करता रहता है। समान विषय पर लिखने वाले एक दुसरे की साईट या ब्लाग को लिन्क करे तो ये बडी अच्छी बात है, ईससे दोनों का फायदा है।

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रिस्क हिन्दी फिल्म का रिव्यु

February 10th, 2007 · फिल्म रिव्यु

हां जी । तो अभी अभी हमने रिस्क फिल्म देखी है और यही कहना चाहते हैं, कि लम्बे समय के बाद विनोद खन्ना वापस आये है पर बेहतरीन अभिनय में ईनका कोई सानी नहीं है । फिल्म में रणदीप हुडा जो कि पहले “डी” में भी अपने अभिनय के जलवे दिखा चुके है वे बने है एक एनकाउन्टर स्पेशलिस्ट पुलिस आफिसर “सुर्यकान्त” जो कि हमेशा ईस तरह के दुष्ट लोगों के पीछे पडे रहते हैं । विनोद खन्ना का किरदार एक डान का किरदार है, जो कि बाहर के देश से अपने सारे काले धन्धे चलाता है । तनुश्री दत्ता ने श्रद्धा नाम कि लडकी का रोल किया है जो कि सु्र्यकान्त को चाहती है ।

कहानी काफी तेज गति से चलती हुई फिल्म को आगे ले जाती है । कुल मिला कर यह दिखाया गया है कि किस प्रकार से एक एनकाउन्टर स्पेशलिस्ट पुलिस आफिसर अपने रिस्क पर बडे बडे डान लोगों के काम तमाम करता है। डान, नेता, पुलिस वाले, या देखा जाए तो कोई भी व्यक्ती आज कि दुनिया में रिस्क लेकर ही आगे बढ़ता है और यही रिस्क का कमाल फिल्म में दिखाया गया है । विनोद खन्ना सभी कलाकारों पर हावी रहें है, व उन्होने अपने सशक्त अभिनय की एक अनोखी छाप छोडी है। डायलोग्स व गाने अच्छे (ठीक ठाक) है ।

  • अभिनेता कलाकारगण: विनोद खन्ना, रणदीप हुडा, तनुश्री द्त्ता एवं अन्य

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