Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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भारत का गणतंत्र दिवस

January 26th, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, नई खबरें

हर वर्ष की भांति इस बार फिर से गणतंत्र दिवस आ गया है, यह दिन हे देशभक्ति के गीत सुनने का, देश की आजादी की लडाई में काम आ चुके शहीदों को याद करने का । यह दिन हे स्कुलों व सरकारी कार्यालयों मे बडे लोगों (जो हाई डोनेशन दे सके) द्वारा झण्डारोहण करवाने का, यह दिन हे मोटी तोदं वाले नेताओं के उबाउ भाषण सुनने का, यह दिन हे पी. टी. , परेड व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का, यह दिन है तरह तरह की झाँकिया देखने का, यह दिन हे छोटे छोटे बच्चों की परेड का, यह वही दिन हे जब स्कुलों मे मिठाईयां बांटी जाती है, मुट्ठी भर बुन्दी (या कोई भी मिठाई) जो कोई बच्चा शायद अपने घर पर खाए या नहीं, पर ईस दिन तो बच्चों को वो चंद बुन्दी के दाने भी ईतने स्वादिष्ट लगते हें जेसे दुनिया में ईससे बहतर कोई मिठाई ही ना हो ।

तो आईये, आज 26 जनवरी के दिन हम सब मिल कर फिर से एक बार वन्दे मातरम् गाते हैं, व अपने देश भारत के विकास के प्रति हर रुप से कटिबद्ध होने का स्कल्प लेते है, सिर्फ युं ही उपरी मन से नही अपने अन्तर्मन से व अपनी आत्मा से। हम सब मिल कर आज के दिन कम से कम एक छोटा सा प्रण लेवें कि हम अपने देश की राष्ट्रीय सम्पत्ति को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाएँगें ।

सभी को एक बार फिर से हमारे गणतंत्र दिवस की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ ।

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चश्में का चक्कर

January 25th, 2007 · नई खबरें, हास्य

कुछ समय पुर्व हमारे एक पहचान वाले बुजुर्ग व्यक्ति की मृत्यु हो गई । उनके शव को नहला धुला कर शवयात्रा के लिये तैयार किया गया। सब लोग बडे गमगीन माहोल में उनकी शवयात्रा की तैयारियां कर रहे थे । खासतौर पर उनके परिवारजन व पडौसी सचमुच काफी दुखी थे । कई लोग तरह तरह की बातें भी कर रहे थे जैसे – अच्छे आदमी थे, पर वृद्ध भी थे, शरीर ने उनका साथ छौड दिया बाकी वे बडे अच्छे आदमी थे, वगेरह वगेरह।

एक बडी अजीब सी बात हुई उस दौरान जब उनकी शवयात्रा की सारी तेयारियां हो चुकी थी, तो मृतक की पत्नी बाहर आयी व उन्होने आकर अपने मृत पति के चेहरे पर चश्मा लगा दिया ताकी वे और भी ज्यादा अच्छे लगे । फिर थोडी देर में शवयात्रा उनके घर से रवाना हुई । सारा कार्य विधी विधान से सम्पन्न हुआ व अन्त में सब लोग अपने अपने घरों पर गए। काफी दिनों के बाद जब ईस चश्मा पहनाने की घटना का किसी के द्वारा फिर से जिक्र किया गया तब परिवार के ही एक और अन्य बुजु्र्ग व्यक्ती ने कहा कि क्या तुम्हे पता है उनको (मृत व्यक्ती के बारे में) उनकी पत्नी ने आखिरी या्त्रा के दोरान चश्मा क्यों पहनाया ?

कोई भी जवाब नहीं दे पा रहा था, घर में । भला किसे पता था की मृतक को उनकी पत्नी ने शवया्त्रा के दोरान चश्मा क्यों पहनाया ।

स्थिती संभालते हुए उन्होने (बुजु्र्ग व्यक्ती ने) कहा कि, आखिर उन्होनें अपनी आंखों की कमजोरी के कारण जिन्दगी भर चश्मा पहना, तो जाहिर सी बात है कि वे बगेर चश्मे के अपनी पत्नी को पहचानेगें कैसे ? उन्हें चश्मा ईसलिये लगाया गया ताकी वे (मृतक) फिर से ढ़ंढ़ते हुए उनकी पत्नी को पहचान ले व उनके पास आ जाएँ । गम के ईस माहोल में भी परिवार के सदस्य अपनी हंसी को चेहरे पर आने से रोक नहीं पाए ।

एक छोटा सा डिस्क्लेमर –
ईस घटना का किसी से भी, कोई ताल्लुक नहीं हे, सो कोई अपने दिल पर ना ले। घटना चाहे अच्छी हो या बुरी पर कभी कभी उसमें से भी हास्य निकल उठता है। यह सिर्फ एक घटना मात्र है, जो आपके, हमारे, सभी के साथ हो सकती है ।

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मीडीया के लोगों पर आम जनता की धारणा

January 23rd, 2007 · नई खबरें

कभी सोचता हुं, क्या लिखुं, ईस विषय पर लिखुं या उस विषय पर । खेर, कुछ ना कुछ तो मन की भडास निकालनी ही होगी । अभी तो ये हाल है कि, हर कोई एश्वर्याअभिषेक की शादी के बारे में चर्चाएँ कर रहा हे । जो टी. वी. चैनल खोलो वहां पर ये का ये ही आ रहा हे । आखिर ये मीडीया वाले किसी कि निजी जिन्दगी को निजी क्यों नहीं रहने देते । भला ये क्यों किसी सफल व बडे व्यक्ती के पीछे हाथ धो कर पड जाते हें।

ले दे कर फलां नेता को सर्दी लग गई, फलां नेता या बडा आदमी बीमार हो गया ये तो होती है टी. वी. चैनलों की हाट न्युज । और कहीं पर लोग सर्दी से मर रहें हें, कोई भुखमरी, रिश्वतखोरी व भष्ट नेताओं जेसी बडी समस्याओं के खिलाफ लड रहा हे, उनका कोई कुछ नहीं । पता नहीं मीडीया के प्रति आम जनता की क्या धारणा है, कहिये आप क्या कहते हें ।

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D से शुरु होने वाले भारतीय बच्चों के हिन्दी नाम

January 23rd, 2007 · बच्चों के हिन्दी नाम

D से शुरु होने वाले भारतीय लडकों के हिन्दी में नाम –

दामोदर –
देवदास –
दत्ता्त्रेय –
देवकुमार – 
देवनाथ –
देवेन्द्र –
दिपेन –
दिपांशु –
दीपक –
दिनकर –
दिव्य –
देवेश –
देवनारायण –
धनंन्जय –
धर्मेन्द्र –
धर्मराज –
धवल –
धरमवीर –
धीर –
धीरेन्द्र –
दिनेश –
धीरज –
दिवाकर –
द्रुपद –
दिलावर –
दिव्यागं – [Read more →]

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शेखर कपूर का ब्लाग

January 21st, 2007 · नई खबरें

जब से हमने शेखर कपूर साहब का ब्लाग पढ़ा है, बस हम तो मियां उनके फेन हो गए। हम तो अब तक यह समझते रहे की यह ब्लागिंग का काम तो हमारे जैसे ठाले और फुरसतिया किस्म के लोग ही करते हैं। पर हमारी यह सोच तो गलत निकली । यहां हमारे भारत के तो कई बडे बडे लोग भी हैं जो खुद ब्लाग लिखते हें, व ए॓सा लिखते हैं कि बस

उनके ब्लाग की थोडी बहुत पोस्ट्स पढ़ने पर समझ में आता है कि, उस तरह के बडे व्यक्तित्व का सोचने का नजरिया व लाईफस्टाईल कैसी होगी। वाकई में वे बहुत ही उम्दा लिखते हैं । उन्होने यहां अपनी फिल्मों के बारे में लिखा है, तो कहीं छोटी कहानियां, कविताएं व थोडा ह्युमर पर भी लिखा है। पढ़िये और जानिये शेखर कपूर साहब को ।

  • तो आईये जनाब, नजर डालिये फिल्मी दुनिया की एक महशुर हस्ती शेखर कपूर जी के ब्लाग पर । जरा इस लिन्क पर क्लिक किजीये ।
    http://www.shekharkapur.com/blog/welcome.htm

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