Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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वर्डप्रेस को 2.0.5 से 2.0.7 अपडेट कैसे करें

January 20th, 2007 · तकनिकी

अरे भईया ई का, वर्डप्रेस का नया वर्जन आई गवा । हम तो अब तक अपने www.rajsamanddistrict.com पर तो वर्डप्रेस का पुराना वाला 2.0.5 वर्जन ही लगा कर बैठे थे, पता ही नहीं चला और उन्होने ससुरा नया वर्जनुआ भी बना डाला (हर नये वर्जन मे पिछले से कुछ नए खास अपडेट्स वगेरह होते है, और पाए गए बग्स भी फिक्स किये जाते हैं ) ये वर्डप्रेस वाले तो सभी को कहते हैं, कि वर्डप्रेस को अपडेटेड कर लेवें, पर हमारी ससुरी हिम्मत नहीं होती । पर इस बार हम भी सीना तान कर (32″ का है तो क्या हुआ) और कमर कस कर तैयार हो गए की बिना किसी कि मदद के हम अपने वर्डप्रेस  के 2.0.5 वर्जन को 2.0.7 अपडेट कर के ही मानेंगे । अपनी कोशिश पुरी करेंगे, चाहे कामयाबी मिले या नहीं। बाद की बाद में देखी रहेगी यह सोच कर हमने कदम बढ़ाया । इन्टरनेट पर कुछ इधर उधर घुम ही रहे थे कि अपने जितु जी कि यह पोस्ट मिल गई । वर्डप्रेस 2.0.4 से 2.0.5 के अपग्रेड का तरीका ‍ डुबते को क्या चाहिये था, तिनके का सहारा, सरकार हम तो लटक लिये । इस पोस्ट को पुरा कई बार पढ़ा एक एक बात को गहराई से समझा । साथ ही साथ वर्डप्रेस का वर्जन अपडेट के बारे में http://codex.wordpress.org/Upgrading_WordPress भी पढ़ा । सब कुछ समझा ।

फिर काम चालू किया । सबसे पहले डाटाबेस का व सारी फाईलों का बेकअप लिया गया । फिर सारे प्लग ईन्स को डी एक्टिवेट किया । पर चुंकि हम अभी तक रिलायंस का मोबाईल हेडंसेट इस्तेमाल कर रहें हें, तो नेट की स्पीड काफी कम है सिर्फ 112 Kbps.ईन सब कामों मे काफी वक्त लगा पर हम भी पक्के खिलाडी थे, पुरी तरह से डटे रहे । फिर वर्डप्रेस का 2.0.7 वर्जन डाउनलोड किया गया । बाद में डिटेल्ड इन्सट्रक्शन http://codex.wordpress.org/Upgrading_WordPress#Detailed_Instructions पढ़ते हुए फाईलों व फोल्डरों को सर्वर पर से हटाया व बाद में नए वाले वर्डप्रेस के 2.0.7 वर्जन की फाईलों व फोल्डरों को वहां व्यवस्थित डाला गया ।
सारा कार्य होने के बाद http://example.com/wp-admin/upgrade.php के उदाहरण की तरह जैसे ही हमने कमाण्ड दिया की यह सिर्फ एक स्टेप में ही अपडेट हो गया । बाद में क्या करना था बस एडमिन में जाकर परमालिन्क्स को अपडेट करना । लिजिये बस हो गया काम । तो  साथीयों आप भी हिम्मत करिये और बदल डालिये (अपडेट कर डालिये अपने चहेते वर्डप्रेस को) कुछ भी तकलीफ हो तो http://codex.wordpress.org/Upgrading_WordPress#Detailed_Instructions को अच्छी तरह से पढ़ें ।

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कांकरोली का गुप्तेश्वर महादेव मंदिर

January 18th, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला

राजसमन्द के कांकरोली में राजकीय बालकृष्ण विधाभवन उच्च माध्यमिक विधालय के पास ही स्थित है, गुप्तेश्वर महादेव का पवित्र व बहुत प्राचीन मंदिर । यह मंदिर कांकरोली के महत्वपुर्ण शिव मंदिरों में से एक है । यहां के कई स्थानिय आस्थावान लोग, व्यापारीगण एवं महिलाएँ तो रोजाना प्रातः यहां दर्शनों के लिये गुप्तेश्वर महादेव मंदिर आते है् । यह राजसमन्द की पाल के दुसरी तरफ बना हुआ है व ईस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यह अतिप्राचीन लगभग 950 वर्ष पुराना मंदिर है। मंदिर में अन्दर जाने हेतु एक संकरी सी लम्बी गुफा में से होकर जाना पडता है, और यह गुफा करीब 65 फीट लम्बी है । अन्त में गोलाकार मंदिर आता है, ईसकी परिक्रमा भी है । दर्शनार्थी जो यहां दर्शन के लिये आते हैं, वे परिक्रमा भी करते है । इस मंदिर में जाने व दर्शन मात्र करने से एक बहुत अलग सा एहसास होता है व मन को काफी शान्ति मिलती है ।

महाशिवरात्री के पावन पर्व पर यहां दर्शनों के लिये सर्वाधिक भीड लगती है । उस दौरान यहां एक बडे मेले का सा माहोल होता है, मंदिर के बाहर ही फूल मालाएं, बिल्व पत्र व आकडे के फुलों की माला वाले, नारियल वाले, रंग बिरंगे गुब्बारे वाले, तरह तरह के खिलोने वाले आदि यकायक जाने कहीं से आ जाते है । मंदिर में भी व्यवस्था बनाए रखने के लिये रेलिंग वगेरह लगाई जाती है, ताकि दर्शन करने वाले एक लाईन मे चलते हुए शिवजी के दर्शन कर पाएं । युं तो मंदिर में भगवान शिव की पुजा, श्रंगार, आरती आदि रोजाना ही की जाती है पर ईस महाशिवरात्री के त्योहार के मौके पर खास श्रंगार किया जाता है व फिर दर्शन होते हैं । पुजारी एवं स्वयंसेवी लोगों द्वारा प्रसाद, चरणामृत आदि भी दर्शनार्थीयों को दिया जाता है 

भजन भक्तगण “बम बम भोले” करते रहते है, शिव स्तुति व भजन गाते हैं,  और शिवलिंग के दर्शनों का लुत्फ लेते हैं । कई शौकीन लोग शिवजी का विशेष प्रसाद “भांग” भी लेते हैं व मस्ती में तल्लीन रहते हैं, क्योंकि यह दिन हे ही भोले बाबा एवं उनके भक्तों के नाम । महाशिवरात्री के मौके पर तो यहां दर्शन करना बडा भारी काम हो ए॓सा लगता है ।  लाईन में लगना, धीरे धीरे भीड में से होकर मंदिर मे जाना, कहने का अभिप्राय यह हे कि भगवान भी युं ही दर्शन नहीं देते हें, काफी भक्ती करवाते है । वेसे इतनी भीड में जुते चोरी हो जाने का या फिर बटुआ कोई पार ना कर ले, इसका डर बना रहता है। पर यह भोले बाबा के भक्तगणों की अटूट आस्था है, कि वे कम से कम महाशिवरात्री के इस पावन पर्व तो एक बार शिव दर्शन करें ही करें ।

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कांकरोली का साक्षी गोपाल मंदिर

January 18th, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला

कांकरोली में दरवाजे के बाहर ही स्थित है, साक्षी गोपाल मंदिर । यह भी काफी पुराना व प्रसिद्ध भगवान कृष्ण का मंदिर है। काफी आस्थावान लोग यहां दर्शन करने आते है । गोपाल यानी कृष्ण भगवान को सजाया संवारा जाता है, ततपश्चात आरती, पुजा एवं दर्शन आदि होते हैं । यहां के स्थानिय कई लोगों की ईस मंदिर के प्रति बडी आस्था है ।

युं तो रोजाना ही दर्शन, पुजा, आरती वगेरह होते है । पर खास तौर से कृष्ण जन्माष्टमी या इस तरह के प्रसिद्ध त्योहारों पर यहां विशेष दर्शन होते है । भगवान कृष्ण विशेष रुप से सजाया संवारा जाता है फिर भोग, आरती व पुजा वगेरह होती है । अन्नकूट व छप्पनभोग मनोरथ के समय भी यहां दर्शनार्थीयों की खासी भीड होती है। छप्पनभोग के दौरान छप्पन तरह के विभीन्न व्यंझन बनाए जाते हें व भगवान को भोग लगाया जाता है । 

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कुंभलगढ़ फेस्टिवल राजसमन्द

January 16th, 2007 · उत्सव एवं त्योहार, प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला

अभी अभी कुछ समय पहले राजसमन्द जिला प्रशासन के सहयोग द्वारा कुंभलगढ़ में दो दिवसीय कुंभलगढ़ फेस्टिवल का आयोजन किया गया था । अब यह कुंभलगढ़ फेस्टिवल का आयोजन हर वर्ष किया जाएगा । कुंभलगढ़ राजसमन्द के बेहतरीन पर्यटन स्थल के रुप में विख्यात है। यहां हर रोज कई देशी विदेशी पर्यटक आते हैं । दिसम्बर महिने में क्रिसमस के आसपास ईस कुंभलगढ़ फेस्टिवल का आयोजन किया गया और अब से यह हर साल ईन्ही दिनों में मनाया जाएगा, ए॓सा कहा गया ।

कुंभलगढ़ के किले को भी अब काफी सजाया संवारा जा चुका है, हरी भरी घास, अच्छी लाईटिंग, पानी, जगह जगह डस्टबिन, लोहे की रेलिंग, पुरी तरह से साफ सफाई, एसिड वाश (मंदिरो के खंभे,पुरानी हर खुदाई वाले भवन की) आदि होने से यह प्राचीन किला और भी निखर उठा है। कहा गया है कि सरकार नें कुभंलगढ़ (क्योंकि यह राजसमन्द में एतिहासीक महत्व की एक बडी खास धरोहर है) के विकास हेतु काफी अच्छा बजट रखा गया है । अब तो वाहन पार्किंग व टिकट आदि की भी व्यवस्था की गई है। यहां कुंभलगढ़ में हर रोजाना करीब 250 देशी व विदेशी पर्यटक आते हैं । मुख्य आयोजन व छुट्टियों के दौरान यह संख्या काफी बढ़ भी जाती है व पर्यटकों की आवाजाही लगी ही रहती है ।

कुंभलगढ़ फेस्टिवल के आयोजन के दौरान यहां कई प्रकार की प्रतियोगिताएँ रखी गई जिनमें से देशी व विदेशी पर्यटकों के बीच रस्साकशी व जल्दी पगडी बांधने की प्रतियोगिताएं मुख्य थी । जिला प्रशासन का ईस अयोजन में सक्रिय सहयोग रहा और ईसके प्रचार प्रसार के लिये काफी दिन पहले से ही तैयारियां कि गई थी, ताकी यहां ज्यादा से ज्यादा सख्या में पर्यटक पहुंच सके । यहां के माननीय जिला कलक्टर महोदय व अन्य अधिकारीगण भी कुंभलगढ़ फेस्टिवल में गए थे। कुंभलगढ़ फेस्टिवल का आयोजन सफल रहा या नहीं रहा, यह तो वे लोग ही ज्यादा बेहतर तरीके से बता सकते हैं जो उस दौरान वहां भ्रमण के लिये गए थे। हमारी तो यही कामना है कि कुंभलगढ़ फेस्टिवल आने वाले दिनों में एक बेहतरीन आयोजन के रुप में देश विदेश में ख्याति पाए। बाहर के पर्यटकों के यहां आने से ईस जगह का विकास भी होगा ।

कुंभलगढ़ फेस्टिवल राजसमन्दकुंभलगढ़ फेस्टिवल में सांस्कृतिक प्रोग्राम जेसे राजस्थानी नृत्य, राजस्थानी संगीत आदि का भी आयोजन किया गया था। विदेशी पर्यटकों नें भी जल्दी पगडी बांधने की रेस में हिस्सा लिया और ईस कुंभलगढ़ फेस्टिवल को काफी एन्जाय किया ।

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E से शुरु होने वाले भारतीय बच्चों के हिन्दी नाम

January 14th, 2007 · बच्चों के हिन्दी नाम

E से शुरु होने वाले भारतीय लडकों के हिन्दी में नाम –

ईश्वरदत्त  –
ईश्वर  – भगवान
ईश – भगवान
एकलव्य – एक महान शिष्य
एश्वर्य  – सुख
एकलिंग – भगवान शिव
एकलिंगनाथ – भगवान शिव
एकदन्त – भगवान गणेश
एकचित्त  –
एकाम्बर –
एकनाथ –
एकान्ग –

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