Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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एक पहेली नसीरुद्दीन शाह की कुछ फिल्मों को लेकर

July 13th, 2013 · उलझन

एक पहेली नसीरुद्दीन शाह की कुछ फिल्मों को लेकर

मुझे अभी नसीरुद्दीन शाह की बेस्ट फिल्मे देखने का बुखार चढ़ा हुआ हे, इसी कोशिश में मेनें एक बहुत जोरदार चीज को पकडा | की नसीर साहब कि कुछ फिल्मों में हर हीरोइन वीणा या सितार बजाते हुए गाने गाती है, और गाने भी ए॓से ए॓से की दिल को छू जाए | तो नसीर साहब कि एक से अधिक फिल्मों में ये अभिनेत्रीयां वीणा या सितार बजाती हैं, और जब में नसीर साहब की एक के बाद एक फिल्में देख रहा हूं तो ये सब मुझे एक पहेली के जैसा लग रहा हैं |

जैसे कीः

khli hath

khli hath

फिल्म इजाजत में रेखा गाती हें खाली हाथ शाम आई हे
badi dheere

badi dheere

फिल्म इश्किया में विध्या बालन गाती हैं बडी धीरे जली
khali pyala

khali pyala

फिल्म स्पर्श में शबाना आजमी भी एक गाना गाती हैं खाली प्याला धूंधला दर्पण
तीनो गानो के फोटो भी साथ हैं ताकि याद आ जाये | या तो ये बडा जोरदार इत्तेफाक हैं, या फिर हो सकता है कि इसके पीछे जरुर कोई खास कहानी है | या फिर इत्तेफाक से मुझे नसीरुद्दीन शाह का कोइ धुरंधर फैन कभी मिल जाये, तो वो ही बता सकता हैं कि इस पहेली के पीछे क्या खास बात है |
और एक बात गुलजार साहब के बारे में, वे भी वाकई गुलजार है, फिल्म इजाजत के “मेरा कुछ सामान” गीत में कुछ पंक्तियां लिखी हैं, पंक्तियां भी क्या खूब हैं कि दिल को छू जाती हें |

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पडा हैः 

एक दफा वो याद है तुमको, बिन बत्ती जब साईकिल का चालान हुआ था |
हमने कैसे भूखे प्यासे बेचारों सी एक्टिंग की थी,
हवलदार ने उल्टा एक अठन्नी दे कर भेज दिया था
एक चवन्नी मेरी थी, वो भिजवा दो……………………….. गुलजार

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बदला लेना क्या इंसानी प्रवृर्ति है

July 6th, 2013 · उलझन

बदला लेना क्या इंसानी प्रवृर्ति हैं

हां शायद बदला लेना इंसानी प्रवृर्ति ही तो हैं, मान लो कोई व्यक्ति आपका अहित करता हैं, आपको नीचा दिखाता हैं और आप उसे फुलों के हार पहनाओ , मुझे तो ये ठीक नहीं लगता, शायद इसलिये ही कहा गया है कि बदला लेना इंसानी प्रवृर्ति हैं, जो सब कुछ माफ कर दे वो भगवान ही हो सकता हैं और आज के दौर में भगवान बना नहीं जा सकता, अपन तो इंसान ही भले |

कहते हें कि जो लोग प्रभू यीशू के विरोधी थै और उन्हें क्रोस पर लटकाने को ले जा रहे थे उस समय भी यीशू एकदम शांत मना थे, और उन्होनें कहा था की हे इश्वर ये लोग नहीं जानते कि ये क्या करने जा रहे हैं इन्हें माफ करना | कितने सही थे वे | और ये भी कहा जाता हैं कि किसी को माफ कर दो इससे बडी कोई सजा भी नहीं हो सकती हैं | जो सोचता है कि मुझसे गलती हुई है और चाहता है कि मुझे सजा मिले पर उसे माफ करो, बडा दिल रखते हुए की चल जा बे तू मेरे लिये कुछ मायने ही नहीं रखता |

पर आज के जमाने में ये संभव नहीं है, जब छोटे थे तब स्कूल के जमाने में एक दोस्त की कापी के पहले पन्ने पर से एक छंद मेंने पढ़ा, में उसे पढ़ कर बहुत हसां था | वो दोहा या छ्दं मुझे अभी भी याद आता हेः

जो तोको कांटा बोए, वाके बोओ भाला |
वो साला क्या याद करेगा, पडा किसी से पाला ||

वाह, वाह क्या खूब लिखा था ना | दिल कि भडास निकलनी ही चाहिये नहीं तो कहीं ये कोई रोग ना पैदा कर दे | लोग कुछ गलत सलत सोचें तो हमें क्या ?

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पांच दिवसीय भव्य गणगौर महोत्सव

April 10th, 2013 · उत्सव एवं त्योहार

पांच दिवसीय भव्य गणगौर महोत्सव, कांकरोली राजसमन्द

हर साल की तरह ही इस बार भी भव्य गणगौर महोत्सव के आयोजन के दिन नजदीक आ गये हैं, कांकरोली राजसमन्द के बालकृष्ण स्टेडियम में गणगौर महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम होगें | ये गणगौर महोत्सव का त्योहार हमारे शहर कांकरोली में बडे ही भव्य तरीके से मनाया जाता हैं| रोजाना शाम को मंदिर से विविध तरह की सवारियां निकलती है जो मेला स्थल तक पहुंचती हैं |

रोजाना शाम से देर रात तक विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे डांस, नाटक, कवि सम्मेलन, गीत, कामेडी आदि तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं | साथ ही भव्य मेंला दूसरी तरफ होता हैं, जहां विभिन्न मनोरंजन के साजो सामान होते हैं | तो आगामी त्यौहार गणगौर के विविध कार्यक्रम देखना ना भुलियेगा |

पांच दिवसीय भव्य गणगौर महोत्सव के कार्यक्रम:

पांच दिवसीय भव्य गणगौर महोत्सव, कांकरोली

मेला स्थलः बालकृष्ण स्टेडियम, कांकरोली राजसमन्द

तारीखः 11 से 15 अप्रेल

तीन दिन हरी गणगौर, गुलाबी गणगौर और चुन्दडी गणगौर की सवारी शाम पांच बजे मंदिर प्रागण से शुरु होगी जो शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई बालकृष्ण स्टेडियम कांकरोली तक पहुंचेगी |

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रात के हमसफर …. थक के घर को चले

March 30th, 2013 · फिल्म और गीत

शंकर जयकिशन जोडी अपने आप में कमाल की संगीतकार जोडी थी, और ये लोग कभी ना मिटने वाला काम कर गये हैं, अतिशय नहीं हे कि इनका नाम अमर रहेगा | इस जोडी के शंकर का कंपोस्ड किया हुआ ये एक बेहतरीन गीत है ………..रात के हमसफर …. थक के घर को चले|

इस अमर गीत कर पीछे एक कहानी भी हे शंकर को अपनी मां से बडा प्रेम था, और हो भी क्यूं ना, कलाकार लोग बहुत भावुक होते हैं और उन्होने बचपन में अपनी मां से सुनी लोरीयों की मिठास को अपने खुद में पाया था | मां की मृत्यु और फनरल के कुछ बाद, बडे ही उदासी व दुख भरे माहौल में उन्होनें फिर से काम शुरु किया |

गीतकार शेलेन्द्र और शंकर जी ने कमाल की कलाकारी दिखाई हें इस गाने में, उस पर से रफी साहब और आशा जी की आवाज | आज लगभग पचास साल बाद भी इस गाने में वही शहद सी मिठास है | एक एक शब्द व गाने की धुन अनमोल है | ‘गिटार’ का जोरदार प्रभावी प्रयोग इस गीत में हमें सुनने को मिलता है | शम्मी कपूर की स्टाईल, पेरिस की रात के नजारे, आशा जी व रफी सा. की आवाज, शंकर जी की कंपोजिशन, सबकुछ जब एक साथ मिले को अनमोल रचना बनी | आप भी सुनिये……

फिल्म का नामः एन इवनिंग इन पेरिस
संगीतकारः शंकर जयकिशन
गीतकारः शेलेन्द्र
गायकः मो. रफी जी, आशा भोंसले
अभिनेता अभिनेत्रीः शम्मी कपूर एवं शर्मिला टेगोर जी

रात के हमसफर …. थक के घर को चले

रात के हमसफ़र, थक के घर को चले
झूमती आ रही, हैं सुबह प्यार की
देख कर सामने रूप की रौशनी
फिर लूटी जा रही, हैं सुबह प्यार की

सोने वालों को हँस कर जगाना भी हैं
रात के जागतों को सुलाना भी हैं
देती हैं जागने की सदा साथ ही
लोरीयाँ गा रही है, सुबह प्यार की

रात ने प्यार के जाम, भर कर दिए
आँखों आँखों से जो मैंने तुमने पिए
होश तो अब तलक जा के लौटे नहीं
और क्या ला रही है, सुबह प्यार की

क्या क्या वादे हुए, किस ने खाई कसम
इस नयी राह पर, हम ने रखे कदम
छूप सका प्यार कब, हम छूपाये तो क्या
सब समझ पा रही है, सुबह प्यार की

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कुछ दिलचस्प उत्पादों के नाम, जो छा गये बाजारों में

January 26th, 2013 · व्यापार व्यवसाय

व्यापार के मामले में कहा जाता है कि अपने अच्छे उत्पादों और वाजीब दाम में उत्कृष्ठ सेवाओं से ही कोई कंपनी शीर्ष पर पहुंच सकती हैं, परन्तु काम करने के दौरान हमें व्यावहारिक जीवन में कई छोटी बडी समस्याएं आती हैं,  और उनको भी समान दृष्टि से देखते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहना और अपने उत्पाद को और ज्यादा अच्छा व विशिष्ट बना डालना सचमुच बहुत बडी बात हैं |
बडे महान थे वे लोग जिन्होनें अपने जीवन मे इतना श्रम किया, इतना श्रम किया कि उनके उत्पाद ही अपने आप में ब्रांड हो गये | इतने बिके, इतने बिके की जन जन की जुबान पर उन प्राडक्टस के नाम हैं | वेसे ये बडी ही छोटी लिस्ट हैं, बाकी यूं तो दुनिया में ए॓से उंचाईयों को छूने वाले उत्पाद और कंपनीयों के काफी सारे नाम हैं | तो यहां प्रस्तुत है कुछ ए॓से ही उत्पादों की एक सू्ची |

कुछ दिलचस्प उत्पाद जो इतने चले कि अपने आप में ब्रांड हो गयेः

डालडाः डालडा का वनस्पति घी किसे याद नहीं होगा, कंपनी के इस उत्पाद को लोगों नें सिर आंखों पर चढ़ाया, एक जमाने मे डालडा वनस्पति घी इतना बिका की सारे रिकार्ड टूट गये, आज भी कोई महिला वनस्पति घी लेने बाजार जा रही होती है …. चाहे वो कोई भी कंपनी का वनस्पति घी खरीदने जा रही हो पर

surf

surf

पडोसन से यही कहेगी डालडा लेने जा रही हूं |

सर्फः सर्फ कपडों की धुलाई का पाउडर हैं और इस उत्पाद की ए॓सी धूम है कि ये नाम से ही चलता हैं,  आज भी कोई व्यक्ति वाशिंग पाउडर लेने बाजार जा रहा होता है …. चाहे वो कोई भी कंपनी का वाशिंग पाउडर खरीदने जा रहा हो पर कहेगा यही कि सर्फ लेने जा रहा हूं |
मोबिल आयलः बोलचाल में मोबिल आयल जिसे कहा जाता हैं ये एक कंपनी का तेल होता था, पर अभी कोई भी कार सर्विस कराये तो मिस्त्री मोबिल आयल कौनसा डालने वाला है ये जरुर पूछता हैं |
एस्पिरिनः एस्पिरिन तुरंत राहत देने वाली दर्दनिवारक गोली होती हैं, पर आजकल कोई भी सरदर्द बदनदर्द होने पर चाहे और किसी ब्रांड की गोली भी खा रहा हो, कहेगा यही कि एस्पिरिन ली है, अब ठीक हो जाउंगा | ए॓से और भी उदाहरण हैं, जैसे कोई व्यक्ति बहुत से सवाल करता हो, दिमाग खाता हो तो मित्र लोग उसे झंडु कहते है या  फिर कहेंगे कि ये लो इस एनासिन की ही कमी थी, अब ये भी आ गया |
बैंड एडः ये एक पट्टी होती हैं जो कि छोटी मोटी चोट लगने पर चिपका दी जाती हैं अब चाहे कोई भी ब्रांड की पट्टी बच्चों को लगाई जा रही हो पर लोग बोलचाल की भाषा में कहते यही हैं कि बच्चे को बैंड एड लगवा के आया हूं |
जीपः जीप हकीकत में एक वाहन कंपनी हैं, पर चौपहिया आफ रोडर सवारी को बोलचाल की भाषा में जीप ही कहा जाता रहा है |
निरमाः ए॓सा ही वाशिंग पाउडर निरमा के साथ भी हैं, निरमा का नाम आते ही कोई भी वाशिंग पाउडर निरमा ही याद करेगा, अब चाहे निरमा नाम से ही कोई बडे कालेज या कंपनीयां भी चल रही हो पर निरमा एक वाशिंग पाउडर का पर्याय बन चुका हैं |
i-pod

i-pod

आई पोडः भारतीय बाजारों में आई पोड, यानी कोई भी एम पी थ्री प्लेयर जिस पर गाने सुने जा सकें | अक्सर एप्पल के प्राडक्ट कुछ महंगे होते है और ए॓से में चाईनीज एम पी थ्री प्लेयर भी बाजारों में बिकते हैं, पर बच्चे पूछते यही हैं कि भैया आई पोड है क्या ? ए॓सा ही कुछ सोनी कंपनी के वाकमेन के साथ भी है, सोनी ने अपने कैसेट प्लेयर का नाम वाकमेन रक्खा था पर अब कोई व्यक्ति चलते फिरते हुए संगीत सुनने वाला कोई भी यन्त्र खरीदे, कहेगा यही कि वाकमेन लाया हूं |

जिलेट रेजरः जिलेट एक बहुत बडी कंपनी है जो शेवर रेजर आदि बनाती हैं और रेजर करके एक रेडी शेवर उन्होने निकाला था, अब कोई भी डाढ़ी बनवाने का उस्तरा खरीदे बोलेगा यही कि रेजर लाया हूं |
बिस्लरीः बिस्लरी का मिनरल वाटर नाम से शुद्ध पानी आता हैं और ये हर छोटी मोटी दुकान पर सुलभ उपलब्ध हैं , अब ये मिनरल वाटर का पर्याय बन चुका हैं, कवि लोग कहते हैं ना कि नेता पीये बिस्लरी, और हम पीये नलके का गंदा पानी |
कोलगेटः कोलगेट एक प्रसिद् टूथपेस्ट हैं, जो किसी भी टूथपेस्ट कंपनी से पीछे नहीं हें, कोई किसी भी कंपनी का टूथपेस्ट लेने जा रहा हो वह कहेगा यही कि भई कोलगेट लेने जा रहा हूं |
जिरोक्स: जिरोक्स एक कंपनी है जो कि प्रिन्टर, फोटोकोपी मशीन आदि बनाती है, फोटोकोपी मशीनें जिरोक्स की इतने प्रचलन में आयी कि कोई भी फोटोकोपी कराने जाता हो कहता है कि जिरोक्स कराने जा रहा हूं |
वेसलीनः वेसलीन का नाम आते हैं हमें पेट्रोलियम जैली याद आती हे,अब बाजारों में चाहे कितने ही अलग अलग ब्रांड के वेसलीन पेट्रोलियम जैली मिलते हों पर हमें तो बस वेसलीन ही चाहिये होता हैं| [Read more →]

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