Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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मोलेला का मृण शिल्प

January 10th, 2007 · कला एवं शिल्प, राजसमन्द जिला

मोलेला गांव नाथद्धारा से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मोलेला गांव का मृण शिल्प या कह सकते है टेराकोटा आर्ट विश्व प्रसिद्ध है। यहां के कई कलाकार अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक जाकर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। मृण शिल्प और टेराकोटा की कला से यहां के कलाकार जैसे मिट्टी में भी प्राण फूंक देते हैं।  ये कलाकार अपने शिल्प से दिपावली के विभीन्न प्रकार के दीये, श्रीनाथजी, महाराणा प्रताप, हाथी, घोडे, बेल, दीपक के स्टेण्ड, गणेश जी, तरह तरह की घंटीयां, स्थानीय लोक देवताओं आदि के सजीव मृण शिल्प बनाते हैं ।

ये मोलेला के मृणशिल्पकार गीली मिट्टी को विभीन्न सांचों मे डालते हैं, बाद में कई तरह के भिन्न भिन्न औजारों के द्धारा उस शिल्प के रुप को ओर भी सजाया व संवारा जाता है । ततपश्चात ईसे आंच में पकाया जाता है, ताकि यह ओर भी अधिक मजबुत हो जाए । अन्त में टेराकोटा कलर, चुने व अन्य रंगों का उपयोग करते हुए ईसे ओर अधिक आकर्षक बनाया जाता है ।  बाहर से कई विदेशी सैलानी यहां आते है, और कई तो काफी दिन तक यहां रुककर ईन कलाकारों से खास ट्रेनिंग भी लेते हैं। ये कलाकार अपनी देखरेख में ईनको सिखाते भी हैं । टेराकोटा कला के यह विभीन्न नमुने आजकल बाजार में वृहद पेमाने पर बिकते हैं । चाहे खादी मेला हो, शिल्पग्राम उत्सव हो या कोई भी छोटा मोटा मेला या इस प्रकार का कोई आयोजन हो और वहां मोलेला का मृण शिल्प ना पहुंचे ए॓सा संभव ही नहीं है।

मोलेला का मृण शिल्पयहां के कई शिल्पकार विदेशों में भी जाकर आए है, अपनी ईस कलाकारी की वजह से और कई कलाकारों को तो राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मान जैसे ईनाम व प्रमाणपत्र आदि भी मिले हैं । यह गांव है तो छोटा सा गांव पर यहां के लोगों की अपनी इस अनोखी विधा में महारथ के कारण यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी एक अलग पहचान रखता है । सरकार द्धारा भी ईस ओर काफी प्रयास किये गए हैं ताकि इन मृणशिल्पकारों का जीवन स्तर थोडा उंचा उठे ।

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G से शुरु होने वाले भारतीय लडकों के हिन्दी नाम

January 8th, 2007 · बच्चों के हिन्दी नाम

G से शुरु होने वाले भारतीय लडकों के हिन्दी में नाम –

गिरिराज ‍- कृष्ण भगवान
गिरधर – कृष्ण भगवान
गोपाल – कृष्ण भगवान
गगन – आकाश
गजानन – भगवान गणेश जी
गणेश – गजानन भगवान
गुलजार – माली
गोविन्द – कृष्ण भगवान
गुरू – शिक्षा देने वाला
गणपति – गणेश
गालिब – एक महशुर शायर
गिरिश –
गुन्जन –
गुरप्रीत –
गगनदीप – 
गोपी –
गजेन्द्र –
गोपीचन्द –
गुलफाम –
गुलजारीलाल –
गोविन्दा –
गोपेश –
गोकुल –
गौतम –
गिरी –

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B से शुरु होने वाले भारतीय लडकों के हिन्दी नाम

January 8th, 2007 · बच्चों के हिन्दी नाम

B से शुरु होने वाले भारतीय लडकों के हिन्दी में नाम –

बंकेश –
बाबुल ‍-
बांके –
बाली – सुग्रीव के बडे भाई का नाम
बलराम – मजबूत / कृष्ण के बडे भाई
बलवीर – पराक्रमी
बालकृष्ण ‍- कृष्ण का बाल स्वरुप
बसन्त – बसन्त ऋतु
बन्धु – भाई या सखा
बन्सी – बांसुरी
भुदेव – पृथ्वी का देवता
भानु – सुर्य
भरत – शकुन्तला का पुत्र
भृगु – एक महान ऋषी का नाम
भूषण – 
भुवनेश – 
भव्य –
बृजेश ‍ –
भावेश –
भास्कर – सुर्य
भुपेन –
भीष्म – कठीन
भुपेश – 
भुवन –
भुपेन्द्र –

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C से शुरु होने वाले भारतीय लडकों के हिन्दी नाम

January 7th, 2007 · बच्चों के हिन्दी नाम

C से शुरु होने वाले भारतीय लडकों के हिन्दी में नाम –

चंचल  –
चम्पक – 
चपल  –
चन्दर –
चन्द्रकुमार –
चरणदास –
चेतन – जीवन
चमन – बगीचा
चरण – पांव या पैर
चदंन  – एक विशेष पेड जिसकी लकडी में खुशबु होती हे । 
चतर्भुज – चार हाथों वाला
चिराग – दिपक
चिरायु – लम्बी आयु वाला
चित्त – दिमाग
चेतन्य – एक महान सन्त का नाम
चिरंजीवी – लम्बी आयु वाला
चिन्मय –
चिदंबर –
चितरंजन –
चिन्तामणी –
चित्तेश –
चन्द्रेश –
चन्दु –
चन्द्रभान – 
चन्द्रमोहन –
चित्रसेन –
चन्द्रकान्त –
चन्द्रजीत –

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हल्दीघाटी का महाराणा प्रताप संग्रहालय

January 7th, 2007 · प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला

हल्दीघाटी पर चेतक स्मारक से कुछ ही कदमों की दुरी पर स्थित है यहां का महाराणा प्रताप संग्रहालय । अभी अभी में ईसका निर्माण हुआ है पर चू्किं यहां सारी सुविधाएं एक ही जगह पर है ईसलिये यह काफी प्रसिद्ध हो गया है । यह बनाया गया है उसी पुराने तरह के शिल्प से । सब कुछ जेसे काफी सहेज कर रखा गया हो ए॓सा प्रतीक होता है । यहां टिकट ले कर अंदर जाने से लेकर के बाहर आने तक सब कुछ काफी व्यवस्थित है।  रोजाना यहां काफी पर्यटक आते हैं।

यहां हर पन्द्रह मिनट में आने वालों को Light & Sound शो दिखाया जाता है जिसमें महाराणा प्रताप के जीवन विषयक लघुफिल्म दिखाई जाती हे, साथ ही विभीन्न शस्त्रों, फोटो, किताबों आदि की प्रदर्शनी भी दिखाई जाती हे । ततपश्चात बडे से एक नक्शे पर दिखाया जाता है, कि कहां युद्ध हुआ, राणा प्रताप के घोडे चेतक ने कहां उन्हें सकुशल पहुचाया आदि । आगे महाराणा प्रताप की जीवनी से सबंधित घटनाओं का सजीव ब्योरा दिखाया गया है उनमें पन्ना धाय के बलिदान की कहानी, महाराणा प्रताप का साथीयों के साथ युद्ध की तेयारी हेतु बातचीत, राणा प्रताप की जंगल में रहन सहन, घास की रोटी खाते हुए महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी के युद्ध के दोरान एक पावं से घायल चेतक का बलिदान आदि काफी अच्छे ढ़ंग से दिखाया गया है।

हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप का साथ देने वाले भीलू राजा, हकिम खां सुरी, राणा पुंजा, दानी भामाषाह आदि के यहां काफी अच्छे चित्रण  है । अन्त में हल्दीघाटी में गुलाब की खेती, गुलाबजल केसे बनता है आदि दिखाया जाता है । बाहर ही हस्तशिल्प, किताबें, चाय नाश्ता, गन्ने का रस, पारंपरिक पोशाको् में फोटोग्राफी, उंट व घोडे की सवारी एवं नौकायन आदि की सुविधाएं है । आज की आधुनिक तकनीकी को पुरातन संस्कृति में मिलाकर जो यह महाराणा प्रताप संग्रहालयताना बाना बनाया गया हे वह काफी आकर्षक लगता है । ए॓सा लगता है जेसे किसी ने उदयपुर के शिल्पग्राम से प्रेरित होकर यह सारा कार्य किया है, पर किसी से प्रेरणा लेना गलत नहीं है। ईतना स्टाफ, ईन सभी का रखरखाव, पर्यटकों को शो दिखाना आदि यह सारा काम ईतने व्यवस्थित तरीके से करना वाकई काबिल ए तारीफ है।

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