Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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देवीगढ़ पेलेस रिजोर्ट

January 7th, 2007 · कहां ठहरें, राजसमन्द जिला

देवीगढ़ पेलेस रिजोर्ट राजसमंद की एक बडी हेरीटेज होटल है जो देलवाडा के पास, राजसमंद में स्थित है । यह एक बहुत प्राचिन व बडा महल हे, जो कि अब एक हेरीटेज होटल के रुप में तब्दील कर दिया गया है । यहां लगभग सारी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं जेसे ड्राईक्लीन, करेन्सी एक्सचेंज, इन्टरनेट, फोटोकापी, किताबों व सी.डी. की लाईब्रेरी, डाक्टर आन काल, ठहरनें के लिये कमरे, तरह तरह के स्वादिष्ट भोजन, बार एवं लोकल साईट सीन आदि । यहां का स्पा भी काफी प्रसिद्ध है ।

कई देशी विदेशी पर्यटक यहां आते रहते हैं । अभी अभी सन 2006 में यहां अरुण नायर व लिज हर्ले आए थे। एकलव्य फिल्म कि युनिट भी कुछ समय शुटिंग के सिलसिले में यहां ठहरी थी जिसमें फिल्म इंडस्ट्री के अमिताभ बच्चन व सेफ अली खान जेसे दिग्गज कलाकार भी थे । रिलायंस परिवार की कोकिला बेन एवं ए॓सी ही कई बडी हस्तीयों के यहां राजसमंद के इसी हेरिटेज होटल में ठहरने के कारण यह देवीगढ़ पेलेस रिजोर्ट अखबारों की सुर्खीयों मे छाया रहता है ।

देवीगढ़ पेलेस रिजोर्ट, राजसमन्द जिले की सबसे भव्य होटलों में से एक है । यहां होने वाली शाही शादीयों के चर्चे काफी प्रसिद्ध हैं । देवीगढ़ से कुछ ही दुरी पर है, थोडे बहुत घुमने लायक स्थान जैसे बप्पा रावल, मेवाड में सभी के आराध्य एकलिंग जी का प्रसिद्ध मंदिर, सास बहू का मंदिर एवं केलाशपुरी तालाब आदि ।

विस्तृत जानकारी के लिये देवीगढ़ पेलेस रिजोर्ट की वेबसाईट देखेंhttp://www.deviresorts.com

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रणमुक्तेश्वर महादेव व प्रताप गुफा

January 6th, 2007 · प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला

हल्दीघाटी के ही रास्ते में आता है रणमुक्तेश्वर महादेव का मंदिर, यह मंदिर अपना एक अलग एतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि महाराणा प्रताप यहां गुफा में कुछ समय के लिये रुके थे, तब से यह प्रताप गुफा के नाम से भी जाना जाता है । रणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर का यह पवित्र मंदिर आज भी जैसे स्वाभिमानी राणा प्रताप की दास्तान बयान करता नजर आता है, धन्य हें वे लाल जिन्होने आजादी कि खातिर अपने सारे एशोआराम छोड दिये ।

महाराणा प्रताप के जीवन का एक बडा समय यहीं मेवाड के पहाडों व गुफाओं में ही बीता । रण या युद्ध से मुक्ति दिलाने वाले रणमुक्तेश्वर महादेव का मंदिर वाकई में काफी अनोखा है । यहां की गुफा में अधिकांशतः पानी बहता रहता है जो पहाडों में से होता हुआ जाने कहां से आता है । यहां रोजाना पुजा अर्चना आदि की जाती हे और विशेष मौके जेसे महाशिवरात्री या महाराणा प्रताप जयंति आदि पर खास दर्शन होते हैं । यहां ठहर कर कुछ पल रुकने मात्र से ही मन को असीम शांति मिलती है ।
रणमुक्तेश्वर महादेव व प्रताप गुफा

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टांटोल बांध

January 6th, 2007 · प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला

टांटोल बांध नाथद्वारा के लिये पानी का एक बडा स्रोत है, यह नंदसमंद के नाम से भी जाना जाता है। नंदसमंद या टांटोल एक बडा सा तालाब है, वर्षाकाल में नदी से पानी आता है वह यहां ईकट्ठा हो जाता है। नाथद्वारा से जब खमनोर की तरफ जाते हैं तो यह मार्ग में ही पडता है । टांटोल गांव की तरफ यह बांध बना हुआ है, सो यह टांटोल बांध के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध है। यहां के सुर्यास्त और सुर्योदय के समय नजारे बडे ही आकर्षक होते हैं ।

टांटोल बांध की पाल पर पैदल चलने पर एक बडा अजीब सा अनुभव होता है खासतौर पर जब यहां पानी पूरा भरा हुआ होता है । दूर दूर तक दिखाई देते हुए पानी की ओर देखकर जब हम पाल की तरफ अपनी नजर घुमाते है, तो लगता है कि यह पाल खासी मजबुत है कि नहीं, खेर ए॓सा महसूस होता है पर कोई दिक्कत नहीं है,  यह मजबुती से बना हुआ है । यहां पाल के दोनों ओर बनी रेलिंग पर हाथ रखते हुए चलना व साथ में ठंडी हवा खाना एक बडा अच्छा सा अनुभव होता है। छोटे बच्चे पानी के साथ यहां खेलते हुए अक्सर नजर आ जाते हैं । बारिश के दिनों में काफी पर्यटक भी यहां आते रहते हें।

बरसात के समय जब पानी काफी आ जाता है तो टांटोल बांध की तरफ से भी गेट खोला जाता है, वह पानी एक बडी नहर से होता हुआ अन्यत्र  जाता है। उस समय जब यह गेट खोला गया हो, व पानी नहर में से जा रहा होता है तब तो पानी की कल कल कि ध्वनि दूर से ही सुनाई देती है । पाल पर जा कर इस विहंगम नजारे को देखना काफी अच्छा लगता है ।टांटोल बांध

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हल्दीघाटी का बादशाह बाग

January 3rd, 2007 · प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला

बादशाह बाग एक बडा सा बाग है जो कि हल्दीघाटी खमनोर के मार्ग पर स्थित है। यह हल्दीघाटी खमनोर का बादशाह बाग अपना एक अलग एतिहासिक महत्व रखता है । जब महाराणा प्रताप ने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की थी, तब मुगलिया सल्तनत कि तरफ से मानसिंह को एक बडी फौज महाराणा प्रताप व उनकी सेना पर चढ़ाई करने हेतु भेजा गया था । हल्दीघाटी का दर्रा बहुत ही संकडा था, कहते है कि सिर्फ एक घुडसवार ही एक बार में जा सकता था अतः मुगलों की सेना एक बडे खुले से मेदान में ठहरी और वह स्थान था बादशाह बाग ।

21 जून 1576 के दिन यहां बादशाह बाग में ही राणा प्रताप की सेना का मुगल सेना से पहली बार सामना हुआ था । महाराणा प्रताप व उनकी सेना नें मुगलों के छक्के छुडा दिये थे, और ईससे मुगल सेना में भगदड मच गई थी । बादशाह बाग

स्वतंत्र भारत कि पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी अपने समय में एक बार हल्दीघाटी आई थी और यहां के बादशाह बाग पर एक विशाल आमसभा का भी आयोजन किया गया था । आजकल ईस बादशाह बाग का काफी अच्छा रखरखाव हो रहा है सो इसका प्राकृर्तिक सौन्दर्य निखर उठा है । विभीन्न पेड पोधे, हरी भरी घास, अच्छी साज सज्जा, लाईट एवं पानी आदि की समुचित व्यवस्था के कारण यह अब और भी अच्छा लगने लगा है । सरकार द्वारा इसे एक एतिहासिक स्मारक की तरह ठीक से तवज्जो देने के कारण इसका जो विकास हुआ है, यह वाकई में एक अच्छा प्रयास है ।

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गणेश टेकरी, नाथद्वारा

January 3rd, 2007 · प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला

गणेश टेकरी एक बहुत ही बढ़िया अच्छी जगह हे राजसमंद में पिकनिक के लिये । गणेश टेकरी नाथद्वारा से थोडी ही दुरी पर स्थित हे, नाथद्वारा से उदयपुर के मार्ग पर राजकिय महाविधालय के थोडा ही बाद में एक छोटा रास्ता मुडता है हो कि गणेश टेकरी कि तरफ जाता है ।  यहां पर एक रिद्धी सिद्धी विनायक मंदिर हे, प्रतिदिन सुबह व सायंकाल को यहां मंदिर में पुजा व आरती होती है । खास मोके जेसे गणेश चथुर्ती आदि के समय यहां बडी पुजा व विशेष दर्शन आदि होते हैं,  गणेश जी को विशेष रुप से तैयार किया जाता है व मंदिर को सजाया जाता है ।

यह बडा ही मनोरम स्थल है । यहां हरी भरी घास के खुले मेदान हैं एवं बच्चों के खेलने के लिये झुले, रपट आदि बने हुए हैं । बगीचे में यहां तरह तरह के पेड पौधे है व खासी हरियाली है। बिजली , पानी कि भी यहां अच्छी व्यवस्था है । गणेश जी का मंदिर काफी सुंदर है, यह मार्बल से बना हुआ है । मंदिर के खंभे व अन्य शिल्प काफी कलात्मक हैं । अक्सर यहां लोगो द्वारा छोटी मोटी पिकनिक का आयोजन होता ही रहता हे । सामने दूर दूर तक दिखाई देती अरावली पर्वतमाला, नदी का पानी व दूर के नजारे एक साथ देख कर यहां एक अलग ही एहसास होता हैं ।

गणेश टेकरी के ही थोडा पास में ही हे “रामबोला” यह एक अखाडा है ‌और यहां नाथद्वारा में काफी प्रसिद्ध भी है । गणेश टेकरी, नाथद्वारास्थानीय लोग यहां आते हैं और अपने शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिये कसरत, मालिश वगेरह करते हैं । यहां पर बुजुर्ग पहलवान उस्तादों द्वारा अपनी देखरेख में नये पहलवान तैयार किये जाते है, पुर्व में भी यहां के पहलवानों नें राष्ट्रीय स्तर पर यहां का नाम रोशन किया है । ईन अखाडों में कुश्ती दंगल आदि का भी कभी कभार आयोजन होता ही रहता है और आज भी गुरु शिष्य की भारतीय परम्परा का रुप देखने को मिलता है।

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