Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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राजसमंद झील के बारे में जानकारी

December 20th, 2006 · राजसमन्द जिला

राजसमंद झील का निर्माण महाराणा राज सिंह जी के द्वारा एक बडी अकाल राहत योजना के तहत 1662 AD.में करवाया गया । काफी समय बीतने के बाद जब यह छोटा सा कस्बा जिला बना, तो इसका नाम भी ‌राजसमंद झील के कारण ‌राजसमंद जिला रखा गया । ‌राजसमंद झील पर नौ चोकी स्थापत्य कला का एक बहूत ही अच्छा नमूना है, यहां मार्बल से बनी तीन छतरीयां, व तोरण बने हुए है।  इन पर बहूत बारीकी से मीनाकारी का कार्य किया हुआ है ।

ईस नौ चोकी नामक स्थान की एक खास बात यह हे कि यहां हर नौ सीढ़ीयों के बाद एक चोकी है,  और इस बात का खास खयाल रखा गया था इसके पुरे निर्माणकाल के दौरान । नौ चोकी पर बने तोरण भी नौ पत्थरों के जोड से ही बने हुए है । नौ अंक का हिन्दु धर्म में एक अलग ही महत्व है ।  इसी नौ चोकी पाल पर 25 पत्थरों पर खुदाई करके एक बहुत बडा महाकाव्य लिखा गया था जो राज प्रशस्ति के नाम से जाना जाता है । कहा जाता है कि ‌राजसमंद झील पर पाल का निर्माण पूरा होने में पूरे 14 वर्ष का समय लगा था । ‌राजसमंद झील एशिया में दूसरी बडी मीठे पानी कि झील है । झील के किनारे पाल पर एक तरफ अंग्रेजों के जमाने की बनी हुई एक छोटी हवाई पट्टी भी है, तब यहां पानी पर हवाईजहाज उतरते थे ।राजसमंद झील
यहीं पर झील के किनारे स्थित हे प्रभू द्वारिकाधीश का पावन मंदिर, दर्शनार्थी दूर दूर से यहां प्रभू के दर्शनो के लिये आते हैं, और पवित्र झील में स्नान करते हें ।‌ राजसमंद झील विगत कुछ समय से खाली पडी थी पर अब यहाँ पानी की कमी नहीं है । झील पर नौकायान का लुत्फ लिया जा सकता है । राजसमंद झील की पाल पर ही सिंचाई विभाग का कार्यालय है, और सिंचाई विभाग का ही एक गार्डन भी है। प्रतिदिन यहां नगर के कई गणमान्य लोग प्रातःकालीन और सायंकालिन भ्रमण के लिये आते हैं। यहां पाल पर पहली छतरी राडाजी की छतरी के नाम से जानी जाती है, आगे ऐसी ही तीन और  छतरीयां है और अंत में आती है चौथी छतरी, कमल कुरज की छतरी ।  यहां की सांय सांय करती हवा और  दूर दूर तक झील के मनोरम नजारे  मन को सुकून देते हैं । यहाँ सुर्योदय और सुर्यास्त के समय आकाश में छाई लालिमा को बैठे बैठे निहारना बहूत आनंददायी होता है ।

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राजसमन्द जिला एक परिचय‍

December 10th, 2006 · राजसमन्द जिला

राजसमन्द जिला अपने आप में एक अलग पहचान रखता हे। इसे जिला बनाया गया सन 1991 में. इससे पहले यह उदयपुर जिले का ही एक भाग कहलाता था। यह जिला राज्य में अपनी खनिज सम्पदा के कारण एक विशेष स्थान लिये हुए है। यहां पर बहुत तरह के खनिज पाये जाते है, जैसे कि Marble, Quartz एवं Feldsphar आदि। कांकरोली में जे. के. टायर का बहूत बडा प्लान्ट भी है । यहां पर सेंकडो मारबल गोदाम हे, 150 से भी ज्यादा गेंगसा युनिट्स हैं, और काफी सारी मारबल कि माईन्स है। कहने का आशय यह है कि यह एशिया की सबसे बडी मारबल मंडी है ।

यह जिला हर साल राजस्थान में सबसे ज्यादा रिवेन्यु चुकाता है सरकार को, पर फिर भी ईस का जिले का विकास अन्य जिलों की तरह नहीं हो पाया हे, इस बात का मलाल यहां के हर स्थानिय बाशिन्दे को है ।

यहां पर घूमने लायक बहूत सारे स्थान है जैसे नौ चोकी, सिंचाई विभाग का पाल पर बना उद्दयान, विट्ल विलास बाग, पुराना किला, मामू भानेज की दरगाह, तुलसी साधना शिखर, दयाल शाह किला, जे. के. टायर द्वारा विकसित सिविल लाईन्स उद्दयान, कुम्भलगढ़ का किला, देवगढ़, एकलिंग जी के पास ही देवीगढ़ पेलेस, बप्पा रावल, कुम्भलगढ़ का वन्य जीव अभ्यारण्य, बेरों का मठ, बरदड़ की नाल, हल्दीघाटी, गौरीधाम, बाघेरी का नाका, राजसमन्द झील, नन्दसमन्द झील, गणेश टेकरी एवं टांटोल का बांध आदि। मुख्य मंदिरों में कांकरोली का द्वारिकाधीश मंदिर, गडबोर चारभुजा का चारभुजा मंदिर, एकलिंग जी का मंदिर और नाथ्द्वारा का मंदिर आता है।राणा राज सिंह जी

जिला मुख्यालय रेल व सडक द्वारा अन्य राज्यों व जिलों से जुडा हुआ है। आप सभी का यहां स्वागत है। तो कब आ रहें हें यहां आप ………

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