Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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ब्राडगेज रेलमार्ग और राजसमंद वासियों के स्वप्न

January 13th, 2013 · उलझन, कांकरोली, राजसमन्द जिला

ब्राडगेज रेलमार्ग अब राजसमंद की विशेष जरुरत बन चुका हैं | पर हमेशा से ही हमारे यहां के स्थानिय नेताओं के वादे सुने जाते हैं कि इस बार हम कांकरोली राजसमंद के रेलमार्ग को ब्राडगेज में परिवर्तित करने की स्वीकृति दिला ही देंगे | पर जाने कब सभी शहरवासियों की ये अभिलाषा पूरी होगी | मुंगेरीलालों की तरह हम राजसमंदवासी यों ही ब्राडगेज रेलमार्ग के सपने देखते ही जाते हैं, पर होता कुछ नहीं हैं |

Rajsamand Need Brodgaje

Rajsamand Need Brodgaje

 

वाकई में अब हमारा शहर कांकरोली राजसमंद छोटा नहीं रहा, जरुरत के हिसाब से जनता को और भी सुविधाएं चाहिये जो कि अभी भी बहुत अपर्याप्त हैं |

उन्हीं कुछ मुख्य समस्याओं में से समस्या है छोटी पटरी वाली रेल लाईन होना | ब्राडगेज रेलमार्ग ज्यादा सुविधाजनक, तेज रफ्तार और अच्छा होता हैं |

राजसमंद ब्राडगेज रेलमार्ग से जुडेगा तो क्या फायदे होंगेः

  • फायदे अनगिनत होगें, साथ ही ये अपना रेल यातायात सस्ता भी होता हैं, सुलभ और सुरक्षित भी, साथ ही यात्रीयों को थकान आदि परेशानियां भी नहीं होती, व पेन्ट्री डब्बे से सफर के दौरान खाने पीने की समस्याएं भी नहीं होती |
  • मार्बल आदि व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, लफर, स्लेब्स, मार्बल के पाटिये ‌और तैयार माल, मालगाडी से जल्दी और सुगम तरीके से दूरदराज पहुंचाया जा सकता हैं |
  • मुंबई, बेंगलोर व साउथ जाने वाले कांकरोली राजसमंद के निवासियों को यहां बार बार आने जाने में परेशानी नहीं होगी |
  • हमारा शहर कांकरोली राजसमंद आसनी से बडे शहरों से जुडेगा जिससे व्यापार, पर्यटन आदि तो बढ़ेगा ही, और भी कई तरह से शहर का आर्थिक विकास होगा |

तो भाइयों सौ बातों की एक ही बात है कि चाहे प्रशासन व रेलवे विभाग कुछ भी कहे या करे पर हमें तो अब ब्राडगेज रेलमार्ग चाहिये ही चाहिये | अब यहां की जनता भी किसी छोटे मोटे झुनझुने से खुश नहीं होने वाली हैं, साथ ही जो लोग कुछ थोडा राजनितिक, प्रशासनिक या किसी भी प्रकार का पावर रखते हैं उन्हें इस सुविधा हेतु आगे आना होगा, अभी ही सही समय हैं, ब्राडगेज रेलमार्ग का काम जल्दी से जल्दी शुरु होना चाहिये |

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अष्टावक्र

December 23rd, 2012 · लघु कहानियां

ऋषि अष्टावक्र के जीवन की एक घटना:

राजा जनक मे काल में अष्टावक्र जी नाम के एक बहुत विद्वान संत थे, बडे ही महान ऋषि थे, पर शारिरिक रुप से थोडे टेढ़े मेढ़े थे, आप और हम कह सकते हैं कि वे अपने शरीर में कुल मिला कर आठ जगह से टेढ़े मेढ़े थे | कहते हैं कि राजा जनक की सभा में वे एक बार आये और तब उनकी चाल ढ़ाल, रंग रुप देख कर बहुत से दरबारी हंस पडे |

अकारण दरबारियों के हंसने का कारण वे जान चुके थे कि ये लोग मेरे शरीर को देख कर हंस रहे हैं, और तब अष्टावक्र जी नें कहा मर्खों चमडी को देख कर तो चमार हंसा करते हैं तुम जेसे दिखावटी सभ्य लोगों और चमारों में मुझे कोई अंतर दिखाई नहीं पडता | अष्टावक्र के क्रोध से दरबारियों की घिग्घी बंध गयी, की कहीं ये ऋषि गुस्से ही गुस्से में हम सभी को कोई श्राप ना दे दे | फिर राजा जनक के कहने पर सभी नें तत्क्षण उनसे माफी मांगी | सच भी है किसी कि शक्ल सूरत या दिखावे पे ना जाओ और कुछ ए॓सा कृत्य ना करो की बाद में पछतावा हो |

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राजसमन्द के चार बडे व्यवसायीक घराने

November 21st, 2012 · व्यापार व्यवसाय

राजसमन्द वैसे तो काफी बातों के लिये प्रसिद्ध है पर यहां सालों से कार्य कर रहे कई व्यवसायीक घरानों ने भी अपने आप को बुलंदियों तक पहुंचाया है | अतुल्य खनिज संपदा के लिये विख्यात तो यह जिला पहले से है, ही कालंतर में बडे व्यवसायी ग्रुप भी यहां पहुंचे और शनेः शनेः उन्होनें भी अपना प्रभाव इस क्षेत्र विशेष में बनाया, आज हम कुछ बडे व्यवसायीक घरानों के बारे में चर्चा करते हैं, राजसमंद के इन बडे घरानों के व्यापार देश विदेशों में अब फैल चुके हैं, तो यहां विशेष रुप से सबसे पहले चार नाम सामने आते हैः

राजसमन्द के बडे व्यवसायीक घराने:

जे.के टायर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेडः

जे. के. टायर फेक्ट्री के सिंघानिया सा. के नाम को कौन नहीं जानता, भारत के शीर्ष कारोबारीयों में सिंघानिया परिवार का भी नाम आता हैं, रेडियल टायर बनाने में अग्रणी ये कंपनी काकंरोली में जब आयी तो यहां आस पास के सेंकडों युवाओ इससे रोजगार मिला, कांकरोली का भी कुछ नाम हुआ, बाहर से लोग यहां आने लगे, इस से यहा के छोटे मोटे व्यवसाय भी फले फूले | जे.के. टायर की यहां खुद की कोलोनीयां, अस्पताल, हवाई पट्टी, स्कूल, हेसेट्री का रिसर्च एंड डवलेपमेंट हाउस, फेक्ट्री आदि हैं और ये सब बहुत ही बडे पैमाने पर बना हुआ है | वर्तमान में टायर फेक्ट्री में आधुनिक मशीने आने से काम और भी तेज रफ्तार से होता हैं |

आर.के. म्रार्बल्सः
आज से लगभग बीस साल पहले आर.के. म्रार्बल्स ने मोरवड माईंस पर मार्बल माइनिंग शुरु की, अपने विशेष प्रयासों व नयी तकनीकी की मशीनरीज आदि के साथ सुव्यवस्थित और नियोजित तरीके से कार्य करने के कारण ये मार्बल व्यवसाय में बहुत विशेष स्थान रखता हैं | आर.के . ग्रुप के किशनगढ़ में भी काफी बडे कारोबार हैं | आज इनका मोरवड फ्रेश के नाम से जो मार्बल का पत्थर है वो एक विशेष मापदंड के कारण काफी महंगी दरों पर बिकता हैं, और रोजाना सेंकडों गाडी में मार्बल यहां से जाता हैं व इसका व्यवसाय होता हैं |

वेदांता, हिन्दुस्तान जिंक, दरीबाः
हिन्दुस्तान जिंक का वेदांता ग्रुप जो कि दरीबा राजपुरा में स्थित हैं, यह भी हमारे राजसमन्द के क्षेत्र का एक बहुत बडा व्यवसायीक घराना है और यहां भी माइंसे हैं जहां से खनिज निकाले जाते हैं | इस कारण भी क्षेत्र विशेष में अच्छी तरक्की हो रही हैं, यहां भी बडी कोलोनीयां हैं व यहां कार्यरत लोगों के लिये सारी मुख्य सुविधाएं कंपनी मुहैया कराती हैं | कुल मिला कर कह सकते हैं कि इस व्यवसायीक घराने नें समू्चे देश में अपना नाम रोशन किया है |

मिराज ग्रुप, नाथद्धाराः
मिराज तंबाकू उत्पाद बनाते हैं, बहुत सालों छोटे से लेवल से शुरु हुआ यह व्यवसाय आज बुलादितयों को छू रहा हैं, यहां नाथद्धारा के ही लोकल पालीवाल परिवार ने इस व्यवसाय को शुरु किया था पर आज मिराज की तंबाकू पूरे देश मे जहां मांगो वहां मिल जाती है, वर्तमान में मिराज ग्रुप अपने मुख्य कार्य तंबाकू [Read more →]

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मन की भडास

November 10th, 2012 · आपबीती

कई बार में अपने आस पास समाज में हो रही गलत बातों के बारे में लिखने की सोचता हूं, और मन उदास हो जाता है क्योकि बहुत सी बातें ए॓सी होती हैं, जिन पर हमारा बस नहीं चलता, और लगता है कि ये दुनिया ए॓सी ही हैं और यूं ही चलती रहेगी, क्यों फालतू कुछ प्रयास करके भी निरर्थक श्रम जाया करना |

यूं भी मेरी लेखनी की धार तेज और पैनी हैं, ये में जानता हूं | कुछ सही गलत लिख …. कह के में भी किसी और को अपना दुश्मन बनाना नहीं चाहता |

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हां, पिक्चर में रोता हैं………..

October 15th, 2012 · उलझन

वाकई में बहुत अदभुत हैं किसी का भावुक होना…में भी हूं | अचानक मन में भावो के उत्पन्न होते ही व्यक्ति उनके अनुसार रिएक्ट करने लगता हैं, रोना , हंसना, खुश या दुःखी हो जाना, ये सारे भाव ही तो हैं जो हमें दूसरो से अलग बनाते हैं | जहां तक में समझता हूं, भावुक होना कोई बुरी बात नहीं हैं…. किसी किसी को टी.वी. या पिक्चर पर भावुक दृश्य आने पर रोना आ जाता हैं, या उनकी सुबह के किसी खराब सपने का बुरा असर दिन भर उन पर हावी रहता हैं, वे विचलित से रहते हैं, किसी शांति की तलाश में….तो क्या हुआ |

पर आज जमाना कुछ और ही हैं अर्थवादी युग हैं हर बात को पैसे से तोला जाता हैं, भागमभाग हैं एक तरह की कभी ना खत्म होने वाली रेस लगी हुई हैं | सो आज के जमाने में लोगो के दिल मे भावुक लोगों के प्रति कद्र नहीं होती, वे समझते हैं इनका कोई भविष्य नही होता हैं, या ये लोग दिल के बडे कमजोर होते हैं, जिंदगी में बडे अहम फैसले नहीं ले पाते हैं, अस्त व्यस्त से अपने आप में ही खोये रहते हैं , या कुछ और …………………पर किसने कहा हैं इस तरीके से जजमेंटल होने वाले लोगो से, कि आप दूसरों के बारे में ए॓से सोचते हुए अपने व्यक्तिगत विचार उन्हे बताओ |

आज जो लोग अत्यधिक भावुक हैं उन्हे अपने आप को बदलने में वक्त लगता हैं और अगर वे ना भी बदले तो क्या, किसी और की ए॓सी की तैसी क्युं होती हैं ? ये बात समझ में नहीं आती हैं |

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