Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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रात के हमसफर …. थक के घर को चले

March 30th, 2013 · फिल्म और गीत

शंकर जयकिशन जोडी अपने आप में कमाल की संगीतकार जोडी थी, और ये लोग कभी ना मिटने वाला काम कर गये हैं, अतिशय नहीं हे कि इनका नाम अमर रहेगा | इस जोडी के शंकर का कंपोस्ड किया हुआ ये एक बेहतरीन गीत है ………..रात के हमसफर …. थक के घर को चले|

इस अमर गीत कर पीछे एक कहानी भी हे शंकर को अपनी मां से बडा प्रेम था, और हो भी क्यूं ना, कलाकार लोग बहुत भावुक होते हैं और उन्होने बचपन में अपनी मां से सुनी लोरीयों की मिठास को अपने खुद में पाया था | मां की मृत्यु और फनरल के कुछ बाद, बडे ही उदासी व दुख भरे माहौल में उन्होनें फिर से काम शुरु किया |

गीतकार शेलेन्द्र और शंकर जी ने कमाल की कलाकारी दिखाई हें इस गाने में, उस पर से रफी साहब और आशा जी की आवाज | आज लगभग पचास साल बाद भी इस गाने में वही शहद सी मिठास है | एक एक शब्द व गाने की धुन अनमोल है | ‘गिटार’ का जोरदार प्रभावी प्रयोग इस गीत में हमें सुनने को मिलता है | शम्मी कपूर की स्टाईल, पेरिस की रात के नजारे, आशा जी व रफी सा. की आवाज, शंकर जी की कंपोजिशन, सबकुछ जब एक साथ मिले को अनमोल रचना बनी | आप भी सुनिये……

फिल्म का नामः एन इवनिंग इन पेरिस
संगीतकारः शंकर जयकिशन
गीतकारः शेलेन्द्र
गायकः मो. रफी जी, आशा भोंसले
अभिनेता अभिनेत्रीः शम्मी कपूर एवं शर्मिला टेगोर जी

रात के हमसफर …. थक के घर को चले

रात के हमसफ़र, थक के घर को चले
झूमती आ रही, हैं सुबह प्यार की
देख कर सामने रूप की रौशनी
फिर लूटी जा रही, हैं सुबह प्यार की

सोने वालों को हँस कर जगाना भी हैं
रात के जागतों को सुलाना भी हैं
देती हैं जागने की सदा साथ ही
लोरीयाँ गा रही है, सुबह प्यार की

रात ने प्यार के जाम, भर कर दिए
आँखों आँखों से जो मैंने तुमने पिए
होश तो अब तलक जा के लौटे नहीं
और क्या ला रही है, सुबह प्यार की

क्या क्या वादे हुए, किस ने खाई कसम
इस नयी राह पर, हम ने रखे कदम
छूप सका प्यार कब, हम छूपाये तो क्या
सब समझ पा रही है, सुबह प्यार की

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कुछ दिलचस्प उत्पादों के नाम, जो छा गये बाजारों में

January 26th, 2013 · व्यापार व्यवसाय

व्यापार के मामले में कहा जाता है कि अपने अच्छे उत्पादों और वाजीब दाम में उत्कृष्ठ सेवाओं से ही कोई कंपनी शीर्ष पर पहुंच सकती हैं, परन्तु काम करने के दौरान हमें व्यावहारिक जीवन में कई छोटी बडी समस्याएं आती हैं,  और उनको भी समान दृष्टि से देखते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहना और अपने उत्पाद को और ज्यादा अच्छा व विशिष्ट बना डालना सचमुच बहुत बडी बात हैं |
बडे महान थे वे लोग जिन्होनें अपने जीवन मे इतना श्रम किया, इतना श्रम किया कि उनके उत्पाद ही अपने आप में ब्रांड हो गये | इतने बिके, इतने बिके की जन जन की जुबान पर उन प्राडक्टस के नाम हैं | वेसे ये बडी ही छोटी लिस्ट हैं, बाकी यूं तो दुनिया में ए॓से उंचाईयों को छूने वाले उत्पाद और कंपनीयों के काफी सारे नाम हैं | तो यहां प्रस्तुत है कुछ ए॓से ही उत्पादों की एक सू्ची |

कुछ दिलचस्प उत्पाद जो इतने चले कि अपने आप में ब्रांड हो गयेः

डालडाः डालडा का वनस्पति घी किसे याद नहीं होगा, कंपनी के इस उत्पाद को लोगों नें सिर आंखों पर चढ़ाया, एक जमाने मे डालडा वनस्पति घी इतना बिका की सारे रिकार्ड टूट गये, आज भी कोई महिला वनस्पति घी लेने बाजार जा रही होती है …. चाहे वो कोई भी कंपनी का वनस्पति घी खरीदने जा रही हो पर

surf

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पडोसन से यही कहेगी डालडा लेने जा रही हूं |

सर्फः सर्फ कपडों की धुलाई का पाउडर हैं और इस उत्पाद की ए॓सी धूम है कि ये नाम से ही चलता हैं,  आज भी कोई व्यक्ति वाशिंग पाउडर लेने बाजार जा रहा होता है …. चाहे वो कोई भी कंपनी का वाशिंग पाउडर खरीदने जा रहा हो पर कहेगा यही कि सर्फ लेने जा रहा हूं |
मोबिल आयलः बोलचाल में मोबिल आयल जिसे कहा जाता हैं ये एक कंपनी का तेल होता था, पर अभी कोई भी कार सर्विस कराये तो मिस्त्री मोबिल आयल कौनसा डालने वाला है ये जरुर पूछता हैं |
एस्पिरिनः एस्पिरिन तुरंत राहत देने वाली दर्दनिवारक गोली होती हैं, पर आजकल कोई भी सरदर्द बदनदर्द होने पर चाहे और किसी ब्रांड की गोली भी खा रहा हो, कहेगा यही कि एस्पिरिन ली है, अब ठीक हो जाउंगा | ए॓से और भी उदाहरण हैं, जैसे कोई व्यक्ति बहुत से सवाल करता हो, दिमाग खाता हो तो मित्र लोग उसे झंडु कहते है या  फिर कहेंगे कि ये लो इस एनासिन की ही कमी थी, अब ये भी आ गया |
बैंड एडः ये एक पट्टी होती हैं जो कि छोटी मोटी चोट लगने पर चिपका दी जाती हैं अब चाहे कोई भी ब्रांड की पट्टी बच्चों को लगाई जा रही हो पर लोग बोलचाल की भाषा में कहते यही हैं कि बच्चे को बैंड एड लगवा के आया हूं |
जीपः जीप हकीकत में एक वाहन कंपनी हैं, पर चौपहिया आफ रोडर सवारी को बोलचाल की भाषा में जीप ही कहा जाता रहा है |
निरमाः ए॓सा ही वाशिंग पाउडर निरमा के साथ भी हैं, निरमा का नाम आते ही कोई भी वाशिंग पाउडर निरमा ही याद करेगा, अब चाहे निरमा नाम से ही कोई बडे कालेज या कंपनीयां भी चल रही हो पर निरमा एक वाशिंग पाउडर का पर्याय बन चुका हैं |
i-pod

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आई पोडः भारतीय बाजारों में आई पोड, यानी कोई भी एम पी थ्री प्लेयर जिस पर गाने सुने जा सकें | अक्सर एप्पल के प्राडक्ट कुछ महंगे होते है और ए॓से में चाईनीज एम पी थ्री प्लेयर भी बाजारों में बिकते हैं, पर बच्चे पूछते यही हैं कि भैया आई पोड है क्या ? ए॓सा ही कुछ सोनी कंपनी के वाकमेन के साथ भी है, सोनी ने अपने कैसेट प्लेयर का नाम वाकमेन रक्खा था पर अब कोई व्यक्ति चलते फिरते हुए संगीत सुनने वाला कोई भी यन्त्र खरीदे, कहेगा यही कि वाकमेन लाया हूं |

जिलेट रेजरः जिलेट एक बहुत बडी कंपनी है जो शेवर रेजर आदि बनाती हैं और रेजर करके एक रेडी शेवर उन्होने निकाला था, अब कोई भी डाढ़ी बनवाने का उस्तरा खरीदे बोलेगा यही कि रेजर लाया हूं |
बिस्लरीः बिस्लरी का मिनरल वाटर नाम से शुद्ध पानी आता हैं और ये हर छोटी मोटी दुकान पर सुलभ उपलब्ध हैं , अब ये मिनरल वाटर का पर्याय बन चुका हैं, कवि लोग कहते हैं ना कि नेता पीये बिस्लरी, और हम पीये नलके का गंदा पानी |
कोलगेटः कोलगेट एक प्रसिद् टूथपेस्ट हैं, जो किसी भी टूथपेस्ट कंपनी से पीछे नहीं हें, कोई किसी भी कंपनी का टूथपेस्ट लेने जा रहा हो वह कहेगा यही कि भई कोलगेट लेने जा रहा हूं |
जिरोक्स: जिरोक्स एक कंपनी है जो कि प्रिन्टर, फोटोकोपी मशीन आदि बनाती है, फोटोकोपी मशीनें जिरोक्स की इतने प्रचलन में आयी कि कोई भी फोटोकोपी कराने जाता हो कहता है कि जिरोक्स कराने जा रहा हूं |
वेसलीनः वेसलीन का नाम आते हैं हमें पेट्रोलियम जैली याद आती हे,अब बाजारों में चाहे कितने ही अलग अलग ब्रांड के वेसलीन पेट्रोलियम जैली मिलते हों पर हमें तो बस वेसलीन ही चाहिये होता हैं| [Read more →]

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तर्क

January 26th, 2013 · उलझन

एक बार की बात है मुझे किसी एक विषय वस्तु या घटना पर थोडे दुःख को झेलना पडा, संवेदनशील व्यक्ति को छोटी सी पीडा भी बडी लगती हैं, वह विषय था लोगों का सडकों पर बहुत जोर शोर से हंगामे करने का | चाहे उसके कारण आस पास के कई लोगों को प्रत्य्क्ष या अप्रत्य्क्ष नुकसान हो रहा हो या दुःख झेलना पड रहा हो, पर वे लोग तो हंगामें करेंगे | तो मेने कुछ लिखा उस घटना के बारे में, मेरे एक मित्र नें उस घटना पर मेरे नेगेटिव या नकारात्मक विचार पढ़े और पूछाः भाई तुम ए॓से तो किसी नाचती गाती हुई बारात को भी गलत ठहरा दोगे |

मेनें कहाः गलत है बिलकुल, अगर वह नाचती गाती हुई बारात किसी अस्पताल के नजदीक से गुजरती हो और बाराती लोग उसी तल्लीनता से हील हुल्लड और हंगामे करते हो | जबकि अंदर मरीजों को उन फिल्मी गानों का शोर बर्दाश्त ही ना हो रहा हो, वे रोगी लोग पहले ही कष्ट झेल रहे हैं, शांति व आराम चाहते हैं, और तुम हो कि उसकी शांत रहने की स्वतन्त्रता में खलल डालते ही जाते हो, डालते ही जाते हो ….. ये गलत हैं |

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ब्राडगेज रेलमार्ग और राजसमंद वासियों के स्वप्न

January 13th, 2013 · उलझन, कांकरोली, राजसमन्द जिला

ब्राडगेज रेलमार्ग अब राजसमंद की विशेष जरुरत बन चुका हैं | पर हमेशा से ही हमारे यहां के स्थानिय नेताओं के वादे सुने जाते हैं कि इस बार हम कांकरोली राजसमंद के रेलमार्ग को ब्राडगेज में परिवर्तित करने की स्वीकृति दिला ही देंगे | पर जाने कब सभी शहरवासियों की ये अभिलाषा पूरी होगी | मुंगेरीलालों की तरह हम राजसमंदवासी यों ही ब्राडगेज रेलमार्ग के सपने देखते ही जाते हैं, पर होता कुछ नहीं हैं |

Rajsamand Need Brodgaje

Rajsamand Need Brodgaje

 

वाकई में अब हमारा शहर कांकरोली राजसमंद छोटा नहीं रहा, जरुरत के हिसाब से जनता को और भी सुविधाएं चाहिये जो कि अभी भी बहुत अपर्याप्त हैं |

उन्हीं कुछ मुख्य समस्याओं में से समस्या है छोटी पटरी वाली रेल लाईन होना | ब्राडगेज रेलमार्ग ज्यादा सुविधाजनक, तेज रफ्तार और अच्छा होता हैं |

राजसमंद ब्राडगेज रेलमार्ग से जुडेगा तो क्या फायदे होंगेः

  • फायदे अनगिनत होगें, साथ ही ये अपना रेल यातायात सस्ता भी होता हैं, सुलभ और सुरक्षित भी, साथ ही यात्रीयों को थकान आदि परेशानियां भी नहीं होती, व पेन्ट्री डब्बे से सफर के दौरान खाने पीने की समस्याएं भी नहीं होती |
  • मार्बल आदि व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, लफर, स्लेब्स, मार्बल के पाटिये ‌और तैयार माल, मालगाडी से जल्दी और सुगम तरीके से दूरदराज पहुंचाया जा सकता हैं |
  • मुंबई, बेंगलोर व साउथ जाने वाले कांकरोली राजसमंद के निवासियों को यहां बार बार आने जाने में परेशानी नहीं होगी |
  • हमारा शहर कांकरोली राजसमंद आसनी से बडे शहरों से जुडेगा जिससे व्यापार, पर्यटन आदि तो बढ़ेगा ही, और भी कई तरह से शहर का आर्थिक विकास होगा |

तो भाइयों सौ बातों की एक ही बात है कि चाहे प्रशासन व रेलवे विभाग कुछ भी कहे या करे पर हमें तो अब ब्राडगेज रेलमार्ग चाहिये ही चाहिये | अब यहां की जनता भी किसी छोटे मोटे झुनझुने से खुश नहीं होने वाली हैं, साथ ही जो लोग कुछ थोडा राजनितिक, प्रशासनिक या किसी भी प्रकार का पावर रखते हैं उन्हें इस सुविधा हेतु आगे आना होगा, अभी ही सही समय हैं, ब्राडगेज रेलमार्ग का काम जल्दी से जल्दी शुरु होना चाहिये |

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अष्टावक्र

December 23rd, 2012 · लघु कहानियां

ऋषि अष्टावक्र के जीवन की एक घटना:

राजा जनक मे काल में अष्टावक्र जी नाम के एक बहुत विद्वान संत थे, बडे ही महान ऋषि थे, पर शारिरिक रुप से थोडे टेढ़े मेढ़े थे, आप और हम कह सकते हैं कि वे अपने शरीर में कुल मिला कर आठ जगह से टेढ़े मेढ़े थे | कहते हैं कि राजा जनक की सभा में वे एक बार आये और तब उनकी चाल ढ़ाल, रंग रुप देख कर बहुत से दरबारी हंस पडे |

अकारण दरबारियों के हंसने का कारण वे जान चुके थे कि ये लोग मेरे शरीर को देख कर हंस रहे हैं, और तब अष्टावक्र जी नें कहा मर्खों चमडी को देख कर तो चमार हंसा करते हैं तुम जेसे दिखावटी सभ्य लोगों और चमारों में मुझे कोई अंतर दिखाई नहीं पडता | अष्टावक्र के क्रोध से दरबारियों की घिग्घी बंध गयी, की कहीं ये ऋषि गुस्से ही गुस्से में हम सभी को कोई श्राप ना दे दे | फिर राजा जनक के कहने पर सभी नें तत्क्षण उनसे माफी मांगी | सच भी है किसी कि शक्ल सूरत या दिखावे पे ना जाओ और कुछ ए॓सा कृत्य ना करो की बाद में पछतावा हो |

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