Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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राजसमन्द के चार बडे व्यवसायीक घराने

November 21st, 2012 · व्यापार व्यवसाय

राजसमन्द वैसे तो काफी बातों के लिये प्रसिद्ध है पर यहां सालों से कार्य कर रहे कई व्यवसायीक घरानों ने भी अपने आप को बुलंदियों तक पहुंचाया है | अतुल्य खनिज संपदा के लिये विख्यात तो यह जिला पहले से है, ही कालंतर में बडे व्यवसायी ग्रुप भी यहां पहुंचे और शनेः शनेः उन्होनें भी अपना प्रभाव इस क्षेत्र विशेष में बनाया, आज हम कुछ बडे व्यवसायीक घरानों के बारे में चर्चा करते हैं, राजसमंद के इन बडे घरानों के व्यापार देश विदेशों में अब फैल चुके हैं, तो यहां विशेष रुप से सबसे पहले चार नाम सामने आते हैः

राजसमन्द के बडे व्यवसायीक घराने:

जे.के टायर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेडः

जे. के. टायर फेक्ट्री के सिंघानिया सा. के नाम को कौन नहीं जानता, भारत के शीर्ष कारोबारीयों में सिंघानिया परिवार का भी नाम आता हैं, रेडियल टायर बनाने में अग्रणी ये कंपनी काकंरोली में जब आयी तो यहां आस पास के सेंकडों युवाओ इससे रोजगार मिला, कांकरोली का भी कुछ नाम हुआ, बाहर से लोग यहां आने लगे, इस से यहा के छोटे मोटे व्यवसाय भी फले फूले | जे.के. टायर की यहां खुद की कोलोनीयां, अस्पताल, हवाई पट्टी, स्कूल, हेसेट्री का रिसर्च एंड डवलेपमेंट हाउस, फेक्ट्री आदि हैं और ये सब बहुत ही बडे पैमाने पर बना हुआ है | वर्तमान में टायर फेक्ट्री में आधुनिक मशीने आने से काम और भी तेज रफ्तार से होता हैं |

आर.के. म्रार्बल्सः
आज से लगभग बीस साल पहले आर.के. म्रार्बल्स ने मोरवड माईंस पर मार्बल माइनिंग शुरु की, अपने विशेष प्रयासों व नयी तकनीकी की मशीनरीज आदि के साथ सुव्यवस्थित और नियोजित तरीके से कार्य करने के कारण ये मार्बल व्यवसाय में बहुत विशेष स्थान रखता हैं | आर.के . ग्रुप के किशनगढ़ में भी काफी बडे कारोबार हैं | आज इनका मोरवड फ्रेश के नाम से जो मार्बल का पत्थर है वो एक विशेष मापदंड के कारण काफी महंगी दरों पर बिकता हैं, और रोजाना सेंकडों गाडी में मार्बल यहां से जाता हैं व इसका व्यवसाय होता हैं |

वेदांता, हिन्दुस्तान जिंक, दरीबाः
हिन्दुस्तान जिंक का वेदांता ग्रुप जो कि दरीबा राजपुरा में स्थित हैं, यह भी हमारे राजसमन्द के क्षेत्र का एक बहुत बडा व्यवसायीक घराना है और यहां भी माइंसे हैं जहां से खनिज निकाले जाते हैं | इस कारण भी क्षेत्र विशेष में अच्छी तरक्की हो रही हैं, यहां भी बडी कोलोनीयां हैं व यहां कार्यरत लोगों के लिये सारी मुख्य सुविधाएं कंपनी मुहैया कराती हैं | कुल मिला कर कह सकते हैं कि इस व्यवसायीक घराने नें समू्चे देश में अपना नाम रोशन किया है |

मिराज ग्रुप, नाथद्धाराः
मिराज तंबाकू उत्पाद बनाते हैं, बहुत सालों छोटे से लेवल से शुरु हुआ यह व्यवसाय आज बुलादितयों को छू रहा हैं, यहां नाथद्धारा के ही लोकल पालीवाल परिवार ने इस व्यवसाय को शुरु किया था पर आज मिराज की तंबाकू पूरे देश मे जहां मांगो वहां मिल जाती है, वर्तमान में मिराज ग्रुप अपने मुख्य कार्य तंबाकू [Read more →]

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मन की भडास

November 10th, 2012 · आपबीती

कई बार में अपने आस पास समाज में हो रही गलत बातों के बारे में लिखने की सोचता हूं, और मन उदास हो जाता है क्योकि बहुत सी बातें ए॓सी होती हैं, जिन पर हमारा बस नहीं चलता, और लगता है कि ये दुनिया ए॓सी ही हैं और यूं ही चलती रहेगी, क्यों फालतू कुछ प्रयास करके भी निरर्थक श्रम जाया करना |

यूं भी मेरी लेखनी की धार तेज और पैनी हैं, ये में जानता हूं | कुछ सही गलत लिख …. कह के में भी किसी और को अपना दुश्मन बनाना नहीं चाहता |

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हां, पिक्चर में रोता हैं………..

October 15th, 2012 · उलझन

वाकई में बहुत अदभुत हैं किसी का भावुक होना…में भी हूं | अचानक मन में भावो के उत्पन्न होते ही व्यक्ति उनके अनुसार रिएक्ट करने लगता हैं, रोना , हंसना, खुश या दुःखी हो जाना, ये सारे भाव ही तो हैं जो हमें दूसरो से अलग बनाते हैं | जहां तक में समझता हूं, भावुक होना कोई बुरी बात नहीं हैं…. किसी किसी को टी.वी. या पिक्चर पर भावुक दृश्य आने पर रोना आ जाता हैं, या उनकी सुबह के किसी खराब सपने का बुरा असर दिन भर उन पर हावी रहता हैं, वे विचलित से रहते हैं, किसी शांति की तलाश में….तो क्या हुआ |

पर आज जमाना कुछ और ही हैं अर्थवादी युग हैं हर बात को पैसे से तोला जाता हैं, भागमभाग हैं एक तरह की कभी ना खत्म होने वाली रेस लगी हुई हैं | सो आज के जमाने में लोगो के दिल मे भावुक लोगों के प्रति कद्र नहीं होती, वे समझते हैं इनका कोई भविष्य नही होता हैं, या ये लोग दिल के बडे कमजोर होते हैं, जिंदगी में बडे अहम फैसले नहीं ले पाते हैं, अस्त व्यस्त से अपने आप में ही खोये रहते हैं , या कुछ और …………………पर किसने कहा हैं इस तरीके से जजमेंटल होने वाले लोगो से, कि आप दूसरों के बारे में ए॓से सोचते हुए अपने व्यक्तिगत विचार उन्हे बताओ |

आज जो लोग अत्यधिक भावुक हैं उन्हे अपने आप को बदलने में वक्त लगता हैं और अगर वे ना भी बदले तो क्या, किसी और की ए॓सी की तैसी क्युं होती हैं ? ये बात समझ में नहीं आती हैं |

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राधे का दुःख

August 10th, 2012 · लघु कहानियां

आज हम सुबह सुबह घर से निकले ही थे कि हमारा पुराना मित्र राधे मिल गया रास्ते में, बोला गुरु कहां हो यार में तो तुम्हे ही ढ़ूंढ़ रहा था | एक नई दुख की खबर हैं उस पर तुम कुछ लिखो मियां, मैने पूछा क्या है रे राधे, तू फेर ले के आ गया कुछ, स्साले जब जब भी तू कोई नई खबर लाता हैं और फिर प्रतिक्रिया स्वरुप कुछ ना कुछ मुझ से कहना लिखना आ जाता है और बाद में मेरी ही फजीती होती हैं खैर, चल यार चाय पीते पीते बात करते हैं | हम दोनो सडक पार झुम्मन की चाय की थडी के पास गये, और झुम्मन को दो कट चाय मलाईमार के का आर्डर दिया |

कुछ देर बाद चाय सुडकते हुए हमने बोला बोल भई क्या नई खबर हैं ? फिर राधे ने शुरु किया और झेंपता हुआ बोला अरे उस्ताद…….. क्या सुनाएं पहले से ही गरमी के दिन और दिन दिन रात रात भर ये बिजली विभाग वाले बिजली काट रहे हैं | वेसे भी बिजली के पर युनिट के दाम तो दो दो तीन तीन बार बढ़ा ही दिये हें सरकारों ने, अब बढ़े हुए बिलो के बोझ भी हमारे इकलोतो कंधों पर ही है | जैसे तैसे करके बिजली के बिल भर रहे हैं ‌और दिन काट रहे हैं पर ससूरे ये बिजली वाले अब फिर से दिन रात लाईट काट काट कर के हमें मच्छरों के हवाले किये जा रहे हैं | और वेसे भी हमारा खून है मीठा, तो मच्छरों का तो जैसे स्वरुचीभोज ही हो जाता हैं जैसे |

फिर एक अडंगा ये भी है हमारी सरकारों का कि विभागों को ए॓से ए॓से अधिकार दे रक्खें हैं कि बेइमानों की बिजली चोरी या छीजत का पैसा भी सीधे आदमीयों को अपनी जेब से भरना पडता हैं, यानी उंट की गरदन लम्बी हैं काटो और काटो | करे कोई भरे कोई, बिजली चोर मजे उडा रहे हैं और यहां हम हें कि पहले से दूबले और दुबले हुए जा रहे हैं, आम आदमी की जिन्दगी चिन्तनीय हैं | [Read more →]

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Laugh India Laugh टी.वी. शो में अपने कवि सुनिल के ठहाके

July 21st, 2012 · शख्सियत

हमारे शहर काकंरोली के युवा हास्य कवि अब लाईफ ओके चैनल के Laugh India Laugh शो में अपनी अदाकारी दिखा रहे हैं | ये बहुत ही सराहनीय प्रयास हैं | उल्लेखनीय है कि युवा कवि सुनिल व्यास नें पहले भी अपनी हास्य कविताओं से बडे गंभीर विषयों पर भी अपनी लेखनी चलाई हैं इसी संदर्भ में कई देश विदेशों की यात्राएं भी कर चुके हैं |

कवि सुनिल, कवि होने के साथ ही अच्छे अभिनेता, संगीत, गायन वादन आदि में भी रुची रखते हैं, मंच संचालक और जागरुक नागरिक भी हैं, जो समाज में हो रही हलचल और बातों पर अपना विशिष्ट नजरिया रखते हैं | आप ये विडीयो देखिए और उन्हें वोट भी किजीयेगा ताकि वे ज्यादा से ज्यादा समय तक टी. वी. पर छाये रहें औ‌र उन्हे तगडी कामयाबी मिले | कहते हैं कि “नो बिजनस इज लाइक शो बिजनेस” | और शो बिजनेस में कांकरोली राजसमन्द से निकले, इस तरह की प्रसिद्धि पाने वाले सुनिल जी पहले कवि हैं |

 

फोटो साभारः https://www.facebook.com/kavisunilvyas

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