Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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हां, पिक्चर में रोता हैं………..

October 15th, 2012 · उलझन

वाकई में बहुत अदभुत हैं किसी का भावुक होना…में भी हूं | अचानक मन में भावो के उत्पन्न होते ही व्यक्ति उनके अनुसार रिएक्ट करने लगता हैं, रोना , हंसना, खुश या दुःखी हो जाना, ये सारे भाव ही तो हैं जो हमें दूसरो से अलग बनाते हैं | जहां तक में समझता हूं, भावुक होना कोई बुरी बात नहीं हैं…. किसी किसी को टी.वी. या पिक्चर पर भावुक दृश्य आने पर रोना आ जाता हैं, या उनकी सुबह के किसी खराब सपने का बुरा असर दिन भर उन पर हावी रहता हैं, वे विचलित से रहते हैं, किसी शांति की तलाश में….तो क्या हुआ |

पर आज जमाना कुछ और ही हैं अर्थवादी युग हैं हर बात को पैसे से तोला जाता हैं, भागमभाग हैं एक तरह की कभी ना खत्म होने वाली रेस लगी हुई हैं | सो आज के जमाने में लोगो के दिल मे भावुक लोगों के प्रति कद्र नहीं होती, वे समझते हैं इनका कोई भविष्य नही होता हैं, या ये लोग दिल के बडे कमजोर होते हैं, जिंदगी में बडे अहम फैसले नहीं ले पाते हैं, अस्त व्यस्त से अपने आप में ही खोये रहते हैं , या कुछ और …………………पर किसने कहा हैं इस तरीके से जजमेंटल होने वाले लोगो से, कि आप दूसरों के बारे में ए॓से सोचते हुए अपने व्यक्तिगत विचार उन्हे बताओ |

आज जो लोग अत्यधिक भावुक हैं उन्हे अपने आप को बदलने में वक्त लगता हैं और अगर वे ना भी बदले तो क्या, किसी और की ए॓सी की तैसी क्युं होती हैं ? ये बात समझ में नहीं आती हैं |

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राधे का दुःख

August 10th, 2012 · लघु कहानियां

आज हम सुबह सुबह घर से निकले ही थे कि हमारा पुराना मित्र राधे मिल गया रास्ते में, बोला गुरु कहां हो यार में तो तुम्हे ही ढ़ूंढ़ रहा था | एक नई दुख की खबर हैं उस पर तुम कुछ लिखो मियां, मैने पूछा क्या है रे राधे, तू फेर ले के आ गया कुछ, स्साले जब जब भी तू कोई नई खबर लाता हैं और फिर प्रतिक्रिया स्वरुप कुछ ना कुछ मुझ से कहना लिखना आ जाता है और बाद में मेरी ही फजीती होती हैं खैर, चल यार चाय पीते पीते बात करते हैं | हम दोनो सडक पार झुम्मन की चाय की थडी के पास गये, और झुम्मन को दो कट चाय मलाईमार के का आर्डर दिया |

कुछ देर बाद चाय सुडकते हुए हमने बोला बोल भई क्या नई खबर हैं ? फिर राधे ने शुरु किया और झेंपता हुआ बोला अरे उस्ताद…….. क्या सुनाएं पहले से ही गरमी के दिन और दिन दिन रात रात भर ये बिजली विभाग वाले बिजली काट रहे हैं | वेसे भी बिजली के पर युनिट के दाम तो दो दो तीन तीन बार बढ़ा ही दिये हें सरकारों ने, अब बढ़े हुए बिलो के बोझ भी हमारे इकलोतो कंधों पर ही है | जैसे तैसे करके बिजली के बिल भर रहे हैं ‌और दिन काट रहे हैं पर ससूरे ये बिजली वाले अब फिर से दिन रात लाईट काट काट कर के हमें मच्छरों के हवाले किये जा रहे हैं | और वेसे भी हमारा खून है मीठा, तो मच्छरों का तो जैसे स्वरुचीभोज ही हो जाता हैं जैसे |

फिर एक अडंगा ये भी है हमारी सरकारों का कि विभागों को ए॓से ए॓से अधिकार दे रक्खें हैं कि बेइमानों की बिजली चोरी या छीजत का पैसा भी सीधे आदमीयों को अपनी जेब से भरना पडता हैं, यानी उंट की गरदन लम्बी हैं काटो और काटो | करे कोई भरे कोई, बिजली चोर मजे उडा रहे हैं और यहां हम हें कि पहले से दूबले और दुबले हुए जा रहे हैं, आम आदमी की जिन्दगी चिन्तनीय हैं | [Read more →]

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Laugh India Laugh टी.वी. शो में अपने कवि सुनिल के ठहाके

July 21st, 2012 · शख्सियत

हमारे शहर काकंरोली के युवा हास्य कवि अब लाईफ ओके चैनल के Laugh India Laugh शो में अपनी अदाकारी दिखा रहे हैं | ये बहुत ही सराहनीय प्रयास हैं | उल्लेखनीय है कि युवा कवि सुनिल व्यास नें पहले भी अपनी हास्य कविताओं से बडे गंभीर विषयों पर भी अपनी लेखनी चलाई हैं इसी संदर्भ में कई देश विदेशों की यात्राएं भी कर चुके हैं |

कवि सुनिल, कवि होने के साथ ही अच्छे अभिनेता, संगीत, गायन वादन आदि में भी रुची रखते हैं, मंच संचालक और जागरुक नागरिक भी हैं, जो समाज में हो रही हलचल और बातों पर अपना विशिष्ट नजरिया रखते हैं | आप ये विडीयो देखिए और उन्हें वोट भी किजीयेगा ताकि वे ज्यादा से ज्यादा समय तक टी. वी. पर छाये रहें औ‌र उन्हे तगडी कामयाबी मिले | कहते हैं कि “नो बिजनस इज लाइक शो बिजनेस” | और शो बिजनेस में कांकरोली राजसमन्द से निकले, इस तरह की प्रसिद्धि पाने वाले सुनिल जी पहले कवि हैं |

 

फोटो साभारः https://www.facebook.com/kavisunilvyas

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मम्मी और पिंटू

June 20th, 2012 · हास्य

सुबह के आठ बजे हैं, बेटा कुछ देर पहले नींद से उठा ही है |

मम्मीः ले बेटा पोया वण ग्या है, खई ले |
पिंटूः अरे में तो उठ्यो ही तो हूं न, अबाणू सुबे पेली पोया, और हाल तो में दातन भी नी किदो हैं |
अलग सा ही मुंह बनाते हुए मम्मी बोलीः मियां जी, मियां जी दुबला क्युं ? ……………… टड घणी | अरे में केई री हूं खई ले पोया, नियम कायदा उं कई नी वे … !
बेटा पिन्टू आश्चर्य से मम्मी का मुंह देखता रह जाता है |

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पेट्रोल के दाम बढ़े, जनता त्रस्त, राजसमंद बंद का आव्हान

May 31st, 2012 · कांकरोली, नई खबरें

पेट्रोल के बढ़े दामों से लाचार जनता नें राजसमंद बंद का आव्हान किया हैं, और यहां हमारे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता 31 मई को बंद, सफल बनाने में जुटे हुए हैं | सात आठ रुपये पेट्रोल पर एकदम से बढ़ने से जनता की तो कमर ही टूट गई हैं | सब्जी, कपडे कुछ भी सामान लाना हो आजकल छोटे नोटों से तो काम ही नहीं चलता | जनता अब महंगाई के आगे लाचार है और लगभग लाश के जैसी बन चुकी हैं, कोई कितना ही मारे, पीटे या चोट पहुंचाये पर दर्द कुछ होता ही नहीं हैं, क्योंकि सभी संवेदना शून्य हो चुके हैं, सबको पता हैं कि पेट्रोल पर बढ़े भाव फिर कम नहीं हो सकते |

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