Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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पेट्रोल के दाम बढ़े, जनता त्रस्त, राजसमंद बंद का आव्हान

May 31st, 2012 · कांकरोली, नई खबरें

पेट्रोल के बढ़े दामों से लाचार जनता नें राजसमंद बंद का आव्हान किया हैं, और यहां हमारे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता 31 मई को बंद, सफल बनाने में जुटे हुए हैं | सात आठ रुपये पेट्रोल पर एकदम से बढ़ने से जनता की तो कमर ही टूट गई हैं | सब्जी, कपडे कुछ भी सामान लाना हो आजकल छोटे नोटों से तो काम ही नहीं चलता | जनता अब महंगाई के आगे लाचार है और लगभग लाश के जैसी बन चुकी हैं, कोई कितना ही मारे, पीटे या चोट पहुंचाये पर दर्द कुछ होता ही नहीं हैं, क्योंकि सभी संवेदना शून्य हो चुके हैं, सबको पता हैं कि पेट्रोल पर बढ़े भाव फिर कम नहीं हो सकते |

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भर्ती और दंगे

May 22nd, 2012 · उलझन

सेना भर्ती और दंगे :

हमारे देश के राज्यों और प्रदेशों में सेना या पुलिस की भर्ती के दौरान दंगे होना अब एक बडी आम सी समस्या हो चुकी हैं और हाल ही राजस्थान में हुए दंगे, लूटपाट, आम जनता के साथ खींचातानी और सरकारी सम्पत्ती को जो नुकसान पहुंचाया गया हैं, वह असहनीय ही था पर अब ये जो हो चुका हैं तो हो गया हैं, अब पीछे कितने भी लट्ठ जमीन पर पटको कुछ होने जाने वाला नहीं हैं |

पर कुछ मिलाकर ये भर्ती प्रक्रिया के दौरान होने वाले हादसे, दंगे इनके लिये जिम्मेदार हैं कौन ? हम ही तो हैं ना और या फिर सरकार हैं, जो पुख्ता बंदोबस्त नहीं कर पाती हर बार दंगे होते ही हैं, आखिर में युवा तो युवा हैं ही उनकी नौकरी किसी सेटिंग वाले के साले बहनोई को दे दी जाए तो गुस्सा तो होना लाजमी हैं ना, फिर अपने देश में अंदरुनी सेटिंग का भी तो कोइ तौड नहीं हैं |कोई लाख नियम कायदे बना डाले पर हमारा तत्रं ही ए॓सा ही की कहीं ना कहीं कुछ रसूखदारों के लिये गुंजाइश हो ही जाती हैं |

कोई युवा चाहे हर चीज से पास हो जाये पर कहीं ना कहीं कोई जोलझाल कर के, उसकी बजाय किसी ए॓से को नौकरी दे दी जाती हैं जो किसी रसूख वाले का कुछ लगता हैं या उपर से फोन करवा कर आया हैं, या जिसने बडे अमाउंट में किसी को पैसे खिलाये है |

पर पुलिस और सेना के पदों की भरती में होने वाली धांधली को रोकना होगा, हमारे युवा पथभष्ट हो रहे हैं और नतीजा दंगे, लूटपाट, आगजनी और ना जाने क्या क्या | हमारी सरकार को कुछ ना कुछ ए॓सा करना होगा कि कोई भी युवा प्रार्थी जो नौकरी के लिये आया हैं वो ए॓सी गंदी हरकत ना कर पाये |

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सिंघम

May 6th, 2012 · कांकरोली

मेरा एक अजीज मित्र कुछ सालों के बाद आया | मिलने पर हमें बडी खुशी हुई और कुछ खासो आम बातें करने के बाद हमने उन्हें पूछा की और सुनाओ क्या नया जूना चल रहा हैं | मित्र ने कहा की अपनी कांकरोली बिलकुल नहीं बदली दोस्त | यहां आते ही हर गली कुचे में घुम कर आया हूं, पर ये शहर अभी भी वैसा ही नियन्त्रणहीन और अविकसित हैं | हां पर एक बात जरुर हैं इस बार लगता हैं कोई सिंघम आया हैं, हमारे शहर के ट्रेफिक पुलिस के जवान हर नुक्कड चौराहों पर मुस्तैद लग रहे हैं | बडे आश्चर्य की बात हैं, सिर्फ दो तीन किमी की एक सडक से जुडा छोटा सा शहर पर इतनी सुव्यवस्थित यातायात की व्यवस्थाएं |

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माधव नागदा एक बेहतरीन कवि और लेखक

April 2nd, 2012 · शख्सियत

लेखक और कवि माधव नागदा :

माधव नागदा एक बहुत ही उम्दा लेखक व कवि हैं जो कि राजसमंद के नाथद्धारा शहर में रहते हैं | अपने पेशे से ये व्याख्याता है | माधव जी की लेखन शैली बडी ही आकर्षक हैं ‌‌साथ ही ये अपने ब्लाग में भी लिखते हैं, वहां आप उनसे संबंधित बहुत सारी रचनाएं व लेख प्रप्त कर सकते हैं | छोटी छोटी लघु पर जीवन के विभिन्न भावों का सजीव चित्रण करती इनकी रचनाएं आप जरुर पढ़िये, बहुत गजब की लेखन शक्ति हैं इनकी |

राजस्थानी ‌और हिन्दी भाषा में ये लिखते हैं व काफी सारी पत्र-पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं | ‘उसका दर्द’, ‘शाप मुक्ति’, ‘अकाल और खुशबू’, ‘आग’,पहचान, ‘उजास’, ‘सोनेरी पांखा वाळी तितलियाँ ‘, “उसका दर्द” और “ठहरा हुआ वक्त” जैसी जोरदार रचनाएं आपने लिखी हैं जो कि अपने आप में बेजोड रचनाएं हैं | इन्हें अपने लेखन के लिये राजस्थान की साहित्य अकादमी से पुरस्कृत भी किया गया है |

माधव जी के बलाग का पता हैः  http://madhavnagda.blogspot.in/

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धूल के उडते घुबार और हमारा शहर

January 29th, 2012 · नई खबरें

जी हां हमारा प्रिय शहर धूल के ढेर में तब्दील हो चुका है ? शहर वासी इसका खामियाजा भी श्वांस संबंधी परेशानियों की अधिकता के रूप में भुगतने लगे है। वैसे भी मार्बल व अन्य खनिज संबंधित इकाइयो के कारण प्रदूषण तो काफी है ही और अब शहर में धूल से वायु की गुणवत्ता का गिरना वाकई में चिंता का विषय बन चुका है। इसकी मुख्य वजह है ये वाहनों की बढ़ती संख्या, रुडिप के पाइप लाइन के प्रोजेक्ट, बहुत ज्यादा औद्योगिकीकरण और हमारी सुस्त सरकार है। धीरे धीरे शहर की आबोहवा में प्रदूषण के कारण जहर का स्तर बहुत बढ़ रहा है ।

धूल रुपी जहर शहरवासीयों के शरीर मेः

सार की बात यही है कि सडके उजाड दी गई हैं, शहर में पिछले कई समय से सीवरेज पाईप के प्रोजेक्ट चल रहे हैं और पाईपों को सडक के बीच दबा कर यूं ही धूल से ढ़का जा रहा हैं जिससे ये है की यही है कि कांकरोली, राजनगर व आस पास शहर में धूल कणों का घनत्व बहुत बढ़ गया है।

शहर की आबोहवा में घुला जहर (धूल कण) अब शहरवासियों के लिए स्वास्थ्य पर असर डालने लगा है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चों से लेकर बड़ों तक में धूल कण की अधिकता के कारण श्वांस और एलर्जी की शिकायतों वाले रोगियों की संख्या बढ़ रही है। टूटी सडक और धूल पर आस पास के व्यापारी च निवासी कुछ कुछ देर से पानी डाल रहे हैं ताकी धूल कम उडे और उन लोगों की दुकानों पर कम जमे | पर सारे प्रयास बेकार हो जा रहे हैं | धूल के कारण लगातार बार बार छींकें आना, नाक में सनसनाहट होने आदि की शिकायतें बढ़ रही हैं। साथ ही इसका सर्वाधिक विपरीत प्रभाव ट्रैफिक पुलिस के जवानों पर देखा गया है | पता नहीं कब फिर से सही सडके होंगी | पर एक उम्मीद ये भी है कि अभी चाहे कितनी ही धूल फांकनी पड जाये पर कुछ रोज बाद आसान सुविधाएं भी जनता को ही मिलने वाली है | 

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