Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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प्रसिद्ध रचनाकार कमर मेवाडी जी का परिचय

January 15th, 2012 · शख्सियत

राजसमन्द के प्रसिद्ध रचनाकार  व साहित्यकार कमर मेवाडी :

कमर मेवाडी जी

कमर मेवाडी जी

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मेरी हद

January 11th, 2012 · उलझन

मैं हमेशा से ही अपने हद में रहना पसंद करता हूं, वो हद खर्च करने की हो, चाहे किसी रोजमर्रा के कार्य से जुडी कोई बात हो या कोई और पर अपनी हद में रह कर अपनी हैसियत के मुताबित काम करना ही मेरी नजर में सही है | किसी मशहूर लेखक ने लिखा है कि हर किसी को अपनी हद में रहना चाहिये जैसे की किसी आदमी को सडक पर चलते चलते छडी घुमाने की आदत हैं या उसका ये शौक है पर अगर सडक खाली है तो मजे से घुमाओ पर यदि किसी राह चलते को छडी छूती भी है तो यह उस दूसरे आदमी की आजादी का हनन है | सही मायनों में यह शौक दूसरे के लिये दुविधा है, फफूंद हैं और जी का जंजाल है |

पर जाने क्यों आस पास के ही कुछ लोग, वे ही सब कुछ हैं दुनिया में, कोई दूसरा तो जैसे है कि नहीं | दूसरों की आजादी की कद्र करना भी तो कुछ बात होती है पर नहीं, हम तो लकीर के फकीर हैं, वहीं अपनी धुनी रमायेगें, दुसरों को परेशानी हो तो अपने ठेंगे से |

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कुछ अनमोल विडीयो, जो हमें बीते हुए कल की याद दिलाते हैं

January 7th, 2012 · इतिहास के पन्नो से

हमारा देश भारत हमेशा से ही अनेकता में एकता का संदेश देता रहा हैं, पूरी दुनिया में ए॓सा शायद एक ही देश है हमारा भारत जहां बहुत बहुत सारी विविधताएं है, मसलन भाषा की, खानपान की, संस्कृति की, पहनावे की, सभ्यता की, स्थान की और प्राकर्तिक विविधताएं | यहां हर धर्म को मानने वाले को सम्मान है और को यदि किसी को भी ना माने तो भी कोई बाध्यता नहीं | इस ही एकता, अखन्डता के संदेश को और भी ज्यादा रुप से प्रोत्साहित करने के लिये कुछ विडीयो बनाये गये थे जो डी.डी. यानी दूरदर्शन पर अक्सर आते थे | इन सबके पीछे बडे से संदेश छुपे हुए थे, दुनिया संसार में प्रगतिमान होते भारत के प्रति |

इन अनमोल विडीयो फिल्मों में हम देख सकते हैं कि तब तक के समय में भारत के बेहतरीन महान गायक, नर्तक, संगीतकार, साजिन्दे, खिलाडी, गायक कलाकार आदि नें इनमें अपनी प्रस्तुतियां दी और जाने क्युं ये अनायास ही ये अपने समय के इतने ज्यादा देखे जाने वाले विडीयो बनें | तब 1985 – 2002 तक का वह समय और कौन भूल सकता हैं वो

अनमोल रत्नों को जो दूरदर्शन पर छाये रहते थेः

  • मिले सुर मेरा तुम्हारा
  • सुन सुन सुन मेरे मुन्ने सुन, ‍सारा भारत ये कहे प्यार की गंगा बहे
  • बजे सरगम हर तरफ से, गूंज बनकर देश राग
  • सूरज से चमके हम, स्कूल चलें हम

अतं में जाते जातेः जाने आज की पीढ़ी को क्या हुआ हैं, कोई ए॓सी रचनाएं क्यों नहीं बना पा रहे हैं, जबकि तकनिकी तौर पर हम लोग पहले से काफी उन्नत हो चुके हैं, सारी सुख सुविधाएं अब ज्यादा मिल रही हैं | बीता हुआ समय फिर से नहीं आता हैं पर काश यदि ए॓सा हो सकता, 1985 – 2002 का वह सुनहरा समय फिर से आ जाये | तब तक आप आनंद लिजीये इन यादगार विडीयो का जिन्हे देख कर हमें फख्र होता है की हिन्दुस्तान की माटी में हम जन्में |

मिले सुर मेरा तुम्हारा

देश राग

स्कूल चलें हम

सारा भारत ये कहे प्यार की गंगा बहे

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वर्ष 2011 और संगीत व मनोरंजन जगत की विशेष हानि

December 23rd, 2011 · नई खबरें

जी हां यह एकदम सही बात हैं कि वर्ष 2011 में संगीत और मनोरंजन जगत को विशेष हानि हुई | वैसे तो हर साल कुछ ना कुछ विशेष होता ही है पर इस बार साल के आखिरी समय में कुछ ए॓सा घटित हुआ है जो अनोखा हैं | जहां इस साल दुनिया भर में कुख्यात क्रूर नेता गद्दाफी और आतंकवादी ओसामा बिन लादेन की मृत्यु हुई, वही हमारे भारतीय सिनेमा और संगीत जगत के महान सितारे देव आनंद, शम्मी कपूर साहब हमसे बिछड़ गये, साथ ही गजल सम्राट जगजीत सिंह और महान लेखक, संगीतकार, गीतकार, और बहुमुखी प्रतिभा के धनी भूपेन हजारिका और नवाब पटौदी जेसे जोरदार क्रिकेटर भी हम सब को छोड कर चले गये | निश्चित ही ये साल इस लिहाज से बडा ही दुखदायी रहा |

बडे अनमोल हीरों को हमने खोया है पर दुनिया का क्या है, चलती रही है चलती रहेगी | साथ ही इस बार ये साल हमसे मणिकौल जैसे निर्देशक, एक्टर नवीन निश्चल और मिं. इंडिया के विलेन बॉब क्रिस्टो को भी छीन ले गया हैं, जो अपने बेहतर कार्यों के लिये जाने जाते हैं | ये लोग अब हमसे विदा हो चुके हैं पर ये सारे लोग अपने बहुत उत्कृष्ठ कार्यों के कारण संगीत और मनोरंजन जगत में हमेशा जाने जायेंगे | साथ ही वे अपने हजारों लाखों प्रशंसकों की यादों में हमेशा ही जिंवित रहेंगे। कहते हैं अच्छे लोगों को भगवान जल्दी उपर बुला लेते हैं, शायद सही हैं |

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शिक्षक त्रिलोकी मोहन पुरोहित

December 18th, 2011 · शख्सियत

राजसमंद की ख्यतिप्राप्त शख्सियतों में से आज हम मिलवाते हैं आपको कांकरोली के एक अति विशिष्ट शिक्षक त्रिलोकी मोहन जी पुरोहित से | कांकरोली के त्रिलोकी मोहन जी पुरोहित पेशे से एक टीचर यानी शिक्षक हैं, और शिक्षा प्रदान करना ही इनका पेशा हैं | ये बहुत ही प्रखर बुद्धि वाले व्यक्ति हैं | मंच संचालन करना हो, संस्कृत के बारे मे जानकारी की बात हो, या ज्योतिष के बारे में को बात हो, इनका कोई सानी नहीं, शिक्षक होने के कारण इनके नालेज का दायरा बहुत विस्तृत है | एक साधारण से टीचर के पेशे वाला कोई व्यक्ति इतना असाधारण बन जाए तो आश्चर्य की बात है ही | पर पुरोहित सा. ने सब कुछ अपनी स्वयं की मेहनत से हासिल किया |

स्कूल के दिनों में त्रिलोकी मोहन जी का पढ़ाने का तरीका भी विशेष प्रकार का था यानी नई शैली लिये था, बच्चो से दोस्ताना व्यवहार करना और छोटे मोटे उदाहरण आदि से समझाना आदि, और शायद इस कारण ही वे जिस जिस स्कूल में पढ़ाने गये, वहां के बच्चे आज भी गुरुदेव का नाम लेते नहीं थकते | इन सब के साथ ही त्रिलोकी मोहन जी समाज, राज्य व देश के प्रति गंभीर जज्बा रखते हैं और उम्दा लेखक और रचनाकार भी हैं, इनकी व्यंग्य रचनाएं तो बस देखे ही बनती है, पढ़ियेगा इन्हें एक बार जरुर |

गुरुदेव त्रिलोकी मोहन पुरोहित के ब्लाग का पता हैः http://tmpurohit.blogspot.com

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