Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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लाफ्टर चेलेन्ज के डाक्टर साहब का अनोखा लेखन

March 8th, 2007 · 1 टिप्पणी · नई खबरें, हास्य

लाफ्टर चेलेन्ज में आने वाले एक डा. साहब हैं, पुरा नाम उनका तो मुझे मालुम नहीं पर शायद तक अब पुरा देश उन्हें जानता है। साधारण से कद काठी के दिखने वाले डाक्टर सा. लेखक अपने कविता लेखन में एक विशेष प्रकार के मेच्योर व्यंग्य का समावेश करते हुए चलते हैं । जेसे की उन्होने बताया पिछली बार छट्टियों में,  में अपनी बिवी को World Tour पर ले के गया था । अब वो कहती है कि इस बार मुझे किसी नई जगह घुमने जाना है। साधारण सी घटनाओं में से व्यंग्य को डा.साहब किस कदर खींच कर बाहर निकाल कर ले आते हैं, फिर उनका सुनाने के स्टाईल भी एसा लाजवाब कि बस मामला देखने लायक होता है।

डा. साहब की एक कविता की चन्द पंक्तियां हमें बहुत ही पसन्द आई है जिसमें बताते है कि जब एक टपोरी की गजल लिखी तो कैसा लिखा।

” सीधे की लाईफ त्रास है, श्याने की है झकास”  डा. साहब की इस एक लाईन नें तो अपने राम के अन्तर्मन को अन्दर से झकजोर कर रख दिया, हमारे अपने समाज में क्या हो रहा है, यहां कोई सीधा है तो वह कितना बदहाल है, निढ़ाल है, दुखी है व परेशान है ओर यदि कोई टेढ़ा है मतलब श्याना है, तो दुनिया की सफलताएं तो उसके कदम चूम रही हैं।

आगे उन्होने बताया की मुंबई का हर एक आदमी किस कदर गुम है,  किस किस लोचे में ये सुनिये – राशन की लाईन्स में, करोडपति बनने के प्लान्स में, किसी के रोमान्स में !  जोड जोड कर जो ईन्होने लिखा है कि बस सुनने वाले सुनते ही रह जाएं।

अन्त में कविता की पंक्तियां खत्म होती है यहां जहां वे कहते है -“जहन्नुम तो जाना ही है एक ना एक बार, पर सोचता हुं ईससे बुरा जहन्नुम में भी क्या हो हाल अपुन का

आप सोचें की एक टपोरी के मन में क्या क्या चलता रहता होगा, पर फिर भी वो पहले एक इन्सान है, बाद में कुछ और, किस खुबसुरती से डा. साहब ने टपोरी के मन की भाव भंगिमाओं को एक अनोखी, निराली कविता के रुप में चित्रीत किया है, देखने लायक है ।

डिस्क्लेमर – यह छोटा सा लेखक डा. साहब की अद्वितीय लेखन कला एक बहुत बडा फैन है, लेखक का मकसद इस बारें में सिर्फ अपने विचार व्यक्त करना है, ना की डा. साहब की कविता को तोड मरोड कर री पोस्ट करना। वेसे यहां एसा कुछ है भी नहीं, फिर भी कभी इन्टरनेट पर घुमते फिरते डा. साहब यहां आ जायें तो एक गुजारिश है, कृपया कुछ ना कुछ आशिर्वाद स्वरुप टिप्पणी हमारे लिये अवश्य छोड कर जाएं।

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एक टिप्पणी ↓

  • सागर चन्द नाहर

    डॉ साहब का पूरा नाम शायद डॉ तुषार शाह है।

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