Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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राधे का दुःख

August 10th, 2012 · अब तक कोई टिप्पणी नहीं की गई · लघु कहानियां

आज हम सुबह सुबह घर से निकले ही थे कि हमारा पुराना मित्र राधे मिल गया रास्ते में, बोला गुरु कहां हो यार में तो तुम्हे ही ढ़ूंढ़ रहा था | एक नई दुख की खबर हैं उस पर तुम कुछ लिखो मियां, मैने पूछा क्या है रे राधे, तू फेर ले के आ गया कुछ, स्साले जब जब भी तू कोई नई खबर लाता हैं और फिर प्रतिक्रिया स्वरुप कुछ ना कुछ मुझ से कहना लिखना आ जाता है और बाद में मेरी ही फजीती होती हैं खैर, चल यार चाय पीते पीते बात करते हैं | हम दोनो सडक पार झुम्मन की चाय की थडी के पास गये, और झुम्मन को दो कट चाय मलाईमार के का आर्डर दिया |

कुछ देर बाद चाय सुडकते हुए हमने बोला बोल भई क्या नई खबर हैं ? फिर राधे ने शुरु किया और झेंपता हुआ बोला अरे उस्ताद…….. क्या सुनाएं पहले से ही गरमी के दिन और दिन दिन रात रात भर ये बिजली विभाग वाले बिजली काट रहे हैं | वेसे भी बिजली के पर युनिट के दाम तो दो दो तीन तीन बार बढ़ा ही दिये हें सरकारों ने, अब बढ़े हुए बिलो के बोझ भी हमारे इकलोतो कंधों पर ही है | जैसे तैसे करके बिजली के बिल भर रहे हैं ‌और दिन काट रहे हैं पर ससूरे ये बिजली वाले अब फिर से दिन रात लाईट काट काट कर के हमें मच्छरों के हवाले किये जा रहे हैं | और वेसे भी हमारा खून है मीठा, तो मच्छरों का तो जैसे स्वरुचीभोज ही हो जाता हैं जैसे |

फिर एक अडंगा ये भी है हमारी सरकारों का कि विभागों को ए॓से ए॓से अधिकार दे रक्खें हैं कि बेइमानों की बिजली चोरी या छीजत का पैसा भी सीधे आदमीयों को अपनी जेब से भरना पडता हैं, यानी उंट की गरदन लम्बी हैं काटो और काटो | करे कोई भरे कोई, बिजली चोर मजे उडा रहे हैं और यहां हम हें कि पहले से दूबले और दुबले हुए जा रहे हैं, आम आदमी की जिन्दगी चिन्तनीय हैं |

हमने कहा राधे अपने आप को संभाल भाई | ये तो ए॓सा ही चलेगा, हम सभी लोग तरह तरह के टेक्स, कर, हफ्ता और ना ना प्रकार की यन्त्रणाओं के अब आदी हो चुके हैं, थोडा सा और अपने आप को एडजस्ट करना ही होगा | राधे ने कहा लेखक बाबू कुछ तीखा लिखना जरुर इस पर हैं, और चला गया | में झुम्मन के यहां खडा सोच रहा हूं कि आखिर जिंदगी में एक आम आदमी को कितने एडजस्टमेंट और करने होंगे |

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