Rajsamand District, Rajasthan

राजसमन्द जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, ए॓तिहासिक पर्यटन स्थल, मंदिर, किले, मुख्य त्योहार एवं व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी, साथ ही हर घटना को देखने का लेखक का अपना व्यक्तीगत व्यंग्यात्मक नजरिया आज की इस तिरछी दुनिया के सन्दर्भ में…

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भौतिकवादी युग औ‌र हम

February 23rd, 2008 · 1 टिप्पणी · उलझन

कई बार हमारे जेहन में यह सवाल आता है कि, क्या थप्पड मार कर गाल को लाल रखना और लोगों को दिखाना अच्छी बात है ? कई लोग शायद यह आज की आम जिन्दगी में सही समझते होंगे पर हमें तो यह ठीक नहीं लगता । बडे लोग कह गए हैं कि उतने ही पांव पसारिये जितनी लम्बी आपकी रजाई है । पर आजकल का युग तो भौतिकवादी युग है, हर किसी को नई टी.वी., कार, क्रेडिट कार्ड, मोटरसाईकिल व बाजार में बिक रहे महंगे से महंगे उत्पाद चाहिए । हर कोई चाहता है कि जिस वस्तु का बुद्धुबक्से में एड आता है, वह तो घर पर होनी ही चाहिए ।

पर क्या एसा कर के हम खुद के साथ कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं । दिन भर की मेहनत से चंद रुपये कमाने वाला व्यक्ती भी अपने परिवारजनों के सामने आ कर हार जाता है, और मजबुरन जिन्दगी में कुछ ए॓से गलत कदम उठा लेता है कि जिनका पछतावा उसे हमेशा खलता है

क्या महंगे कपडे, गहने, नए इलेक्ट्रिनिक्स, मोटरसाईकिल या कार किसी व्यक्ती को हमेशा का सुकुन प्रदान कर सकते हैं, नहीं । पर फिर भी जिसे देखो उन्हीं के पीछे भागता है । लोग होडाहोडी में अपने घुटने तुडवा रहे हैं । पर दुनिया भी अजीब चीज है हमेशा, उगते हुए सुरज को सलाम ठिकती है । कुछ लोग बहुत ही अतिउत्साही हो चुके है, जिन्हें जीवन में चांद तारे भी तोड कर के लाने हैं, पर अफसोस आज के जमाने में सबसे कठीन काम है तो वह है लून लकडी का जुगाड करना । ए॓से में कुछ लोग जो नाकामयाब होते हैं वे अपनी इहलीला भी समाप्त करने से बाज नहीं आते पर इससे होता क्या है, वह अपने ही परिवारजन व दुसरे लोगों को दुखी कर के चला जाता है ।

शादियों मे गहने कपडे से लेकर हर चीज में दिखावा और सिर्फ दिखावा ही तो होता है, यह सादे ढ़ंग से भी तो की जा सकती हैं, एसे में बडे व निम्न वर्ग के लोगों को फर्क नहीं पडता है पर साला मध्यमवर्गी पीसा जाता है । उसे सब कुछ देखना है रुपये भी उसके पास कम है पर ख्वाब भी उसके उंचे है, घर की औरतें भी समाज बिरादरी में दुसरों से उंचा दर्जा चाहती है तो लिहाजा इसके लिए उन्हें चाहिए सोना सोना और सोना बस । सिर्फ लोगों को दिखावा करने के लिए घर के ही किसी को दुखी करना क्या सही है …….पर इसका कोई इलाज ही नहीं है शायद यही हमारी मर्द जात की नियती है । आखिर क्यों, कोई सादे तरीके से जीना चाहता है तो क्यों ये दुनिया उसे जीने नहीं देती ।

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एक टिप्पणी ↓

  • sidharth

    it waz really a good experience reading your views regarding materialism;
    well i had opened it to find some material for my hindi debate.and ..
    can you please explain me the 3rd line of 3rd paragraph,.?
    repli to my email id.

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